रांची, 20 सितंबर (आईएएनएस)। झारखंड में प्रतिबंधित नक्सली संगठन तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी (टीएसपीसी) के प्रमुख कमांडर बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह के उत्तर प्रदेश के वाराणसी में रविवार सुबह मुठभेड़ में मारे जाने के साथ ही खौफ के एक बड़े चैप्टर का अंत हो गया है। संगठन के कई प्रमुख कमांडर पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं या मुठभेड़ों में मारे गए हैं। ऐसे में बृजेश की मौत के बाद संगठन के नेतृत्व और उसके बचे हुए नेटवर्क को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी बढ़ गई है।
बृजेश गंझू लंबे समय से झारखंड की सुरक्षा एजेंसियों के लिए वांटेड था। उस पर झारखंड सरकार ने 25 लाख रुपये और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने पांच लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। एनआईए उससे जुड़े टेरर फंडिंग मामलों की जांच कर रही थी। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, टीएसपीसी से जुड़े मामलों में कोयला कारोबार, परिवहन और ठेकेदारी से जुड़े लोगों से लेवी वसूली के आरोप सामने आते रहे हैं। वाराणसी में यूपी एटीएस के साथ मुठभेड़ में बृजेश के मारे जाने के बाद अब एजेंसियों का ध्यान संगठन के बचे हुए नेटवर्क और उसके वित्तीय स्रोतों पर भी है।
सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि संगठन से जुड़े कौन-कौन लोग अभी सक्रिय हैं और उसके वित्तीय तथा लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में कौन लोग शामिल हैं। बृजेश के बाद पलामू के मनातू थाना क्षेत्र के केदल गांव निवासी शशिकांत गंझू का नाम संगठन के प्रमुख सक्रिय कमांडर के रूप में सामने आ रहा है। उस पर झारखंड सरकार ने 10 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा है। वह एनआईए के मामलों में भी वांटेड बताया जाता है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, पलामू, चतरा, लातेहार, गढ़वा और हजारीबाग समेत कई जिलों में उसके खिलाफ मामले दर्ज हैं।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2010 के बाद शशिकांत कई बार सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में बच निकलने में सफल रहा है। सितंबर 2025 में पलामू के मनातू थाना क्षेत्र के केदल में सुरक्षा बलों के साथ हुई मुठभेड़ में भी वह बच निकला था। इस घटना में दो पुलिसकर्मियों के शहीद होने की बात सामने आई थी। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, वह हथियारों से लैस रहता है और लगातार अपना ठिकाना बदलता रहा है। पुलिस की पूर्व जांच में शशिकांत के अंधविश्वास से जुड़े पहलुओं का भी उल्लेख सामने आया था। केदल और आसपास का इलाका उसका पुराना प्रभाव क्षेत्र बताया जाता है। हाल में जेल से बाहर आया टीएसपीसी से जुड़ा नथुनी सिंह भी उसके संपर्क में आया है। टीएसपीसी के कई अन्य प्रमुख कमांडर या तो गिरफ्तार हो चुके हैं या सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ों में मारे गए हैं।
बृजेश की मौत के बाद संगठन के सामने बचे हुए कैडर को एकजुट रखने और अपने पुराने नेटवर्क को बनाए रखने की चुनौती है। दूसरी ओर, सुरक्षा एजेंसियां संगठन के बचे हुए ढांचे को निष्क्रिय करने के लिए उसके सक्रिय सदस्यों और संपर्क सूत्रों की जानकारी जुटा रही हैं। उत्तर प्रदेश में भी टीएसपीसी से जुड़े कमांडरों की गतिविधियां सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर रही हैं। वर्ष 2025 में पलामू में सुरक्षाबलों से बच निकला टीएसपीसी कमांडर नगीना वाराणसी में पकड़ा गया था। पूछताछ में शशिकांत के साथ उसके संपर्क और उत्तर प्रदेश में आवाजाही से जुड़ी जानकारी सामने आने की बात कही गई थी।
बृजेश गंझू के मारे जाने के बाद झारखंड पुलिस, एनआईए और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की नजर अब शशिकांत और संगठन के बचे हुए नेटवर्क पर है। सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती अब टीएसपीसी के बचे हुए कैडर, हथियारों, संपर्कों और लेवी तथा टेरर फंडिंग से जुड़े स्रोतों तक पहुंचकर उसके नेटवर्क को निष्क्रिय करना है।
--आईएएनएस
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