नई दिल्ली, 3 फरवरी (आईएएनएस)। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सदन में एक ऐसी किताब को लेकर बखेड़ा खड़ा कर दिया, जो अब तक प्रकाशित भी नहीं हुई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पूर्व आर्मी चीफ मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित किताब से जुड़े संदर्भ का हवाला दिया, जिसे लेकर जोरदार हंगामा देखने को मिला। इस पर मेजर जनरल (रिटायर्ड) ध्रुव कटोच ने कहा कि संसद में किसी भी सत्यापित सोर्स से लाए गए मुद्दों पर ही चर्चा होती है। एक नेतृत्व के तौर पर पीएम मोदी ने वही फैसला लिया, जो सबसे सही था।
ध्रुव कटोच ने कहा, "पार्लियामेंट में सिर्फ उन्हीं मुद्दों पर चर्चा हो सकती है, जो किसी वेरिफाइड सोर्स से हों। इन मुद्दों पर संसद में तब तक चर्चा नहीं हो सकती, जब तक किताब असल में न आ जाए। यह एक बात है। लेकिन, मान लेते हैं कि मैगजीन ने उस आर्टिकल में जो कुछ भी कहा गया है, वह सब सही है। अब, आर्मी चीफ ने क्या कहा? आर्मी चीफ ने कहा कि उन्होंने रक्षा मंत्री से संपर्क किया, जिन्होंने पीएम से संपर्क किया और आखिर में आर्मी को वही करने के आदेश दिए गए, जो उन्हें सबसे अच्छा लगे।"
उन्होंने कहा, "एक राजनीतिक फैसले के तौर पर मुझे लगता है कि फैसले ऐसे ही दिए जाते हैं। आखिर में, यह प्रधानमंत्री या रक्षा मंत्री या आर्मी चीफ नहीं हैं, जो फॉरवर्ड एरिया में जाकर लड़ाई लड़ेंगे। यह जमीन पर मौजूद आदमी हैं। ऑपरेशनल कमांडर नॉर्दर्न आर्मी कमांडर था और उसके नीचे फील्ड कमांडर थे। आखिर में, यह बटालियन कमांडर था, जो वहां था, जो भी सही एक्शन लेगा। तो, नेता के नेतृत्व के सवाल के तौर पर मुझे लगता है कि पीएम का यह एक अच्छा फैसला था। यह पूरी तरह से साफ था। आर्मी को अपनी स्थिति बनाए रखने और जहां वह थी, वहीं रहने के लिए जो कुछ भी जरूरी था, वह करने का पूरा अधिकार दिया गया था। इसलिए अगर जरूरत फोर्स इस्तेमाल करने की थी, तो आर्मी ने फोर्स इस्तेमाल किया होता।"
उन्होंने कहा कि जब चीनी टैंक ऊपर आए तो भारतीय टैंक भी ऊपर चले गए और चीनी टैंक पीछे हट गए। अगर बात और आगे बढ़ती, अगर फायरिंग शुरू हो जाती, तो मुझे पूरा यकीन है कि सेना जो भी जरूरी होता, वह करती क्योंकि उनके पास ऐसा करने का अधिकार था और वह अधिकार प्रधानमंत्री ने दिया था।
ध्रुव कटोच ने कहा, "बॉर्डर पर दूसरी स्थितियों में मुझे नहीं लगता कि बटालियन कमांडर या कोई और अगर उसकी जगह को खतरा है, तो वह ऑर्डर नहीं मांगेगा। वह अपनी जगह बचाने के लिए, अपने आदमियों को सुरक्षित रखने के लिए और देश की क्षेत्रीय अखंडता बनाए रखने के लिए जो भी करना होगा, वह करेगा। इसलिए जमीन पर कमांडर जो कदम उठाएगा, मुझे नहीं लगता कि वह किसी से सलाह लेगा। इस खास मामले में क्योंकि तनाव बहुत ऊंचे स्तर तक बढ़ सकता था, आर्मी कमांडर ने चीफ से संपर्क किया, जिन्होंने बदले में पॉलिटिकल अथॉरिटी से निर्देश लिए।"
उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि जो निर्देश दिए गए थे, वे बहुत सही, बहुत समय पर और बहुत पक्के थे। किसी के मन में इस बारे में कोई कन्फ्यूजन या शक नहीं था कि जमीन पर असल में क्या करना है। उस हद तक, मुझे लगता है कि राजनीतिक नेतृत्व और सैन्य नेतृत्व दोनों एक साथ थे और एक ही आवाज में बोल रहे थे।
--आईएएनएस
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