देहरादून, 27 अगस्त (आईएएनएस)। नेपाल में आई त्रासदी पर उत्तराखंड में रहने वाले गोरखा समुदाय ने गहरा दुख जताया है। गोरखाली सुधार सभा के अध्यक्ष पदम सिंह थापा ने कहा कि भारत-नेपाल के बीच सदियों पुराना बेटी-रोटी का रिश्ता है, इसलिए यह दुख साझा है। संस्था की उत्तराखंड में 46 ब्रांच हैं और सभी राहत के लिए तैयार हैं। 2016 की त्रासदी में भी सभा ने 10 ट्रक राहत सामग्री भेजी थी, इस बार भी मदद के लिए सभी ब्रांच को अलर्ट पर रखा गया है।
सभा के अध्यक्ष पदम सिंह थापा ने कहा, "हम चाहते हैं कि उत्तराखंड में सभी गोरखा कम्युनिटी आगे आएं। गोरखाली सुधार सभा 1938 में बनी एक संस्था है। जब 2016 में नेपाल में त्रासदी हुई, तो संस्था ने भी मदद की। दस ट्रक भेजे गए, और लोगों ने राहत के काम में उत्साह के साथ हिस्सा लिया। सारा राहत का सामान यहीं इकट्ठा किया गया और ट्रकों से भेजा गया।"
उन्होंने कहा, "भारत में रहने वाले सभी गोरखा इस दुखद घटना से बहुत दुखी हैं। यह दुख की घड़ी है। नेपाल ने पिछले कुछ सालों में समय-समय पर ऐसी दुखद घटनाएं देखी हैं। कुछ साल पहले, वहां भूकंप आया था। हम इस आपदा पर अपना दुख जाहिर करते हैं। भारत और नेपाल के बीच रिश्ता बहुत पुराना है, और हमने आज तक इस रिश्ते को बनाए रखा है।"
पदम सिंह थापा ने कहा, "मैं कहना चाहूंगा कि जैसे ही इस आपदा की खबर आई, सभी को, यहां तक कि उन लोगों को भी जिनका नेपाल से कोई सीधा संबंध नहीं है, बहुत दुख हुआ कि ऐसी त्रासदी एक ऐसे पड़ोसी देश में आई है, जिसके साथ हमारे इतने नजदीकी संबंध हैं। नेपाल और उत्तराखंड के बीच गहरे 'बेटी-रोटी' के संबंध को देखते हुए, जाहिर है, जिन परिवारों की बेटियों की शादी वहां हुई है या जिनकी बेटियां नेपाल से यहां बहू बनकर आई हैं, वे बहुत परेशान और चिंतित हैं।"
उन्होंने आगे कहा कि गोरखाली सुधार सभा की उत्तराखंड में 46 ब्रांच हैं और हम हर ब्रांच के अध्यक्ष के लगातार संपर्क में हैं। मुझे ऋषिकेश ब्रांच की अध्यक्ष माया का फोन आया। उन्होंने मुझे बताया कि ज्यादातर प्रभावित लोग नेपाल-तिब्बत बॉर्डर के पास रसुवा इलाके में हैं। भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों के आस-पास के गांव बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। भारत एक बहुत बड़ा देश है, और खासकर उत्तराखंड में, गोरखा कम्युनिटी के बहुत सारे लोग रहते हैं। कई गोरखा परिवार तीर्थ यात्रा के लिए नेपाल भी जाते हैं और हो सकता है कि उनके वहां रिश्तेदार भी हों।
पदम थापा ने कहा, "हमारे अंदाजे के मुताबिक, उत्तराखंड में सभी गोरखा कम्युनिटी की संख्या करीब 14.5 लाख है, जबकि देहरादून में करीब 4.5 लाख गोरखा रहते हैं। गोरखाली सुधार सभा सबसे बड़े संगठन में से एक है। हम इन मुश्किल हालात में नेपाल की मदद करना चाहते हैं। जब 2016 में नेपाल में एक दुखद घटना हुई, तो गोरखाली सुधार सभा ने मदद का इंतजाम किया, जिसमें कम्युनिटी के हर तबके के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। यहां से राहत सामग्री के दस ट्रक भेजे गए।"
--आईएएनएस
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