पेट की गर्मी बढ़ रही है? जानें पित्त संतुलन के आयुर्वेदिक उपाय

पेट की गर्मी बढ़ रही है? जानें पित्त संतुलन के आयुर्वेदिक उपाय

नई दिल्ली, 30 नवंबर (आईएएनएस)। आजकल पेट की गर्मी (पित्त वृद्धि) बहुत आम हो गई है। गलत खानपान, देर तक भूखे रहना, ज्यादा मसालेदार या तला-भुना खाना, चाय-कॉफी का अधिक सेवन और लगातार तनाव इसे बढ़ाते हैं।

पेट में गर्मी बढ़ते ही शरीर में भूख ज्यादा लगना, मुंह सूखना, जलन, सीने में जलन, मुंह का कड़वा या खट्टा लगना, पसीना ज्यादा आना, गुस्सा तेज होना, त्वचा पर लालपन या रैशेज और बालों का रूखापन या झड़ना जैसे कई संकेत दिखने लगते हैं।

आयुर्वेद के अनुसार, पित्त जितना बढ़ेगा, शरीर में गर्मी उतनी महसूस होगी और पाचन असंतुलित हो जाएगा। लंबे समय तक पित्त असंतुलित रहने से अम्लता, अल्सर और अन्य पेट की परेशानियां भी हो सकती हैं।

आयुर्वेद में पित्त को अग्नि का रूप माना गया है। जब यह बढ़ता है तो शरीर में गर्मी और सूजन बढ़ती है, पाचन तेज होता है, लेकिन असंतुलित हो जाता है और इससे त्वचा, पेट और मन तीनों प्रभावित होते हैं।

इसे संतुलित करने के लिए शीतल, मधुर और स्निग्ध भोजन लेना जरूरी है। एलोवेरा, नारियल, सौंफ और धनिया पित्त शांत करने वाले माने जाते हैं।

सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीना, एलोवेरा रस लेना, नारियल पानी पीना, सौंफ या धनिया का पानी लेना, भुना जीरा छाछ में मिलाकर पीना और आंवला का सेवन करना पेट की गर्मी कम करने में मदद करता है। खाने में खीरा, तरबूज, लौकी जैसी शीतल सब्जियां शामिल करें और हल्दी कम उपयोग करें। रात का भोजन हल्का और कम मसाले वाला रखें, और दही रात में न लें।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से पेट की गर्मी अक्सर एसिडिटी और गैस्ट्राइटिस से जुड़ी होती है। ज्यादा मसालेदार खाना, कम हाइड्रेशन, देर रात का खाना और तनाव पेट की गर्मी बढ़ाते हैं। हाई कैफीन और प्रोसेस्ड फूड्स भी पेट में एसिड और सूजन को बढ़ाते हैं। इसलिए दिनभर पर्याप्त पानी पीना, हल्का खाना करना, तनाव कम करने के लिए गहरी सांस लेना या हल्की एक्सरसाइज करना और पूरी नींद लेना जरूरी है।

--आईएएनएस

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