7 सितंबर से बदल जाएंगे शेयर बाजार के कई नियम, प्री-ओपन सेशन से लेकर गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ ट्रेडिंग तक जानिए निवेशकों के लिए क्या-क्या बदलेगा

7 सितंबर से बदल जाएंगे शेयर बाजार के कई नियम, प्री-ओपन सेशन से लेकर गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ ट्रेडिंग तक जानिए निवेशकों के लिए क्या-क्या बदलेगा

नई दिल्ली, 6 सितंबर (आईएएनएस)। भारतीय शेयर बाजार में कारोबार करने वाले निवेशकों और ट्रेडर्स के लिए 7 सितंबर 2026 से कई महत्वपूर्ण बदलाव लागू होने जा रहे हैं। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) प्री-ओपन सेशन, ईटीएफ की कीमत निर्धारण प्रक्रिया और प्राइस बैंड से जुड़े नियमों में संशोधन कर रहा है। इन बदलावों का उद्देश्य बाजार में मूल्य निर्धारण को अधिक पारदर्शी बनाना, नकद और डेरिवेटिव बाजारों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना तथा कारोबार की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना है। ऐसे में प्री-ओपन सेशन में ट्रेडिंग करने वाले और ईटीएफ में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए नए नियमों को समझना बेहद जरूरी है।

गौरतलब है कि अब तक शेयर बाजार का प्री-ओपन सेशन सुबह 9:00 बजे से 9:15 बजे तक एक तय प्रक्रिया के तहत संचालित होता था, लेकिन 7 सितंबर से इसमें महत्वपूर्ण बदलाव किए जा रहे हैं। नए ढांचे के अनुसार सुबह 9:00 बजे से 9:05 बजे तक निवेशक मार्केट ऑर्डर और लिमिट ऑर्डर दोनों दर्ज कर सकेंगे, उनमें बदलाव कर सकेंगे या उन्हें रद्द भी कर सकेंगे।

इसके बाद सुबह 9:05 बजे से मार्केट ऑर्डर की एंट्री बंद हो जाएगी, जबकि लिमिट ऑर्डर लगाने, संशोधित करने या रद्द करने की सुविधा जारी रहेगी। सुबह 9:08 बजे से 9:10 बजे के बीच किसी भी समय ऑर्डर एंट्री को रैंडम तरीके से बंद किया जा सकता है। इसके बाद 9:10 बजे से 9:12 बजे तक ऑर्डर का मिलान किया जाएगा और शेयरों की शुरुआती कीमत तय होगी। इस नए ढांचे में प्री-ओपन सत्र के दौरान मार्केट ऑर्डर्स को लिमिट ऑर्डर्स पर प्राथमिकता दी जाएगी।

यह बदलाव सेबी द्वारा हाल ही में लागू किए गए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (सीएएस) के अनुरूप बाजार संरचना तैयार करने के उद्देश्य से किया गया है।

नए नियम केवल फ्यूचर्स एवं ऑप्शंस (एफएंडओ) से जुड़े शेयरों तक सीमित नहीं रहेंगे। इनका प्रभाव कैश या इक्विटी मार्केट में सूचीबद्ध विभिन्न प्रकार की प्रतिभूतियों पर भी पड़ेगा।

मुख्य बोर्ड पर सूचीबद्ध कंपनियों के अलावा एसएमई शेयरों, आंशिक रूप से भुगतान किए गए शेयरों, रीट (आरईआईटी) और इनविट (आईएनवीआईटी) से जुड़ी प्रतिभूतियों पर भी यह व्यवस्था लागू होगी। इसका मतलब है कि केवल बड़ी कंपनियों के शेयर ही नहीं, बल्कि स्मॉल और मिड कैप की सूचीबद्ध कंपनियों के निवेशकों को भी इन बदलावों का असर महसूस होगा।

एनएसई का उद्देश्य शेयरों की शुरुआती कीमत तय करने की प्रक्रिया को उस क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के अनुरूप बनाना है, जिसे हाल ही में इक्विटी कैश मार्केट में लागू किया गया था। इस प्रणाली के तहत खरीद और बिक्री के ऑर्डर एक साझा तरलता पूल में एकत्रित किए जाते हैं, जिससे अधिक पारदर्शी और सटीक मूल्य निर्धारण संभव हो पाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बाजार खुलने के समय अचानक आने वाले बड़े उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी और शुरुआती कारोबार अधिक संतुलित रह सकेगा।

7 सितंबर से एक और बड़ा बदलाव यह होगा कि गोल्ड ईटीएफ और सिल्वर ईटीएफ को भी प्री-ओपन सेशन में शामिल किया जाएगा। यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि सोने और चांदी की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भारतीय बाजार बंद रहने के दौरान भी लगातार उतार-चढ़ाव होता रहता है। ऐसे में बाजार खुलते ही कीमतों में बड़ा अंतर देखने को मिलता है।

नए नियम से निवेशकों को अंतरराष्ट्रीय कीमतों के अनुरूप बेहतर मूल्य खोज का लाभ मिलने की उम्मीद है और ईटीएफ के वास्तविक बाजार मूल्य को अधिक सटीक तरीके से प्रदर्शित किया जा सकेगा।

ईटीएफ निवेशकों के लिए एक और महत्वपूर्ण बदलाव प्राइस बैंड निर्धारण से जुड़ा है। अभी कई ईटीएफ की दैनिक मूल्य सीमा तय करने के लिए दो दिन पुराने एनएवी (टी-2 एनएवी) का उपयोग किया जाता है। लेकिन अब यह व्यवस्था बदली जाएगी।

नए नियमों के अनुसार, ईटीएफ की पिछली ट्रेडिंग तारीख के अंतिम 30 मिनट की ट्रेडिंग के वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस (वीडब्ल्यूएपी) को आधार बनाया जाएगा। यदि उस अवधि में कोई ट्रेड नहीं हुआ होगा, तो उस दिन के अंतिम कारोबार मूल्य (लास्ट ट्रेडेड प्राइस) को आधार माना जाएगा। और यदि पूरे दिन कोई ट्रेड ही नहीं हुआ हो, तो अंतिम क्लोजिंग एनएवी का उपयोग किया जाएगा।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इससे ईटीएफ की प्राइस लिमिट उसके वास्तविक बाजार मूल्य के अधिक करीब रहेगी और मूल्य निर्धारण अधिक प्रभावी होगा।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि नए नियम लागू होने के बाद निवेशकों को विशेष सतर्कता बरतनी होगी। विशेष रूप से गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ में निवेश करने वालों को केवल स्क्रीन पर दिखाई देने वाली कीमत देखकर ऑर्डर नहीं लगाना चाहिए, बल्कि आईएनएवी (इंडिकेटिव एनएवी) और बाजार की वास्तविक स्थिति पर भी नजर रखनी चाहिए।

--आईएएनएस

डीबीपी