मुंबई, 8 मई (आईएएनएस)। 1 अप्रैल 2026 से नया आयकर अधिनियम 2025 लागू हो गया है, जो 64 साल पुराने आयकर अधिनियम 1961 की जगह लेता है। इसी को लेकर सरकार लोगों को जागरूक करने के लिए जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित कर रही है। इसी कड़ी में देश की आर्थिक राजधानी में आयोजित एक कार्यक्रम में आयकर विभाग (आईआरएस) की मुख्य आयकर आयुक्त (आईटी एवं टीपी) निरुपमा कोतरू ने आयकर अधिनियम 2025 और आयकर नियम 2026 को लेकर लोगों को जागरूक किया।
कार्यक्रम के बाद न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए निरुपमा कोतरू ने कहा कि केंद्र सरकार कर प्रणाली (टैक्स सिस्टम) को आम लोगों के लिए और सरल बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। इसी कड़ी में नया आयकर अधिनियम 2025 और आयकर नियम 2026 लाए गए हैं, जिनका उद्देश्य टैक्स फाइलिंग की प्रक्रिया को आसान और समझने योग्य बनाना है। उन्होंने कहा कि भारत की टैक्स प्रणाली पहले से ही करदाताओं के लिए बेहद अनुकूल है और अब नए बदलावों से लोगों को टैक्स समझने और भरने में और आसानी होगी।
समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कोतरू ने कहा, "सरकार की कर नीति में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है और भारत की टैक्स व्यवस्था आज भी करदाताओं के लिए काफी अनुकूल बनी हुई है। उन्होंने कहा कि भारत की कर दरें दुनिया में सबसे कम दरों में शामिल हैं और यह वित्त मंत्री द्वारा हर साल पेश किए जाने वाले प्रगतिशील बजटों की वजह से संभव हो पाया है।"
उन्होंने कहा कि टैक्स सिस्टम पहले से काफी सरल है, लेकिन कई बार आम लोगों को यह प्रक्रिया जटिल लगती है। लोगों को लगता है कि टैक्स भरने के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट की जरूरत पड़ेगी और यह समझना मुश्किल है कि किस आय पर कितना टैक्स लगेगा। यही कारण है कि कई ईमानदार करदाता भी भ्रम की स्थिति में आ जाते हैं।
कोतरू ने आगे कहा कि सरकार का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा लोगों को टैक्स सिस्टम से जोड़ना है, लेकिन जटिल शब्दावली और प्रक्रियाओं के कारण कई लोग पीछे रह जाते हैं। इसी समस्या को दूर करने के लिए नया आयकर अधिनियम 2025 और आयकर नियम 2026 लाए गए हैं, ताकि कोई भी व्यक्ति आसानी से अपनी टैक्स संबंधी जानकारी समझ सके और खुद रिटर्न भर सके।
उन्होंने बताया कि नए कानून में कई तकनीकी शब्दों को आसान बनाया गया है। उदाहरण के तौर पर पहले 'प्रीवियस ईयर' और 'असेसमेंट ईयर' जैसे शब्द आम लोगों को समझने में कठिन लगते थे। अब उनकी जगह 'टैक्स ईयर' जैसी सरल और वैश्विक स्तर पर इस्तेमाल होने वाली शब्दावली अपनाई गई है, जिससे लोगों को टैक्स प्रणाली समझने में आसानी होगी।
उन्होंने कहा कि नए नियम केवल पेशेवरों, उद्योगपतियों या व्यापारियों के लिए ही नहीं हैं, बल्कि डॉक्टर, वकील, नौकरीपेशा लोग, छोटे कारोबारी और गृहिणियां भी इन्हें आसानी से समझ सकेंगी। सरकार का उद्देश्य ऐसा टैक्स सिस्टम बनाना है, जहां हर व्यक्ति बिना किसी परेशानी के अपनी टैक्स संबंधी प्रक्रिया पूरी कर सके।
निरुपमा कोतरू ने बताया कि आयकर विभाग ने जागरूकता बढ़ाने के लिए 12 भाषाओं में ब्रोशर भी तैयार किए हैं। इनमें हिंदी, मराठी समेत कई क्षेत्रीय भाषाएं शामिल हैं, ताकि देश के अलग-अलग हिस्सों के लोग अपनी भाषा में टैक्स नियम समझ सकें।
उन्होंने कहा कि करदाताओं की मदद के लिए आयकर विभाग की वेबसाइट पर कई डिजिटल सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। करदाता आधिकारिक वेबसाइट इनकमटैक्सइंडिया.गव.इन पर जाकर प्रारंभिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा 'आयकर साथी' नामक सुविधा और चैटबॉट भी उपलब्ध कराया गया है, जहां लोग अपनी आय और टैक्स से जुड़े सवाल पूछ सकते हैं और उन्हें तुरंत मार्गदर्शन मिल जाएगा।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल टैक्स संग्रह बढ़ाना नहीं, बल्कि करदाताओं को सहज और भरोसेमंद अनुभव देना भी है। नए आयकर नियमों से टैक्स प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और आम लोगों के लिए 'पे योर टैक्स एंड रिलैक्स' का लक्ष्य वास्तव में आसान बन सकेगा।
--आईएएनएस
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