नई दिल्ली, 2 जनवरी (आईएएनएस)। हिंदू धर्म में किसी भी शुभ या मांगलिक कार्य से पहले मुहूर्त देखने की परंपरा बहुत पुरानी है। आज भी लोग विवाह, मुंडन, जनेऊ, गृह प्रवेश, नया व्यवसाय या वाहन खरीदने से पहले शुभ दिन और समय का इंतजार करते हैं। अगर आप नए साल में शादी, गृह प्रवेश या कोई नया काम शुरू करने की योजना बना रहे हैं, तो यह जानकारी आपके लिए बहुत काम की है।
नए साल 2026 में कई खास अबूझ मुहूर्त पड़ रहे हैं, जिनमें आप आंख बंद करके शुभ काम कर सकते हैं। अबूझ मुहूर्त वे विशेष तिथियां होती हैं, जिन पर बिना पंचांग देखे, बिना दिनवार की चिंता किए कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है। मान्यता है कि इन दिनों किए गए काम स्वतः ही शुभ फल देते हैं।
सबसे पहले है बसंत पंचमी। यह पर्व माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन मां सरस्वती की पूजा होती है। बसंत पंचमी को विवाह, गृह प्रवेश और शिक्षा से जुड़े कार्यों के लिए बेहद शुभ माना जाता है। साल 2026 में यह पर्व 23 जनवरी को पड़ेगा।
इसके बाद आता है फुलेरा दूज। यह फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाई जाती है। इस दिन श्रीकृष्ण और राधा रानी की पूजा होती है। विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश या नया काम शुरू करने के लिए यह दिन बहुत अच्छा माना जाता है। साल 2026 में फुलेरा दूज 19 फरवरी को होगी।
अक्षय तृतीया को तो सबसे बड़ा अबूझ मुहूर्त माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। नया व्यापार शुरू करना, सोना-चांदी खरीदना या विवाह करना बेहद शुभ माना जाता है। साल 2026 में अक्षय तृतीया 19 अप्रैल को मनाई जाएगी।
इसके बाद जानकी नवमी आती है, जो माता सीता के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। मान्यता है कि इस दिन किए गए शुभ कार्य सफल होते हैं। यह पर्व 25 अप्रैल को पड़ेगा।
गंगा दशहरा भी एक अबूझ मुहूर्त है। इस दिन मां गंगा के धरती पर अवतरण का उत्सव मनाया जाता है। यह तिथि भी शुभ कार्यों के लिए उत्तम मानी जाती है। साल 2026 में गंगा दशहरा 25 मई को होगा।
वहीं साल के अंत में देवउठनी एकादशी आती है, जब भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं और मांगलिक कार्यों पर लगी रोक हट जाती है। इस दिन से शादियों और अन्य शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाती है। साल 2026 में देवउठनी एकादशी 20 नवंबर को पड़ रही है।
--आईएएनएस
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