गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन के रहने वाले हरीश राणा पिछले करीब 13 साल से परमानेंट वेजिटेटिव स्टेट में थे। साल 2013 में हुए एक हादसे के बाद उन्हें गंभीर ब्रेन इंजरी हुई थी और तब से उनका दिमाग सामान्य रूप से काम नहीं कर रहा था।
लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च 2026 को हरीश राणा को पैसिव इच्छामृत्यु की अनुमति दे दी। 14 मार्च को उन्हें गाजियाबाद स्थित घर से दिल्ली के एम्स के पैलिएटिव केयर विभाग में शिफ्ट किया गया, जहां मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत आगे की प्रक्रिया की जा रही है।
यह मामला देश में पैसिव इच्छामृत्यु और गरिमा के साथ जीवन समाप्त करने के अधिकार पर एक अहम बहस को फिर से सामने ला रहा है।
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