सुकमा, 5 सितंबर (आईएएनएस)। छत्तीसगढ़ कभी नक्सलियों का गढ़ माने जाने वाले सुकमा जिले के गोगुंडा इलाके में अब बदलाव की नई तस्वीर दिखाई दे रही है। जिस इलाके में कभी सुरक्षा बल हेलीकॉप्टर से ही पहुंच पाते थे, वहां अब सड़क, बिजली, स्कूल और आंगनबाड़ी जैसी बुनियादी सुविधाएं लोगों का जीवन आसान बना रही हैं, हालांकि इलाके में सुरक्षा की चुनौती अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
गोगुंडा का नाम कभी नक्सल गतिविधियों और दहशत के लिए जाना जाता था। क्षेत्र में आईईडी और नक्सली डंप की मौजूदगी के कारण ग्रामीणों के लिए सामान्य जीवन बेहद मुश्किल था। सड़क और बिजली जैसी सुविधाओं का अभाव था। स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र भी यहां दूर की बात थे। सुरक्षा बलों के जवान कई बार हेलीकॉप्टर के जरिए ही इलाके में पहुंच पाते थे।
स्थिति में बदलाव तब शुरू हुआ, जब 74वीं बटालियन सीआरपीएफ ने यहां कैंप स्थापित किया। कैंप की स्थापना के बाद इलाके में सड़क निर्माण शुरू हुआ और बिजली भी पहुंची। इसके साथ ही स्कूल और आंगनबाड़ी जैसी सुविधाएं ग्रामीणों तक पहुंचने लगीं। सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने के साथ ग्रामीणों में भी नक्सलियों का भय धीरे-धीरे कम हुआ।
हालांकि गोगुंडा में चुनौतियां अभी बरकरार हैं। कैंप तक आज भी वाहन से पहुंचना संभव नहीं है। बाइक भी कैंप तक नहीं जा सकती। जवानों और ग्रामीणों को पहाड़ चढ़कर कैंप के शीर्ष तक पहुंचना पड़ता है। इलाके की भौगोलिक स्थिति और आईईडी का खतरा सुरक्षा बलों के लिए लगातार चुनौती बना हुआ है।
आईएएनएस की टीम पहली बार इस इलाके में सुरक्षा बलों की गतिविधियों और वहां हो रहे बदलाव को कवर करने पहुंची। सीआरपीएफ जवानों ने हाई रिस्क क्षेत्र में मीडिया टीम का हौसला बढ़ाया और धन्यवाद दिया। जवानों के मुताबिक, इलाके में खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। हर सप्ताह आईईडी मिलने की घटनाएं सामने आती हैं। पुलिस और नक्सली सूत्रों के अनुसार, पूरे क्षेत्र में अब भी बड़ी संख्या में आईईडी जमीन में दबे होने की आशंका है।
सीआरपीएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि 2014 में यहां सड़क, स्कूल और अस्पताल जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति बेहद खराब थी। अब सुरक्षा बलों और संयुक्त टीमों के प्रयास से विकास तेजी से हो रहा है। स्थानीय लोग भी मदद के लिए आगे आ रहे हैं और सुरक्षा बलों के साथ सहयोग कर रहे हैं।
गोगुंडा में कैंप, सड़क, बिजली और स्कूल का पहुंचना इस बात का संकेत है कि नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा के साथ विकास को आगे बढ़ाकर ही स्थायी बदलाव लाया जा सकता है।
--आईएएनएस
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