नई दिल्ली, 15 मई (आईएएनएस)। एमबीबीएस जैसे महत्वपूर्ण कोर्स के लिए नीट परीक्षा आयोजित करवाने वाली संस्था नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) भी जांच के घेरे में है। सीबीआई एनटीए के अधिकारियों की भी जांच करेगी।
3 मई को आयोजित नीट परीक्षा पेपर लीक होने के कारण रद्द कर दी गई है। अब पेपर लीक को लेकर सीबीआई एनटीए की भूमिका की भी जांच करेगी। 21 जून को यह परीक्षा दोबारा आयोजित की जाएगी। केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि 2024 के बाद एनटीए में सुधार किए गए थे, लेकिन इसके बावजूद 2026 में फिर गड़बड़ी हुई। इसलिए अब एनटीए में और व्यापक सुधार किए जाएंगे।
शुक्रवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) इस मामले की तह तक जाएगी। किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह एनटीए के अंदर हो या बाहर। उन्होंने बताया कि परीक्षा में पारदर्शिता व सुचिता के लिए राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों को लागू किया गया था। लेकिन इसके बावजूद पेपर लीक की यह घटना हुई, इसलिए जांच और भी गंभीरता से की जा रही है।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पेपर लीक और परीक्षा माफिया केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि ‘सामाजिक व्याधि’ बन चुके हैं। सरकार इस समस्या को स्वीकार करती है और इसे खत्म करने की जिम्मेदारी भी लेती है। उन्होंने समाज, मीडिया, राज्य सरकारों और सभी राजनीतिक दलों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि देश को निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वच्छ परीक्षा व्यवस्था की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पैसों के बल पर मेधावी छात्रों की सीट नहीं छीनी जा सकती। केंद्रीय मंत्री ने एक बड़ा बदलाव घोषित करते हुए कहा कि अगले वर्ष से नीट परीक्षा पारंपरिक ओएमआर प्रणाली के बजाय कंप्यूटर आधारित परीक्षा मोड में आयोजित की जाएगी।
विपक्ष के आरोपों पर उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि यह राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक समस्या है और इससे निपटना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। सीबीआई द्वारा एनटीए से जुड़े लोगों की संभावित जांच व पेपर लीक मामले में संलिप्तता के सवाल पर धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि जांच एजेंसी सही दिशा में काम कर रही है और इस बार किसी भी दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सरकार चाहती है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी पूरी तरह भरोसेमंद बने और परीक्षाओं में जीरो एरर सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि यह सरकार की जिम्मेदारी है और भारत की परीक्षा व्यवस्था को उसी दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि परीक्षा रद्द होने वाले दिन ही एनटीए ने फैसला लिया था कि पहले आयोजित नीट यूजी परीक्षा की फीस छात्रों को वापस की जाएगी। साथ ही 21 जून 2026 को होने वाली पुनर्परीक्षा के लिए कोई फीस नहीं ली जाएगी, ताकि छात्रों और अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि एनटीए जल्द इस संबंध में एक विस्तृत प्रेस नोट जारी करेगा, लेकिन प्रारंभिक निर्णयों के तहत छात्रों को एक सप्ताह का समय दिया जाएगा, जिसमें वे अपनी पसंद का परीक्षा शहर चुन सकेंगे। सरकार का मानना है कि कई छात्र पहली परीक्षा के बाद अपने मूल शहर लौट चुके होंगे, इसलिए उन्हें सुविधा देना जरूरी है।
उन्होंने यह भी बताया कि पिछली परीक्षा में कुछ छात्रों ने शिकायत की थी कि प्रारंभिक और अंतिम औपचारिकताओं, जैसे हस्ताक्षर आदि में समय चला गया था। इसे ध्यान में रखते हुए इस बार परीक्षा अवधि 15 मिनट बढ़ाई गई है। अब परीक्षा दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजकर 15 मिनट तक चलेगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सभी छात्रों के एडमिट कार्ड 14 जून 2026 तक जारी कर दिए जाएंगे। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पिछली परीक्षा में कई राज्य सरकारों ने छात्रों के लिए परिवहन व्यवस्था की थी और इस बार भी राज्यों से सहयोग की अपेक्षा की जाएगी।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि केंद्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करेगी कि 21 जून 2026 को होने वाली नीट यूजी पुनर्परीक्षा के दौरान छात्रों को आवागमन में कम से कम परेशानी हो। उन्होंने कहा कि वे स्वयं विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात करेंगे ताकि विद्यार्थियों के लिए परिवहन और अन्य सुविधाएं सुनिश्चित की जा सकें।
गौरतलब है कि इसी दिन अंतरराष्ट्रीय योग दिवस भी मनाया जाता है। शिक्षा मंत्री का कहना है कि यह बात ध्यान में रखी गई है और छात्रों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होगी। उन्होंने कहा कि जून महीने में कई राज्यों में बारिश और मौसम संबंधी चुनौतियां हो सकती हैं। इसे देखते हुए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) पहले से वैकल्पिक व्यवस्थाओं की योजना बना रहा है, ताकि खराब मौसम के बावजूद परीक्षा सुचारू रूप से आयोजित हो सके।
--आईएएनएस
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