रबी फसलों के एमएसपी में बढ़ोतरी का किसानों ने किया स्वागत, बेहतर आय की उम्मीद

रबी फसलों के एमएसपी में बढ़ोतरी का किसानों ने किया स्वागत, बेहतर आय की उम्मीद

नई दिल्ली, 1 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने रबी की छह प्रमुख फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। इस फैसले का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य उपलब्ध कराना और उत्पादन लागत के मुकाबले बेहतर आय सुनिश्चित करना है।

एमएसपी में सबसे अधिक बढ़ोतरी कुसुम यानी सूरजमुखी के लिए 675 रुपए प्रति क्विंटल की गई है। इसके बाद रेपसीड और सरसों में 413 रुपए, मसूर में 390 रुपए, जौ में 136 रुपए, चने में 83 रुपए और गेहूं में 25 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है।

नई दरों के मुताबिक गेहूं का एमएसपी 2,610 रुपए, चना का 5,958 रुपए, मसूर 7,390 रुपए और सरसों 6,613 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।

सरकार के इस फैसले को लेकर अलग-अलग राज्यों के किसानों ने अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। अधिकांश किसानों ने एमएसपी बढ़ाए जाने का स्वागत किया। कुछ किसानों ने कहा कि खेती की बढ़ती लागत को देखते हुए बढ़ोतरी और अधिक होनी चाहिए थी।

बस्ती के किसानों का कहना है कि एमएसपी में बढ़ोतरी से उन्हें निश्चित तौर पर आर्थिक लाभ मिलेगा। भले ही बढ़ोतरी उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं है, लेकिन गेहूं, सरसों, चना और अन्य रबी फसलों के समर्थन मूल्य में वृद्धि से उन्हें उपज का बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद है।

एक किसान ने कहा कि यदि सरकार इसी तरह समय-समय पर एमएसपी की समीक्षा करती रही और दलहनी फसलों के समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी करती रही तो इन फसलों की खेती को प्रोत्साहन मिलेगा। इससे किसान फसल विविधीकरण की ओर भी बढ़ सकते हैं और उनकी आय में सुधार हो सकता है।

किसानों ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि को भी छोटे किसानों के लिए मददगार बताया। उनका कहना है कि सीमित जोत वाले किसानों के लिए यह योजना खेती की शुरुआती जरूरतों को पूरा करने में सहायक है।

वहीं, किसानों ने किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) को भी कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण योजना बताया और कहा कि इसके लक्ष्य में बढ़ोतरी से किसानों को कृषि कार्यों के लिए ऋण उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

किसानों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा के कारण कई बार ऐसी फसलें भी बर्बाद हो जाती हैं, जिनका उन्हें अपेक्षित बीमा लाभ नहीं मिल पाता। सरकार को ऐसी परिस्थितियों को भी प्रभावी ढंग से बीमा दायरे में शामिल करना चाहिए।

कृषि उपनिदेशक अशोक कुमार ने कहा कि रबी फसलों के एमएसपी में बढ़ोतरी से किसानों को लाभ मिलेगा और इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी। उनके मुताबिक, समर्थन मूल्य बढ़ने से किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ती है।

कानपुर देहात के किसानों ने कहा कि खाद, डीजल, सिंचाई और मजदूरी समेत खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में एमएसपी में बढ़ोतरी जरूरी थी। सरसों और मसूर जैसी फसलों के दाम बढ़ने से उनकी आय पर सीधा सकारात्मक असर पड़ सकता है।

एक किसान ने कहा कि एमएसपी बढ़ने से निश्चित रूप से कुछ लाभ होगा। यदि किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलता है तो इससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और खेती को अधिक सुरक्षित आजीविका के रूप में आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

किसानों ने कहा कि सरकार की ओर से समर्थन मूल्य तय किए जाने से मंडियों में भी किसानों की सौदेबाजी की स्थिति बेहतर होती है। चना और सरसों जैसी फसलों के लिए निर्धारित एमएसपी से उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य मिलने की उम्मीद है।

कुछ किसानों ने एमएसपी में लगातार बढ़ोतरी और किसान-केंद्रित योजनाओं को कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना है कि बढ़ा हुआ समर्थन मूल्य किसानों को फसल विविधीकरण के लिए भी प्रोत्साहित कर सकता है।

राजस्थान के चूरू जिले के किसानों ने कहा कि सरकार की ओर से किसानों के हित में कई कदम उठाए गए हैं। रबी और अन्य मौसमों में उगाई जाने वाली दाल और तिलहन फसलों के लिए एमएसपी की व्यवस्था होने से उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद है।

वहीं, जोधपुर के किसानों ने कहा कि गेहूं, चना और सरसों जैसी फसलों को पहले कई बार स्थानीय बिचौलियों के माध्यम से बेचना पड़ता था। इससे उन्हें अपनी उपज का अपेक्षित मूल्य नहीं मिल पाता था। अब एमएसपी में बढ़ोतरी के बाद उन्हें बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है।

किसानों का कहना है कि एमएसपी में वृद्धि से केवल उपज का मूल्य ही नहीं बढ़ेगा, बल्कि खेती से जुड़े जोखिमों से निपटने में भी मदद मिलेगी। उनका मानना है कि यदि समर्थन मूल्य में इसी तरह समय-समय पर बढ़ोतरी होती रही और कृषि लागत को ध्यान में रखा गया तो किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो सकता है।

किसानों ने यह भी कहा कि एमएसपी के साथ-साथ खाद, बीज, डीजल, बिजली, सिंचाई और कृषि मशीनरी की लागत कम करने की दिशा में भी कदम उठाए जाने चाहिए। खेती को लाभकारी बनाने के लिए समर्थन मूल्य के साथ उत्पादन लागत और बाजार से जुड़ी समस्याओं का समाधान भी जरूरी है।

--आईएएनएस

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