दूसरी छमाही में कमाई बढ़ने से भारतीय कंपनियों की री-रेटिंग होने का अनुमान : रिपोर्ट

दूसरी छमाही में कमाई बढ़ने से भारतीय कंपनियों की री-रेटिंग होने का अनुमान : रिपोर्ट

नई दिल्ली, 11 सितंबर (आईएएनएस)। दूसरी छमाही में कंपनियों की कमाई में तेजी आने और घरेलू संस्थागत पूंजी की वापसी से भारतीय कंपनियों की री-रेटिंग हो सकती है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में शुक्रवार को दी गई।

ओमनीसाइंस कैपिटल की रिपोर्ट के अनुसार, बाजार के मौजूदा कंसोलिडेशन चरण को हाल के प्रदर्शन के पीछे भागने के बजाय शेयरों में धीरे-धीरे निवेश बढ़ाने के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए।

फर्म ने कहा कि संरचनात्मक पूंजीगत व्यय, ऊर्जा बदलाव और बुनियादी ढांचे के विकास से लाभ उठाने वाले कारोबारों में अवसर मौजूद हैं।

रिपोर्ट ने आगाह किया कि मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट के कुछ हिस्सों में वैल्यूएशन अभी भी काफी महंगे हैं। ऐसे में निवेशकों को अच्छी गुणवत्ता वाले ग्रोथ कारोबारों में चुनिंदा निवेश करना चाहिए, खासकर जहां वैल्यूएशन अपेक्षाकृत कम हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे कारोबारों में अवसर केंद्रित हैं, जिन्हें लगातार विकास और ऑपरेटिंग लीवरेज का लाभ मिल सकता है और जो अनुकूल वैल्यूएशन पर उपलब्ध हैं।

प्रमुख क्षेत्रों में बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं, इंफ्रास्ट्रक्चर और पावर एवं बिजनेस सर्विसेज शामिल हैं। इन क्षेत्रों को मजबूत क्रेडिट ग्रोथ, बिजली की बढ़ती मांग और कॉरपोरेट कैपेक्स में सुधार से समर्थन मिल रहा है।

भारतीय शेयरों के वैल्यूएशन में नरमी आने से संस्थागत निवेशकों की दिलचस्पी फिर बढ़ी है। दो साल तक वैल्यूएशन में नरमी के बाद विदेशी निवेशक कई मौकों पर शुद्ध खरीदार बने हैं।

घरेलू आर्थिक बुनियाद अब भी मजबूत बनी हुई है। वित्त वर्ष 2026-27 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि करीब 7 प्रतिशत रहने का अनुमान है, हालांकि कच्चे तेल की कीमतों को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत है।

रिपोर्ट में कहा गया कि अमेरिका और ईरान के बीच सीधे और जवाबी सैन्य हमलों के चलते लंबे समय के शांति समझौते के जरिए कूटनीतिक समाधान की उम्मीद को बड़ा झटका लगा है।

ओमनीसाइंस कैपिटल के प्रेसिडेंट और चीफ पोर्टफोलियो मैनेजर अश्विन के. शमी ने कहा, “कई वर्षों की संभावित आय वृद्धि पहले ही शेयरों की कीमतों में पूरी तरह शामिल हो चुकी है। इससे संभावित रिटर्न डिस्काउंट रेट के आसपास ही रह गया है और निवेशकों को वैल्यूएशन में तेज गिरावट का गंभीर जोखिम है।”

फर्म ने विभिन्न मार्केट कैप वाली कंपनियों के वैल्यूएशन में बड़ा अंतर देखा है। निफ्टी स्मॉलकैप 250 और निफ्टी मिडकैप 150 क्रमशः करीब 34 गुना और 30 गुना ट्रेलिंग पी/ई पर कारोबार कर रहे हैं, जबकि निफ्टी 100 का ट्रेलिंग पी/ई करीब 20 गुना है।

वैश्विक शेयर बाजारों में जोखिम-मुक्त ब्याज दरें अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। अमेरिका में 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड करीब एक साल के उच्च स्तर 4.6-4.7 प्रतिशत पर है। वहीं, भू-राजनीतिक तनाव ने कच्चे तेल और अन्य कमोडिटीज में उतार-चढ़ाव बढ़ा दिया है।

अमेरिकी फेडरल रिजर्व का 16 सितंबर को होने वाला नीतिगत फैसला निकट अवधि में ट्रेजरी यील्ड और वैश्विक जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित करने वाला प्रमुख कारक बना हुआ है।

--आईएएनएस

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