‘आत्मनिर्भर गुजरात से साकार हो रहा आत्मनिर्भर भारत’ का संकल्प

‘आत्मनिर्भर गुजरात से साकार हो रहा आत्मनिर्भर भारत’ का संकल्प

गुजरात, 30 जनवरी (आईएएनएस)। गुजरात की भूपेंद्र पटेल की सरकार वोकल फॉर लोकल के तहत स्थानीय शिल्पकारों और कारीगरों को बड़ा मंच उपलब्ध करा रही है। जहां शिल्पकारों के हाथों को मजबूत करने का काम किया जा रहा है।

‘वोकल फॉर लोकल’ व ‘स्वदेशी’ का मंत्र सही मायने में तब सफल होता है जब स्थानीय कारीगरों और शिल्पकारों के हुनर को प्रोत्साहन मिलता है, साथ ही उत्पादों की बिक्री के लिए बड़ा मंच मिलता है।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात सरकार का कुटीर और ग्रामीण उद्योग विभाग, गुजरात स्टेट हैंडलूम एंड हैंडीक्राफ्ट डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन, गरवी गुर्जरी व इंडस्ट्रियल एक्सटेंशन कॉटेज ऑर्गेनाइजेशन जैसे उपक्रम इस दिशा में गंभीर प्रयास कर रहे हैं। इनके माध्यम से गांवों व छोटे शहरों के हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट से जुड़े शिल्पकारों के हाथों को न केवल मजबूत किया जा रहा है, बल्कि उन्हें ट्रेनिंग से लेकर आर्थिक मदद भी मुहैया कराई जा रही है, साथ ही उनके उत्पादों की बिक्री में भी सहयोग किया जा रहा है।

शिल्पकार गायत्री परमार ने कहा कि यहां पर महिलाओं को हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट से संबंधित ट्रेनिंग दी जाती है। आर्थिक मदद की मुहैया कराई जाती है।

बनासकांठा के अंबाजी की दक्षाबेन रामी के हुनर को राज्य सरकार के प्रयासों से नई पहचान मिली है। दक्षाबेन ‘वेस्ट से बेस्ट’ बनाने के विचार को साकार कर रही हैं और अंबाजी मंदिर में चढ़ाए जाने वाले नारियल के रेशों से गणपति की मूर्ति के अलावा कई आकर्षक वस्तुओं का निर्माण करती हैं। इनकी 'नंदनवन महिला आदिवासी ग्रुप औद्योगिक सहकारी मंडली' आज नारी शक्ति और आत्मनिर्भरता की एक बेहतरीन मिसाल बन चुकी है। इस संस्था द्वारा अब तक 25 से 30 हजार महिलाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है, जिससे 'वोकल फॉर लोकल' अभियान को मजबूती मिली है।

दक्षाबेन रामी ने कहा कि 'वोकल फॉर लोकल' अभियान का जो उद्देश्य है उसे पूरा करने के लिए काम कर रहे हैं।

कच्छ जिले में भुज तालुका के अवधनगर गांव की बुनकर राजीबेन वनकर सालों से बुनाई का काम कर रही हैं। सरकार के स्वच्छता मिशन और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों से प्रेरित होकर वे बेकार प्लास्टिक से बैग, चटाई, सीट, स्टूल जैसी चीजें बनाती हैं। राजीबेन आसपास के 22 गांवों को प्लास्टिक-फ्री बना चुकी हैं। उन्होंने लगभग 150 महिलाओं को रोजगार भी दिया है। राज्य सरकार की योजनाओं के तहत उन्हें अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता भी मिली है और उत्पादों की बिक्री के लिए प्लेटफॉर्म भी मिला है।

कच्छ की हैंडीक्राफ्ट कारीगर राजीबेन वनकर ने बताया कि प्लास्टिक से बैट, चटाई, सीट जैसे उत्पाद बनाते हैं। उन्होंने पीएम मोदी और सीएम भूपेंद्र पटेल की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ मिल रहा है।

स्वदेशी अभियान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन देने के मकसद से राज्य के शिल्पकारों को देश भर में मंच दिलाने के लिए मेलों और एग्जिबिशन में भी उन्हें मौका दिया जा रहा है। 2025-26 के दौरान ऐसे 49 मेलों और एग्जिबिशन में 5,306 कारीगरों को रोजगार मिला, वहीं 1,840 महिला कारीगरों को भी रोजगार दिया गया। इसके साथ ही राज्य के कारीगरों को अब तक 74,000 से अधिक पहचान पत्र बांटे जा चुके हैं, जिनमें से 50,000 से ज्यादा कार्ड महिला शिल्पकारों को दिए गए हैं।

डॉ. संजय जोशी, कार्यकारी निदेशक (आईएनडीईएक्सटी-सी), ने कहा कि देशभर में एग्जिबिशन आयोजित किए जाते हैं, जिससे शिल्पकारों को बड़ा मंच मिल सके।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में राज्य सरकार स्थानीय हैंडीक्राफ्ट कारीगरों को उत्पादों की बिक्री के लिए प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने में भी जुटी है। सरकार के इन्हीं प्रयासों की वजह से गुजरात के हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट सेक्टर में स्थानीय शिल्पकारों और महिला कारीगरों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है, साथ ही साकार हो रहा है ‘आत्मनिर्भर गुजरात से आत्मनिर्भर भारत’ का संकल्प।

--आईएएनएस

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