मुंबई, 16 जून (आईएएनएस)। हिंदी और मराठी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाने वाले निर्देशक और अभिनेता निशिकांत कामत का नाम उन फिल्मकारों में गिना जाता है, जिन्होंने कम समय में बड़ा मुकाम हासिल किया। 'दृश्यम', 'मदारी', 'मुंबई मेरी जान' और 'फोर्स' जैसी फिल्मों से उन्होंने दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। उनकी फिल्मों में मनोरंजन के साथ-साथ समाज की सच्चाई और आम आदमी की भावनाएं भी दिखाई देती थीं।
निशिकांत कामत का जन्म 17 जून 1970 को महाराष्ट्र के दादर में हुआ था। बचपन से ही उन्हें फिल्मों का शौक था। वह अमिताभ बच्चन के बड़े प्रशंसक थे और उनकी लगभग हर फिल्म देखते थे। पढ़ाई के दौरान उनकी रुचि थिएटर की ओर बढ़ी। एक बार वह सिर्फ एक नाटक की रिहर्सल देखने पहुंचे थे, लेकिन वहां उन्हें मंच पर खड़े होने का मौका मिला और यहीं से उनका थिएटर का सफर शुरू हो गया। धीरे-धीरे यह शौक जुनून में बदल गया।
थिएटर में काम करते-करते उनका झुकाव फिल्म निर्माण की ओर बढ़ा। शुरुआत में उन्होंने दूरदर्शन के एक मराठी धारावाहिक में असिस्टेंट के रूप में काम किया। इस दौरान उन्हें एडिटिंग सीखने का मौका मिला और महज 22 साल की उम्र में वह एडिटर बन गए। इसके बाद उन्होंने कुछ साल एडिटिंग का काम किया। 24 साल की उम्र में उन्हें निर्देशन का मौका मिला और यहीं से उनकी नई पहचान बनने लगी। बाद में उन्होंने टीवी छोड़कर लेखन का रास्ता चुना और कई साल तक स्क्रिप्ट राइटिंग पर काम किया।
साल 2005 में उनका बड़ा सपना पूरा हुआ, जब उन्होंने मराठी फिल्म 'डोम्बीवली फास्ट' का निर्देशन किया। यह फिल्म उस साल की सबसे सफल मराठी फिल्मों में शामिल रही। फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों दोनों का प्यार मिला। इसके लिए उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली और फिल्म को सर्वश्रेष्ठ मराठी फीचर फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला।
मराठी सिनेमा में सफलता मिलने के बाद उन्होंने हिंदी फिल्मों का रुख किया। साल 2008 में उनकी फिल्म 'मुंबई मेरी जान' रिलीज हुई, जिसने 2006 के मुंबई ट्रेन धमाकों के बाद लोगों की जिंदगी पर पड़े असर को बेहद संवेदनशील तरीके से दिखाया। इसके बाद उन्होंने 'फोर्स', 'दृश्यम', 'रॉकी हैंडसम' और 'मदारी' जैसी फिल्मों का निर्देशन किया। खासतौर पर 'दृश्यम' ने उन्हें देशभर में नई पहचान दिलाई और यह उनके करियर की सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल हो गई।
निशिकांत सिर्फ निर्देशक ही नहीं, बल्कि एक अच्छे अभिनेता भी थे। उन्होंने '404', 'रॉकी हैंडसम', 'डैडी', 'जूली 2' और 'भावेश जोशी' जैसी फिल्मों में अभिनय किया। 'रॉकी हैंडसम' में उनके निभाए गए खलनायक के किरदार को भी काफी पसंद किया गया था।
कामयाबी की ऊंचाइयों तक पहुंचने के बावजूद उनके दिल में एक अधूरा सपना हमेशा रहा। वह अमिताभ बच्चन को निर्देशित करना चाहते थे। बचपन से जिनकी फिल्में देखकर उन्होंने सिनेमा को समझा था, उनके साथ काम करने की इच्छा उनके मन में हमेशा बनी रही। हालांकि किस्मत ने उन्हें यह मौका नहीं दिया और उनका यह सपना अधूरा ही रह गया।
17 अगस्त 2020 को निशिकांत कामत का निधन हो गया। वह लंबे समय से लिवर संबंधी बीमारी से जूझ रहे थे, जिसके चलते 50 साल की उम्र में उन्होंने आखिरी सांस ली।
--आईएएनएस
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