भारत भविष्य की तकनीकों को अपनाने तक सीमित नहीं, दुनिया के लिए समाधान तैयार करने का लक्ष्य: पीएम मोदी

भारत भविष्य की तकनीकों को अपनाने तक सीमित नहीं, दुनिया के लिए समाधान तैयार करने का लक्ष्य: पीएम मोदी

नई दिल्ली, 27 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि भारत अब विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में दूसरे देशों की उपलब्धियों को अपनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि देश का लक्ष्य भविष्य की तकनीकों का विकास करना, उनमें नवाचार को बढ़ावा देना और दुनिया की समस्याओं के समाधान तैयार करना है। उन्होंने कहा कि भारत के युवा जिस कौशल के साथ आगे बढ़ रहे हैं और उनमें जिस तरह का आत्मविश्वास दिखाई दे रहा है, वह उत्साह बढ़ाने वाला है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में आयोजित इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए कहा कि दशकों पहले भारत के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी का अर्थ दूसरे देशों की तुलना में आगे बढ़ने की कोशिश करना था। उस समय दुनिया में विकसित होने वाली तकनीक कुछ वर्षों बाद भारत पहुंचती थी और देश उसे अपनाने या उसमें सुधार करने का प्रयास करता था। हालांकि, 21वीं सदी का भारत अब नई सोच और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि आज भारत का लक्ष्य देश और दुनिया के लिए नई तकनीकें विकसित करना, उनकी दिशा तय करना और वैश्विक समस्याओं के समाधान देने की क्षमता हासिल करना है। भारत को भविष्य की तकनीकों को अपनाने, साहस के साथ नवाचार करने और उनके निर्माण में दुनिया का नेतृत्व करने की जरूरत है।

प्रधानमंत्री ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज देश अपने पहले ही प्रयास में मंगल ग्रह तक पहुंचने में सफल रहा है। भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र तक पहुंचा, जहां इससे पहले कोई देश नहीं पहुंच पाया था। ये उपलब्धियां विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत के बढ़ते सामर्थ्य और आत्मविश्वास को दर्शाती हैं।

कोरोना महामारी के दौरान भारत की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जब दुनिया के कई देश वैक्सीन की उपलब्धता को लेकर चुनौतियों का सामना कर रहे थे, तब भारत ने अपनी वैक्सीन विकसित की। देश ने बड़े स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाया और दूसरे देशों को भी वैक्सीन उपलब्ध कराई। उन्होंने इसे 21वीं सदी के भारत के आत्मविश्वास का उदाहरण बताया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की सभ्यता और संस्कृति की जड़ें ज्ञान और खोज की परंपरा में रही हैं। शून्य की खोज, संख्या प्रणाली के विकास और खगोल विज्ञान में प्रगति से लेकर आज की आधुनिक तकनीकों तक, भारत अपनी वैज्ञानिक विरासत को आगे बढ़ा रहा है। आधुनिक तकनीक और नए आत्मविश्वास के साथ देश इस विरासत को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का प्रयास कर रहा है।

उन्होंने परमाणु ऊर्जा के महत्व पर भी जोर दिया और कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर परमाणु ऊर्जा की जरूरत होगी। ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भारत अपनी स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं का विकास कर रहा है। इसी दिशा में देश फास्ट ब्रीडर रिएक्टर तकनीक पर काम कर रहा है। प्रधानमंत्री ने बताया कि कुछ महीने पहले देश के 500 मेगावाट के प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने पहली बार क्रिटिकलिटी हासिल की, जो भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

उन्होंने कहा कि परमाणु ऊर्जा से लेकर अंतरिक्ष, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और सेमीकंडक्टर तक, अलग-अलग क्षेत्रों की जरूरतें भले ही अलग हों, लेकिन इन सभी क्षेत्रों में भारत अपनी तकनीकी क्षमता और आत्मविश्वास को मजबूत कर रहा है। प्रधानमंत्री ने भारत की समाधान विकसित करने और कुशल मानव संसाधन तैयार करने की क्षमता को भी देश की एक बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि भारत में विकसित कोई समाधान सफल होता है, तो उससे दुनिया के कई देशों की समस्याओं को हल करने का रास्ता भी खुलता है।

उन्होंने भारत के डिजिटल स्टैक और 5जी तकनीक को इसका उदाहरण बताते हुए कहा कि देश की तकनीकी प्रगति केवल घरेलू जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें वैश्विक स्तर पर उपयोगी समाधान उपलब्ध कराने की क्षमता भी है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में विज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करते हुए भविष्य की तकनीकों के विकास में नेतृत्व करने और देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रयास जारी रखने का आह्वान किया।

--आईएएनएस

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