नई दिल्ली, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने सोमवार को विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर हमला करते हुए उनके फॉर्म 6, निर्वाचन आयोग और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से संबंधित आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने राहुल गांधी पर उच्चतम न्यायालय की कार्यवाही के संबंध में भ्रामक जानकारी फैलाने का आरोप लगाया।
भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि कांग्रेस नेता ने उच्चतम न्यायालय की टिप्पणियों को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया और गलत रूप से यह दर्शाया कि न्यायालय ने यह स्थापित कर दिया है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने भाजपा को लाभ पहुंचाने के लिए अवैध और एकतरफा रूप से फॉर्म 6 में बदलाव किया है।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने उच्चतम न्यायालय में सुनवाई के तुरंत बाद सोशल मीडिया मंच एक्स पर यह आरोप लगाए थे। पात्रा के अनुसार, गांधी ने दावा किया था कि यह बिना किसी संदेह के स्थापित हो गया है कि कुमार ने अवैध और एकतरफा तरीके से फॉर्म 6 को बदला है और अपने पद का दुरुपयोग भाजपा की सहायता के लिए किया है। राहुल गांधी ने यह भी कहा था कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराना होगा।
भाजपा नेता ने इस व्याख्या को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि उच्चतम न्यायालय ने न तो फॉर्म 6 को अवैध घोषित किया है और न ही उसे खारिज किया है। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने केवल यह स्पष्ट किया है कि उसने किसी भी संशोधित फॉर्म 6 को अनुमोदित नहीं किया है और यह जानने के लिए आधिकारिक अभिलेखों की जांच करना चाहता है कि बदलाव किसने किए हैं।
संबित पात्रा के अनुसार, सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने टिप्पणी की थी कि न्यायालय ने किसी भी परिवर्तित फॉर्म 6 को स्वीकृति नहीं दी है और यह स्थापित करने के लिए अभिलेखों की जांच करनी होगी कि संशोधन किसने किया है। पात्रा ने कहा कि इस टिप्पणी को इस न्यायिक निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता कि फॉर्म 6 स्वयं अवैध है।
भाजपा नेता ने निर्वाचन आयोग की 26 सितंबर की प्रेस विज्ञप्ति का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि एसआईआर प्रक्रिया के लिए फॉर्म 6 से संलग्न घोषणा को उच्चतम न्यायालय ने बरकरार रखा है। उन्होंने कहा कि गांधी इस विषय को इस प्रकार प्रस्तुत कर भ्रम उत्पन्न कर रहे हैं, मानो पूरे फॉर्म 6 को ही अवैध घोषित कर दिया गया हो।
दरअसल, राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने पोस्ट में आरोप लगाया था कि उच्चतम न्यायालय की कार्यवाही से यह स्थापित हो गया है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने अवैध और एकतरफा तरीके से फॉर्म 6 में बदलाव किया है। उन्होंने कथित बदलाव को भाजपा की सहायता के लिए मुख्य निर्वाचन आयुक्त के पद के दुरुपयोग के एक और प्रमाण के रूप में बताया।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि लोकतंत्र पर हमले के रूप में उल्लेखित इस मामले में कथित रूप से शामिल मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य लोगों को जवाबदेह ठहराना होगा।
हालांकि, भाजपा ने तर्क दिया कि राहुल गांधी की व्याख्या उच्चतम न्यायालय द्वारा सुनवाई के दौरान कही गई बातों से कहीं आगे है। संबित पात्रा ने कहा कि न्यायालय ने इस पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला है कि विवादित बदलाव किसने किए या क्या वे बदलाव अवैध थे।
भाजपा प्रवक्ता ने एसआईआर प्रक्रिया के लिए दस्तावेज़ीकरण पर निर्वाचन आयोग के रुख को स्पष्ट करते हुए उच्चतम न्यायालय के 27 मई, 2026 के निर्णय का भी हवाला दिया। भाजपा प्रवक्ता ने तर्क दिया कि उच्चतम न्यायालय का निर्णय ऐसी व्याख्या का समर्थन नहीं करता।
पात्रा ने इस आरोप का भी खंडन किया कि एसआईआर का निर्णय एकतरफा रूप से लिया गया था। उन्होंने कहा कि 24 जून, 2025 को जारी बिहार एसआईआर आदेश को तीनों निर्वाचन आयुक्तों ने सर्वसम्मति से अनुमोदित किया था। पात्रा के अनुसार, निर्वाचन आयोग ने स्वयं अपनी तथ्य-जांच प्रतिक्रिया में इस स्थिति को दोहराया था।
भाजपा ने कहा कि यह निर्णय आयोग द्वारा सामूहिक रूप से लिया गया था और घोषणा से जुड़े सार्वजनिक रिकॉर्ड को इस बात के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया कि तीनों निर्वाचन आयुक्तों ने इस प्रक्रिया में भाग लिया था।
उन्होंने गांधी पर आरोप लगाया कि वे इस निर्णय को एक व्यक्ति की कार्रवाई के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं, जबकि भाजपा द्वारा उद्धृत निर्वाचन आयोग की स्थिति के अनुसार, यह तीन सदस्यीय आयोग का सर्वसम्मत निर्णय था।पात्रा ने राफेल लड़ाकू विमान विवाद के संबंध में गांधी की ओर से पहले की गई उच्चतम न्यायालय की आलोचना का भी उल्लेख किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि गांधी ने पहले राफेल मामले में उच्चतम न्यायालय ने क्या कहा था, इस बारे में गलत दावे किए थे और बाद में उन्हें न्यायालय के समक्ष अपने बयानों पर स्पष्टीकरण देना पड़ा था।
पात्रा ने तर्क दिया कि फॉर्म 6 विवाद में भी एक समान प्रवृत्ति उभर रही है, जहां पूरी कानूनी अभिलेखों की जांच से पहले ही उच्चतम न्यायालय की टिप्पणियों की राजनीतिक व्याख्या की जा रही है।
उन्होंने राजनीतिक नेताओं से आग्रह किया कि संवैधानिक संस्थाओं से जुड़े सार्वजनिक आरोप लगाने से पहले वे निर्णयों और आधिकारिक दस्तावेजों का ध्यानपूर्वक अध्ययन करें।
पात्रा द्वारा उठाया गया एक अन्य मुद्दा यह दावा था कि निर्वाचन आयोग ने फॉर्म 6 और एसआईआर से संबंधित अपनी 26 सितंबर की प्रेस विज्ञप्ति को वापस ले लिया है।
पात्रा ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि प्रेस विज्ञप्ति वापस नहीं ली गई है। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग ने इस विषय पर तथ्य-जांच जारी की है और 26 सितंबर की विज्ञप्ति आयोग के सार्वजनिक रिकॉर्ड का हिस्सा बनी हुई है।
भाजपा नेता के अनुसार, उच्चतम न्यायालय में सुनवाई के बाद प्रेस विज्ञप्ति वापस लिए जाने की बात कहने वाली खबरें असत्य हैं। उन्होंने राहुल गांधी पर संवैधानिक संस्थाओं के विरुद्ध आरोप लगाकर भ्रम और अस्थिरता पैदा करने का प्रयास करने का आरोप लगाया।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि राजनीतिक मतभेद वैध हैं, लेकिन दावा किया कि उच्चतम न्यायालय और निर्वाचन आयोग का चुनिंदा रूप से उल्लेख नहीं किया जाना चाहिए या उन्हें इस तरह प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए, जो भाजपा के अनुसार, उनकी वास्तविक स्थिति को विकृत करता हो।
--आईएएनएस
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