मुंबई, 29 अप्रैल (आईएएनएस)। कपूर खानदान ने चार पीढ़ियों से दर्शकों को एंटरटेन किया है और आज भी कर रही है। इसी खानदान ने बहुमुखी प्रतिभा के धनी फिल्म निर्माता और एक्टर निकले, लेकिन ऋषि कपूर अपनी फिल्मों के साथ-साथ अपने बेबाक अंदाज के लिए भी जाने गए।
बात चाहे निजी जिंदगी से जुड़ी हो या देश से, उन्होंने हर मामले पर खुलकर राय रखी, लेकिन बेबाक राय रखने वाले ऋषि कपूर को पहली ही फिल्म बॉबी में बड़ी सीख मिली थी, लेकिन पहले उनके हाथ और पैर बुरी तरीके से फूल गए थे। बता दें कि 30 अप्रैल को अभिनेता ऋषि कपूर की पुण्यतिथि है।
ऋषि कपूर ने अपने करियर में कई शानदार और रोमांटिक फिल्में दीं, और जब 70-80 के दशक में अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र जैसे अभिनेता पर्दे पर सिर्फ एक्शन कर रहे थे, तब ऋषि कपूर ने सिनेमा को म्यूजिकल और रोमांस से भरी फिल्में दीं और हिंदी सिनेमा में अपनी पहचान बनाई, लेकिन पहली फिल्म के दौरान उनके पिता राज कपूर ने उन्हें खुले समंदर में अकेला हाथ- पैर मारने के लिए छोड़ दिया था।
दरअसल ऋषि कपूर की बतौर मुख्य अभिनेता पहली फिल्म 'बॉबी' थी और सेट पर उनके लिए काम करना भी मुश्किल था क्योंकि भले ही वे फिल्मी खानदान से थे, लेकिन सेट पर काम करने का अनुभव नहीं था। सेट पर पिता राज कपूर को पिता कहने की भी इजाजत नहीं थी और वे उन्हें साहब बुलाते थे। इसी फिल्म का पहला गाना शूट होना था और अभिनेता को लगा कि गाना फिल्माने के लिए कोई कोरियोग्राफर बुलाया जाएगा, लेकिन काफी इंतजार करने के बाद सेट पर कोई नहीं आया और राज कपूर ने आदेश दिया कि कोई कोरियोग्राफर नहीं आएगा और जो करना है वो तुम्हें खुद करना है।
ये सुनकर ऋषि कपूर के हाथ-पैर सुन्न हो गए। पहले तो उन्होंने इनकार किया, लेकिन राज कपूर की एक सीख ने उन्हें जिंदगी की सबसे बड़ी सीख दी। राज कपूर ने कहा कि अगर किसी कोरियोग्राफर को बुलाता तो वो तुम्हें वैसा करने के लिए कहता, जो उसने धर्मेंद्र या अमिताभ ने किया, क्योंकि उसने बहुत सारे लोगों को सिखाया है। ऐसे में लोग कहेंगे कि नया लड़का धर्मेंद्र या अमिताभ की नकल कर रहा है, तो इसलिए जो करना है, वो खुद को करो और पूरी आजादी के साथ करो। उस दिन से लेकर आने वाली फिल्मों में ऋषि कपूर ने गानों की लिप-सिंकिंग, डांस और स्टाइल को खुद से किया और पर्दे पर अपनी अलग पहचान बनाई।
--आईएएनएस
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