तिरुवनंतपुरम : पवन कल्याण ने त्रिप्रयार मंदिर में चढ़ाए रेशमी वस्त्र, दीपाराधना में लिया हिस्सा

तिरुवनंतपुरम : पवन कल्याण ने त्रिप्रयार मंदिर में चढ़ाए रेशमी वस्त्र, दीपाराधना में लिया हिस्सा

तिरुवनंतपुरम/त्रिशूर, 11 सितंबर (आईएएनएस)। आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और जनसेना पार्टी प्रमुख पवन कल्याण ने शुक्रवार को केरल के प्रसिद्ध त्रिप्रयार श्री रामस्वामी मंदिर में पूजा-अर्चना की। यह प्रसिद्ध नालंबलम तीर्थयात्रा से जुड़े प्रमुख मंदिरों में से एक माना जाता है।

मंदिर परंपराओं के अनुसार पवन कल्याण ने कई विशेष धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया और श्री रामस्वामी, भगवान कृष्ण और भगवान अयप्पा की पूजा की।

उन्होंने मंदिर की महत्वपूर्ण सेवाओं में शामिल दीपाराधना अनुष्ठान में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने एक दिन की दीपाराधना सेवा के लिए दान दिया और स्वयं दीप प्रज्ज्वलित किए। उन्होंने मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार के सामने स्थित श्रीकृष्ण मंदिर में स्थापित मुख्य दीप भी जलाए।

उपमुख्यमंत्री ने मंदिर में आयोजित पारंपरिक मीनूट्टु और वेदी वाजीपाडु सेवाओं में भी हिस्सा लिया। उन्होंने मीनूट्टु अनुष्ठान के दौरान मंदिर के पास बहने वाली थीवरा नदी में मछलियों को भोजन कराया। श्रद्धालुओं का मानना है कि मछलियों को भोजन कराना भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार को भोग लगाने के समान माना जाता है। पवन कल्याण ने शंख, चक्र और धनुष धारण किए हुए श्री रामस्वामी के दर्शन किए तथा मंदिर की सायंकालीन पूजा में भी भाग लिया।

उन्होंने मंदिर परिसर में भगवान कृष्ण, श्री रामस्वामी और भगवान अयप्पा को रेशमी वस्त्र अर्पित किए। इसके अलावा उन्होंने दक्षिणामूर्ति, भगवान गणेश तथा शेषशायी भगवान अनंत पद्मनाभ की भी विशेष पूजा-अर्चना की। सभी धार्मिक अनुष्ठानों के बाद मंदिर के मुख्य पुजारी रमन थिरुमेनी ने पवन कल्याण को तीर्थ प्रसाद और आशीर्वाद प्रदान किया।

इससे पहले मंदिर पहुंचने पर कोचीन देवस्वम बोर्ड के अध्यक्ष, मंदिर समिति के सदस्यों, देवस्वम विभाग के आयुक्त, मंदिर प्रशासन और पुजारियों ने उनका पारंपरिक स्वागत किया। श्री रामस्वामी के दर्शन से पहले पवन कल्याण मंदिर परिसर के उत्तरी भाग में स्थित श्रीकृष्ण मंदिर गए और मीनूट्टु अनुष्ठान में भाग लिया।

इसके बाद उन्होंने वेदी वाजीपाडु अनुष्ठान में हिस्सा लिया, जिसमें पारंपरिक रूप से पटाखे छोड़े जाते हैं। त्रिप्रयार मंदिर में यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है।

मान्यता के अनुसार, जब हनुमान ने माता सीता का पता लगने का समाचार भगवान राम को सुनाया था, तब भगवान राम ने पटाखों जैसी गूंजती ध्वनि के माध्यम से अपनी प्रसन्नता व्यक्त की थी। इसी परंपरा के तहत आज भी मंदिर में वेदी वाजीपाडु किया जाता है।

पवन कल्याण ने इस सेवा के तहत 1,001 पटाखे छोड़ने की व्यवस्था के लिए दान दिया। बाद में उन्होंने श्री शास्ता रूप में पूजे जाने वाले भगवान अयप्पा के मंदिर में भी दर्शन कर तीर्थ प्रसाद ग्रहण किया।

मंदिर से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार, त्रिप्रयार में स्थापित श्रीराम की प्रतिमा की पूजा द्वापर युग में भगवान कृष्ण ने की थी। यह भी माना जाता है कि द्वारका नगरी के समुद्र में डूब जाने के बाद राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न की मूर्तियां केरल के तट पर आकर मिली थीं।

पवन कल्याण इन दिनों मंदिर के समीप स्थित एक आयुर्वेदिक केंद्र में उपचार के लिए केरल में हैं। इसी दौरान उन्होंने शुक्रवार को मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया।

--आईएएनएस

एएमटी/एबीएम