नई दिल्ली, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। शरीर की अच्छी सेहत और सौन्दर्य केवल ऊपरी देखभाल या फिर बाजार में मिलने वाले महंगे प्रोडक्ट की वजह से नहीं आते हैं बल्कि इसकी जड़ें हमारे शरीर के अंदर छिपी हैं।
आयुर्वेद के अनुसार वास्तविक आभा तब आती है जब शरीर की सप्तधातु संतुलित रहती हैं। शरीर के त्रिदोष के बारे में सभी जानते हैं लेकिन त्रिदोष के साथ शरीर को संचालित करने में सप्तधातु का भी महत्वपूर्ण योगदान है।
आयुर्वेद और चरक संहिता में सप्त धातुओं की महत्ता बताई गई है। अगर बार-बार थकान महसूस होती है, मन ठीक नहीं रहता, चिड़चिड़ापन होना, चेहरे का ग्लो चला जाता है या फिर बालों का तेजी से झड़ना, यह सप्त धातुओं के असंतुलन का कारण है। चरक संहिता में कहा गया है, “धातवो हि देहधारण पोषण वृद्ध्यः," यानी धातुएं ही शरीर को धारण करती हैं, उसका पोषण करती हैं और उसे बढ़ाती हैं। अब जान लेते हैं कि सप्त धातु कौन सी हैं और किसके असंतुलन से शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है।
पहली धातु है रस धातु। यह पहली और सबसे जरूरी धातु है, जो शरीर में ऊर्जा का प्रवाह बनाए रखने में मदद करती है और यह भोजन के पाचन से बनती है। इसी के कारण शरीर के भीतर नमी बनी रहती है। दूसरे नंबर पर है रक्त धातु। रक्त धातु को जीवन का आधार माना गया है। यह शरीर के सभी अंगों को पोषित करती है और अंगों में लालिमा बनाए रखती है।
तीसरे नंबर पर है मांस धातु। मांस धातु शरीर में स्थिरता लाती है, जिसका संबंध शरीर की मांसपेशियों से है। यह अग्नि और पृथ्वी महाभूत से बनी होती है, जो शरीर को सही आकार में बनाए रखती है। चौथी धातु है मेद धातु। मेद धातु वसा का प्रतिनिधित्व करती है और शरीर के हॉर्मोन को संतुलित करने में मदद करती है। मांस धातु के निर्माण के बाद ही मेद धातु का निर्माण होता है। अगर शरीर में मेद धातु का असंतुलन होता है, शरीर में मोटापा, थकान, जोड़ों में दर्द और शारीरिक कमजोरी जैसे लक्षण दिखते हैं।
पांचवीं धातु है अस्थि धातु। अस्थि धातु शरीर की हड्डी, नाखुन और दांतों की रक्षा करती है और शरीर को स्थिरता प्रदान करती है। छठी धातु मज्जा, स्नायु तंत्र और मस्तिष्क की रक्षक होती है। यह आंखों के भी सुरक्षा प्रदान करती है और सबसे आखिर में आती है शुक्र धातु, जो प्रजनन क्षमता से जुड़ी होती है। यह चेहरे के ओज और शक्ति को बरकरार रखती है।
--आईएएनएस
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