प्रणब मुखर्जी का मानना था- पीएम मोदी से पहले किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री को 'जनता से सीधे जनादेश' नहीं मिला : शर्मिष्ठा मुखर्जी

प्रणब मुखर्जी का मानना था- पीएम मोदी से पहले किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री को जनता से सीधे जनादेश नहीं मिला : शर्मिष्ठा मुखर्जी

नई दिल्ली, 27 जून (आईएएनएस)। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी और पूर्व कांग्रेस नेता शर्मिष्ठा मुखर्जी ने एक लेख में दावा किया है कि उनके दिवंगत पिता का मानना था कि नरेंद्र मोदी देश के पहले ऐसे प्रधानमंत्री थे जिन्हें प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में जनता से सीधे जनादेश मिला। उन्होंने लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी से पहले नेहरू से लेकर मनमोहन सिंह तक कोई भी प्रधानमंत्री सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नहीं चुना गया था। उन्हें या तो उनकी पार्टी ने चुना था या फिर चुनावों के बाद गठबंधन के समीकरणों के आधार पर चुना गया था।

शर्मिष्ठा मुखर्जी ने लिखा, "भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा करने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री को लेकर चल रही बहस के बीच मुझे अपने स्वर्गीय पिता प्रणब मुखर्जी की 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जबरदस्त जीत पर कही गई एक दिलचस्प बात याद आती है। उस समय बाबा भारत के 13वें राष्ट्रपति थे। अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े होने के बावजूद दोनों के बीच अच्छे संबंध थे, जो एक सच्चे लोकतंत्र की पहचान है।"

उन्होंने लिखा कि चुनाव परिणाम आने के बाद नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति भवन में प्रणब मुखर्जी से मिलने पहुंचे। बातचीत के दौरान प्रणब मुखर्जी ने उनसे चुनाव परिणाम का विश्लेषण पूछा। उन्होंने जवाब दिया कि तीन दशकों के बाद किसी राजनीतिक पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला है। तब बाबा ने अपने खास प्रोफ़ेसर वाले अंदाज़ में पूछा, "और क्या?" जब मोदी जी चुप रहे, तो बाबा ने बताया कि 2014 का लोकसभा चुनाव इतिहास में अनोखा था, क्योंकि इसमें प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर एक नया चेहरा घोषित किया गया था।

लेख के अनुसार, भाजपा को मिला व्यापक जनसमर्थन केवल पार्टी के पक्ष में नहीं था, बल्कि प्रधानमंत्री पद के लिए नरेंद्र मोदी के पक्ष में भी स्पष्ट जनादेश था। शर्मिष्ठा मुखर्जी ने लिखा कि पहले के चुनावों में प्रधानमंत्री पद का चेहरा या तो औपचारिक रूप से घोषित नहीं किया जाता था, या फिर चुनाव के बाद निर्वाचित सांसद अथवा गठबंधन दल मिलकर नेता का चयन करते थे।

उन्होंने आगे लिखा कि पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह जननेता नहीं थे और उन्हें तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री पद के लिए चुना था। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पी. वी. नरसिम्हा राव और एच. डी. देवेगौड़ा प्रधानमंत्री बनने के समय संसद के सदस्य नहीं थे। उनके अनुसार, 2014 का चुनाव भारतीय राजनीति में ऐसा बदलाव लेकर आया जिसमें मतदाताओं ने लगभग राष्ट्रपति प्रणाली जैसी शैली में नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री के रूप में जनादेश दिया।

शर्मिष्ठा मुखर्जी ने लिखा कि 2014 से पहले नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय राजनीति में नए थे। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई थी, लेकिन 2014 उनका पहला लोकसभा चुनाव था। उन्होंने इसे अभूतपूर्व बताते हुए लिखा कि पहली बार कोई व्यक्ति पहली बार सांसद बनकर सीधे प्रधानमंत्री बना। उन्होंने संसद भवन की सीढ़ियों पर झुककर प्रणाम करने की पीएम मोदी की तस्वीर का भी उल्लेख किया, जिसने करोड़ों भारतीयों का दिल छू लिया।

पूर्व राष्ट्रपति की बेटी ने लिखा कि चुनाव जीतना कभी भी किसी एक वजह से नहीं होता, यह कई कारकों से जुड़ी एक जटिल प्रक्रिया है। भाजपा का मजबूत जमीनी संगठन, अलग-अलग जातियों और समुदायों तक लगातार पहुंचने की रणनीति, अपनी गलतियों को जल्दी पहचानना और तुरंत सुधार करने की इच्छाशक्ति, ये कुछ ऐसी मुख्य बातें हैं जिन्होंने इसे चुनाव जीतने वाली एक ऐसी ताकत बना दिया है जिसे फिलहाल रोकना मुश्किल लग रहा है।

हालांकि, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि पीएम मोदी का चेहरा शायद भाजपा का सबसे मजबूत तुरुप का पत्ता है। लोग उनमें एक ऐसा मजबूत नेता देखते हैं जो अपनी काबिलियत और कड़ी मेहनत के दम पर आगे बढ़ा है, न कि कांग्रेस की तरह वंशवादी विरासत या परिवार के दबदबे वाली क्षेत्रीय पार्टियों की तरह। एक तरह से, मोदी भाजपा के पर्याय बन गए हैं।

उन्होंन लिखा, "मैं हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के बारे में पश्चिम बंगाल के अपने दोस्तों के साथ हुई कुछ बातचीत का ज़िक्र करना चाहूंगी। जहां मेरे अपने रिश्तेदार अभी भी कांग्रेस के कट्टर समर्थक हैं और राज्य में कांग्रेस के मामूली 2.9 प्रतिशत वोट शेयर में उनका योगदान था, वहीं मेरे ज़्यादातर दोस्तों और परिचितों ने भाजपा को वोट दिया। चुनाव से पहले, मैं उनसे पूछती थी कि वे किस पार्टी को वोट देंगे। ज़्यादातर जवाब यही होता था कि वे "मोदी" को वोट देंगे। मैं उन्हें याद दिलाती थी कि यह विधानसभा चुनाव है और पीएम मोदी इसमें उम्मीदवार नहीं हैं। जवाब हमेशा यही होता था, 'ओई एक-ई व्यापार' (बात तो एक ही है)।"

उन्होंने लिखा कि नरेंद्र मोदी न केवल भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा करने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री हैं, बल्कि आजादी के बाद देश के सबसे मजबूत प्रधानमंत्रियों में भी शामिल हैं। उनके अनुसार, सहयोगी दलों पर निर्भर गठबंधन सरकारों की मजबूरियों से मुक्त रहते हुए उन्होंने अपेक्षाकृत स्थिर सरकार दी है।

शर्मिष्ठा मुखर्जी ने आगे लिखा, "हो सकता है कि कोई उनकी कई नीतियों या काम करने के तरीके से सहमत न हो और लोकतंत्र में ऐसा होना बिल्कुल सामान्य बात है, लेकिन कोई भी उनके करिश्मे या एक 'आकांक्षी भारत' के लिए प्रेरणा के तौर पर भारतीय मतदाताओं के साथ उनके जुड़ाव को नकार नहीं सकता। यह बात 2019 और फिर 2024 में भी साफ तौर पर दिखी। आप मोदी को पसंद करें या नापसंद, लेकिन आप "ब्रांड मोदी" को नजरअंदाज़ नहीं कर सकते। बड़ी ताकत के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी आती है। एक आम नागरिक के तौर पर, मैं यही कामना करती हूं कि जनता से सीधे मिले इस भारी जनादेश के साथ वे पूरा न्याय करें और हमारे देश को और भी ऊंचाइयों तक ले जाएं।"

--आईएएनएस

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