राष्ट्र और धर्म अलग नहीं, जब राष्ट्र कमजोर होता है तो धर्म पर खतरा आता है : मोहन भागवत

राष्ट्र और धर्म अलग नहीं, जब राष्ट्र कमजोर होता है तो धर्म पर खतरा आता है : मोहन भागवत

मुंबई, 2 अक्टूबर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने मुंबई में ऑल इंडिया विहार सेवा ग्रुप के 14वें वार्षिक सम्मेलन में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने समर्पण, राष्ट्र और धर्म को लेकर अपनी बात रखी।

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, "इन दो चीजों (राष्ट्र और धर्म) को व्यवहार में अपनाने की कोशिश करो। अगर आप इन्हें अपने कर्मों से दिखा सकते हो, तो वही काफी है। यह उपदेश देने की बात नहीं है लेकिन एक बार आप देखेंगे कि संघ में भी लाखों लोग बिना कुछ मांगे अपना समय और पैसा देश की सेवा में लगाते हैं।"

उन्होंने समर्पण के महत्व को समझाते हुए कहा, "अगर समर्पण किसी नेक और दिव्य लक्ष्य के लिए हो, किसी सुंदर कारण के लिए हो, या किसी पवित्र उद्देश्य के लिए हो, तो वह व्यक्ति के जीवन को स्वर्ग बना सकता है। आप भाग्यशाली हैं कि आपको ऐसे ही एक उद्देश्य के लिए खुद को समर्पित करने के लिए बुलाया गया है। नहीं तो जीवन में ऐसा सार्थक काम खोजने के लिए कई जन्मों तक तपस्या करनी पड़ती है। शायद आपने अपने पिछले जन्मों में से किसी एक में ऐसा किया भी होगा।"

मोहन भागवत ने राष्ट्र और धर्म के संबंध पर बोलते हुए कहा, "हमारी परंपरा में राष्ट्र और धर्म अलग नहीं हैं। राष्ट्र का उद्देश्य धर्म है, और धर्म राष्ट्र की सेवा के लिए है। दोनों आपस में जुड़े हुए हैं। अगर एक है तो दूसरा भी है, अगर एक नहीं है तो दूसरा भी नहीं हो सकता। जब राष्ट्र कमजोर होता है, तो धर्म पर खतरा आता है। जब धर्म का अभ्यास कमजोर होता है, तो राष्ट्र का पतन होता है। इसलिए दोनों को सही तरीके से एक साथ आगे ले जाना हमारी जिम्मेदारी है। जब पढ़ाई के प्रति समर्पित युवा छात्र इस ज्ञान परंपरा की रक्षा के लिए समय निकालते हैं, तो यह राष्ट्रीय कार्य भी है और धर्म का कार्य भी है।"

उन्होंने कहा, "हर खुशी अधूरी रहती है। हर आकांक्षा के साथ कोई न कोई नुकसान जुड़ा होता है। हर निष्ठा किसी न किसी दूसरी निष्ठा से टकराती है। अतिवाद है, संतुलन नहीं है, कोई मध्यम मार्ग नहीं है और इसीलिए दुनिया परेशान है। और दुनिया जानती है कि आगे का रास्ता भारत से ही आएगा। एक समय में लगभग 3,000 साल तक भारत ने बिना किसी देश को जीते, बिना किसी का धर्म परिवर्तन कराए, और बिना किसी मुद्दे पर किसी पर हमला किए, दुनिया को सुख और शांति का रास्ता दिखाया था। इसीलिए दुनिया को हमसे उम्मीदें हैं।" इस सम्मेलन में संघ के कार्यकर्ताओं और छात्रों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया।

--आईएएनएस

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