विशाखापट्टनम, 21 अगस्त (आईएएनएस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सह सरकार्यवाह सीआर मुकुंद ने विशाखापट्टनम में आयोजित तीन दिवसीय बैठक को लेकर प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि यह संघ का सालाना कार्यक्रम है। यहां आरएसएस से प्रेरणा लेकर समाज के अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले सभी भाई-बहन एक साथ आते हैं और देश व समाज के बारे में सोचते-विचारते हैं। यह बैठक हर साल तीन दिन के लिए होती है।
सीआर मुकुंद ने बताया कि बैठक में असम में आई बाढ़ पर विस्तार से चर्चा हुई। इस बार असम में बाढ़ आई है। हर साल असम में किसी न किसी तरह की बाढ़ आती रहती है, लेकिन इस बार जो हुआ वह बहुत भयानक था। हर बार की तरह इस बार भी स्वयंसेवकों ने तुरंत मदद के लिए कदम बढ़ाया। राष्ट्रीय सेवा भारती, किसान संघ, एनएमओ (नेशनल मेडिकोज ऑर्गेनाइजेशन), आरोग्य भारती और भाजपा के कार्यकर्ताओं ने राहत और पुनर्वास में हिस्सा लिया। उन्होंने साफ किया कि वह सरकार की नहीं, बल्कि पार्टी के कार्यकर्ताओं की बात कर रहे हैं।
दुनियाभर में हो रहा जनसांख्यिकी बदलाव पर सीआर मुकुंद ने कहा कि यह एक बहुत बड़ी चुनौती है। कई देश बढ़ती उम्र की आबादी की समस्या से जूझ रहे हैं। भारत के पास अभी दुनिया में सबसे ज्यादा युवा आबादी है और जनसंख्या भी सबसे ज्यादा है। लेकिन जनसांख्यिकी वैज्ञानिकों के अनुमान के मुताबिक, अगले तीन से चार दशकों में भारत में भी ऐसी ही स्थिति आ सकती है।
सीआर मुकुंद ने कहा कि नशा अब सिर्फ बड़े शहरों तक ही सीमित नहीं रहा बल्कि टियर-2 और टियर-3 शहरों के साथ-साथ गांवों तक पहुंच गया है। यह बच्चों को आसानी से मिल रहा है। ऐसी स्थिति बन गई है कि स्कूल जाने वाले छात्रों को भी नशा आसानी से मिल जाता है।
जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन को लेकर सीआर मुकुंद ने कहा कि सिस्टम में कई खामियां हैं और संघ व उसके सभी सहयोगी संगठन चाहते हैं कि सिस्टम ठीक से काम करे। इसके लिए सरकार को कुछ कदम उठाने होंगे और समाज को भी जागरूक होना होगा। सिस्टम को सही करना जरूरी है। यह चिंता इसलिए भी है क्योंकि युवा सिस्टम की विफलताओं को लेकर चिंतित हैं, चाहे वह नीट हो या कोई और मुद्दा। युवाओं को अपने भविष्य की चिंता है, हमें उनकी चिंताओं को दूर करना चाहिए। यह सिर्फ नीट या किसी एक सरकार की बात नहीं है, देश भर में कई सिस्टम में खामियां हैं।
सीआर मुकुंद ने बताया कि बैठक में विकास के भारतीय मॉडल पर भी चर्चा हुई। विकास कैसा होना चाहिए, इस पर बात हुई। उन्होंने कहा कि विकास आत्मनिर्भर, पर्यावरण के अनुकूल और समावेशी होना चाहिए। आर्थिक सत्रों के दौरान इन पहलुओं पर भी चर्चा और विचार-विमर्श हुआ।
उन्होंने कहा कि हर बार जब बैठक होती है तो 40 से ज्यादा संगठन इस बात पर चर्चा करते हैं कि आने वाले सालों में अपने काम को कैसे बढ़ाया जाए। संगठन का विस्तार कैसे किया जाए और अपनी राष्ट्रवादी सोच और समाज के लिए विचार को समाज के हर वर्ग तक कैसे पहुंचाया जाए, इस पर चर्चा हुई। इसे 'कार्य विस्तार' कहा जाता है, जिसमें सिर्फ विचार ही नहीं बल्कि संगठनात्मक पहलू भी शामिल है।
युवाओं को लेकर सीआर मुकुंद ने कहा कि हर साल 21,000 युवा स्वयंसेवक 21 दिन के प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा लेते हैं। इस साल भी 21,000 युवाओं ने शिविर में हिस्सा लिया। उन्होंने बताया कि रोज की शाखाओं में 60 प्रतिशत से ज्यादा युवा आते हैं। संघ युवाओं के बीच काम करता है, इसलिए वह समझता है कि युवा क्या और कैसे सोचते हैं।
संघ के 100वें साल के मौके पर ग्लोबल आउटरीच पर भी फोकस किया जा रहा है। कुछ वरिष्ठ सदस्यों ने महसूस किया कि अलग-अलग देशों में मुख्यधारा के समाज तक पहुंचने की जरूरत है। इसके दो-तीन कारण हैं। एक है भारत, हिंदुओं और आरएसएस के बारे में सकारात्मक कहानी बनाना। हिंदू, भारत और आरएसएस के बारे में बहुत सारी गलत जानकारी और भ्रांतियां हैं। इसका मुकाबला करने के लिए सकारात्मकता जरूरी है।
सीआर मुकुंद ने कहा कि लगभग तीन साल पहले जब आरएसएस के शताब्दी कार्यक्रमों की योजना बनी थी, तब 'पंच परिवर्तन' के बारे में सोचा गया था। उन्होंने महसूस किया कि देश में किसी भी व्यवस्थागत बदलाव के लिए सामाजिक परिवर्तन जरूरी है। सामाजिक परिवर्तन पर चर्चा के दौरान पांच प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की गई। उनमें से एक मुख्य क्षेत्र पर्यावरण संरक्षण है। यह सिर्फ संरक्षण के बारे में नहीं है, बल्कि यह भी है कि हम पर्यावरण को कैसे देखते हैं। हमारे पूर्वजों और ऋषि-मुनियों का मानना था कि पूरी सृष्टि आपस में जुड़ी हुई है और हम उसका अभिन्न हिस्सा हैं। रोजमर्रा के व्यवहार में हर व्यक्ति और हर परिवार कम से कम तीन क्षेत्रों में योगदान दे सकता है।
--आईएएनएस
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