रुद्रप्रयाग : आरसेटी प्रशिक्षण से बदली किस्मत, जखोली की महिलाओं ने खड़ा किया फुटवियर उद्योग

रुद्रप्रयाग: आरसेटी प्रशिक्षण से बदली किस्मत, जखोली की महिलाओं ने खड़ा किया फुटवियर उद्योग

रुद्रप्रयाग, 8 जनवरी (आईएएनएस)। पहाड़ों में कृषि, बागवानी और पशुपालन के साथ-साथ लघु एवं कुटीर उद्योगों के माध्यम से स्वरोजगार की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। इसका एक प्रेरक उदाहरण उत्‍तराखंड में रुद्रप्रयाग जिले के जखोली विकासखंड स्थित जवाड़ी गांव में देखने को मिल रहा है, जहां सरस्वती देवी ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया द्वारा ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) से प्रशिक्षण प्राप्त कर महिला स्वयं सहायता समूह के सहयोग से ऋण लिया और अपने गांव में फुटवियर निर्माण का लघु उद्योग स्थापित किया है।

इस पहल के तहत वह विभिन्न प्रकार के चप्पल और जूते तैयार कर रही हैं, जिनकी स्थानीय स्तर पर अच्छी मांग देखने को मिल रही है।

सरस्वती देवी का कहना है कि वह घर के कामकाज के साथ-साथ अपने पति के सहयोग से इस उद्योग को संचालित कर रही हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद शुरुआती परिणाम काफी उत्साहजनक रहे हैं और इससे परिवार की आमदनी में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है। उनके द्वारा तैयार किए गए जूते-चप्पलों को गांव की महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से स्थानीय मेलों में स्टॉल लगाकर बेचा जा रहा है, जिससे न केवल सरस्वती देवी बल्कि समूह से जुड़ी अन्य महिलाओं को भी आर्थिक लाभ मिल रहा है।

महिला स्वयं सहायता समूह की महिलाएं रुद्रप्रयाग सहकारिता मेला, जखोली महोत्सव, सिलगढ़ महोत्सव और अब रुद्रनाथ महोत्सव जैसे विभिन्न आयोजनों में अपने उत्पादों के स्टॉल लगाकर बिक्री कर रही हैं।

गौरा देवी समूह से जुड़ी महिला संगीता कप्रवाण ने बताया कि मौसम और मांग को ध्यान में रखते हुए वे अलग-अलग तरह के उत्पाद तैयार करते हैं। जखाड़ी गांव में चप्पल निर्माण की छोटी फैक्ट्री स्थापित की गई है और ब्लॉक तथा जिला स्तर पर लगने वाले मेलों में स्टॉल लगाकर उत्पादों की बिक्री की जाती है।

उन्होंने कहा कि लोगों को ये चप्पल काफी पसंद हैं और रुद्रप्रयाग में आयोजित सहकारिता मेले के पहले ही दिन उनके सभी चप्पल बिक गए।

समूह से जुड़ी एक अन्य महिला ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उन्होंने आरसेटी से चप्पल निर्माण का प्रशिक्षण लिया, जिसके बाद मशीनें और कच्चा माल लेकर अपने घर में ही छोटी फैक्ट्री स्थापित की। लघु उद्योग केंद्र के रूप में संचालित इस कार्य में वे प्रतिदिन तीन से चार घंटे काम करती हैं और स्थानीय मेलों के माध्यम से उन्हें बाजार भी मिल जाता है।

उन्होंने बताया कि पहली बार रुद्रप्रयाग सहकारिता मेले में उन्हें बेहतर मार्केटिंग का अवसर मिला, जिसके बाद से स्थानीय मेलों में लगातार अच्छी बिक्री हो रही है।

स्थानीय महिलाओं द्वारा शुरू किए गए ऐसे छोटे-छोटे लघु एवं कुटीर उद्योग यह दर्शाते हैं कि यदि पहाड़ों में इस तरह की पहलों को प्रोत्साहन मिले, तो न केवल रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे बल्कि पहाड़ से होने वाले पलायन पर भी प्रभावी रूप से रोक लगाई जा सकती है।

--आईएएनएस

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