राहुल गांधी और नेहा बोरा लोकतांत्रिक विरोध नहीं, अराजकता की राजनीति कर रहे : प्रदीप भंडारी

राहुल गांधी और नेहा बोरा लोकतांत्रिक विरोध नहीं, अराजकता की राजनीति कर रहे : प्रदीप भंडारी

नई दिल्ली, 15 अक्टूबर (आईएएनएस)। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और नेहा बोरा पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि ये दोनों लोग देश विरोधी काम कर रहे हैं। आपने राहुल गांधी को 'राजनीतिक प्रतिरोध' शब्द का इस्तेमाल करते हुए सुना होगा। राहुल गांधी का मकसद लोकतांत्रिक विरोध नहीं बल्कि अराजकता की आड़ में भारतीय लोकतंत्र को नष्ट करना है।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "आज मैं हर व्यक्ति और हर युवा से कहना चाहता हूं कि हम ऐसे लोग हैं जो भारत और यहां के लोकतंत्र में विश्वास रखते हैं। नेहा बोरा के शब्द राहुल गांधी की सोच को दर्शाते हैं। वे भारत में अराजकता को जायज ठहराना चाहते हैं और इसका इस्तेमाल अपने परिवार को सत्ता में लाने के लिए करना चाहते हैं।"

उन्होंने कहा कि मैं राहुल गांधी से कहना चाहता हूं कि अगर आप और आपका इकोसिस्टम अराजकता फैलाने के बजाय इस देश की जनता की सेवा करने में उतनी ही मेहनत करते, तो शायद कांग्रेस का वोट शेयर तीन-चार जगहों पर बढ़ गया होता। राहुल गांधी ने पहले कहा था कि उनकी लड़ाई भाजपा या आरएसएस की विचारधारा के खिलाफ नहीं बल्कि 'भारतीय राज्य' (इंडियन स्टेट) के खिलाफ है और 'भारतीय राज्य' का मतलब है भारतीय संविधान यानी भारतीय लोकतंत्र है।

प्रदीप भंडारी ने कहा कि यह कोई राजनीतिक विरोध नहीं है बल्कि यह एक अराजक मार्च और अराजक विद्रोह है। भारतीय लोकतंत्र में अराजकता का समर्थन करने या उसे बढ़ावा देने की कोई जगह नहीं है। यह कोई इकलौती घटना नहीं है। प्रशांत भूषण, जिन्होंने राहुल गांधी के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी, उन्होंने कहा कि वे क्रांति चाहते हैं और खून-खराबे की बात की। ठीक 24 घंटे बाद, राहुल गांधी ने उसी प्रशांत भूषण के साथ फिर से एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इससे एक पैटर्न दिखता है कि राहुल गांधी का मकसद लोकतांत्रिक विरोध नहीं बल्कि अराजकता को अपनाना और उसे जायज ठहराना है। यह लोकतांत्रिक विरोध नहीं है; यह भारतीय राज्य और भारतीय लोकतंत्र के खिलाफ एक लड़ाई है।

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में आपने राहुल गांधी को 'राजनीतिक विरोध' (पॉलिटिकल रेजिस्टेंस) शब्द का इस्तेमाल करते हुए सुना होगा। आज मैं जो तथ्य पेश कर रहा हूं, उनसे साबित हो जाएगा कि राहुल गांधी का मकसद लोकतांत्रिक विपक्ष की भूमिका निभाना नहीं बल्कि अराजकता की आड़ में भारतीय लोकतंत्र को खत्म करना है। आपने नेहा बोरा और राहुल गांधी का यह वीडियो जरूर देखा होगा। जब राहुल गांधी अपना मार्च निकाल रहे थे, तो उन्होंने नेहा बोरा को उस मार्च का चेहरा बनाया। इसका मतलब है कि नेहा बोरा और राहुल गांधी की विचारधारा एक ही है। एक इंटरव्यू में, नेहा बोरा ने कहा कि वह बांग्लादेश के आंदोलन से प्रेरित हैं और चाहती हैं कि भारत में भी वही सब हो जो बांग्लादेश में हुआ था।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि लोकतांत्रिक तरीकों से अपने परिवार को सत्ता में लाने में नाकाम रहने के बाद राहुल गांधी और उनका पूरा इकोसिस्टम अब भारत में लोकतंत्र को नष्ट करने की साजिश रच रहे हैं।

--आईएएनएस

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