विपक्षी सांसदों ने छात्र आंदोलन और एफसीआरए बिल पर गृहमंत्री अमित शाह से मांगा जवाब

विपक्षी सांसदों ने छात्र आंदोलन और एफसीआरए बिल पर गृहमंत्री अमित शाह से मांगा जवाब

नई दिल्ली, 7 अगस्त (आईएएनएस)। संसद के मानसून सत्र के दौरान शुक्रवार को विपक्षी सांसदों ने मकर द्वार पर विरोध प्रदर्शन करते हुए 20 जुलाई को सीजेपी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई और अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा में कथित हेराफेरी, एफसीआरए बिल सहित कई मुद्दों पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से जवाब मांगा है।

कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की ‘जेन जी’ पर की गई टिप्पणी का हवाला देते हुए कहा कि यदि उन्हें वास्तव में देश के युवाओं और छात्रों की चिंता है, तो उन्हें सबसे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस्तीफा देने के लिए कहना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि इस्तीफा नहीं दिया जाता, तो गृह मंत्री को कम से कम संसद में आकर छात्रों से माफी मांगनी चाहिए।

वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि आरएसएस सरकार को नियंत्रित कर रही है और यदि उसे छात्रों की वास्तविक चिंता है, तो छात्रों पर हुए कथित अत्याचारों की सार्वजनिक रूप से निंदा करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर पेलेट गन का इस्तेमाल किया गया और छात्र अब जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। इस पूरे मामले पर आरएसएस प्रमुख की चुप्पी को उन्होंने केवल दिखावा बताया।

झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थियों के आंदोलन पर भी वेणुगोपाल ने कांग्रेस का पक्ष स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि जहां भी छात्र अपने जायज अधिकारों और मांगों के लिए शांतिपूर्ण आंदोलन करेंगे, कांग्रेस उनके साथ खड़ी रहेगी। उन्होंने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी छात्रों के समर्थन की बात कही है और पार्टी उनके मुद्दों को लगातार उठाती रहेगी।

इस बीच केंद्र सरकार द्वारा लाए गए एफसीआरए संशोधन विधेयक को लेकर भी कांग्रेस ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। वेणुगोपाल ने कहा कि जब संसद का कामकाज सुचारु रूप से नहीं चल रहा है, तब सरकार इतने महत्वपूर्ण विधेयक को जल्दबाजी में पारित नहीं करा सकती। उनका कहना था कि इस विधेयक का असर लाखों लोगों, गैर-सरकारी संगठनों और अल्पसंख्यक समुदायों पर पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस इस विधेयक का जोरदार विरोध करेगी और इसे पारित नहीं होने देगी।

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने भी मोहन भागवत की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अब आरएसएस डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि यदि आरएसएस मानता है कि प्रदर्शनकारियों की मांगें उचित हैं, तो सरकार उन मांगों को स्वीकार क्यों नहीं कर रही? उन्होंने प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री से संसद में हुई घटनाओं के लिए माफी मांगने की मांग भी दोहराई। साथ ही उन्होंने शिक्षा पर बजट के 6 प्रतिशत आवंटन की मांग उठाते हुए कहा कि सरकार को शिक्षा क्षेत्र को प्राथमिकता देनी चाहिए।

राहुल गांधी द्वारा रांची में आंदोलन जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थियों के समर्थन पर प्रमोद तिवारी ने कहा कि कांग्रेस छात्रों की सभी जायज समस्याओं का समाधान चाहती है। उन्होंने बताया कि झारखंड सरकार ने इस मुद्दे पर चार मंत्रियों और छात्र प्रतिनिधियों का एक समूह गठित किया है, जो जल्द ही बातचीत कर समाधान निकालने का प्रयास करेगा।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के आरोपों का जवाब देते हुए प्रमोद तिवारी ने कहा कि यदि सरकार भगवान राम के मुद्दे पर चर्चा कराना चाहती है, तो विपक्ष उसके लिए तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और विपक्ष भगवान राम के भक्त हैं, जबकि भाजपा ने भगवान राम को राजनीति और कारोबार का माध्यम बना दिया है।

कांग्रेस सांसद करमवीर सिंह बौद्ध ने भी मोहन भागवत की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी बातें सुनने में अच्छी लगती हैं, लेकिन पिछले 12 वर्षों में सरकार की योजनाओं का लाभ आम लोगों तक किस हद तक पहुंचा है, यह बड़ा सवाल है। उन्होंने कहा कि देश में न्यायपालिका, विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की कमी, गरीबों के भूमि अधिकार, सीवर और गटर में काम करने वाले श्रमिकों की मौत जैसे गंभीर मुद्दों पर भी चर्चा होनी चाहिए। उनका कहना था कि यदि वास्तव में सुधार की बात करनी है, तो सबसे पहले सभी वर्गों के लिए समान शिक्षा और समान अधिकार सुनिश्चित किए जाने चाहिए।

कांग्रेस सांसद जेबी माथर ने भी राहुल गांधी के छात्र आंदोलनों के समर्थन का बचाव किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी संसद के भीतर और बाहर लगातार छात्रों से संवाद करते रहे हैं, उनकी समस्याएं सुनते हैं और उन्हें समझने का प्रयास करते हैं। उनके अनुसार राहुल गांधी छात्रों की आवाज हैं और उनकी मांगों को संसद से लेकर सड़क तक लगातार उठाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस छात्रों को न्याय दिलाने और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए हरसंभव प्रयास करती रहेगी।

--आईएएनएस

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