नई दिल्ली, 29 मार्च (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 'मन की बात' कार्यक्रम के दौरान देशवासियों से पांडुलिपियों के सर्वेक्षण में भाग लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह पहल देशवासियों की जनभागीदारी की भावना और भारत की समृद्ध संस्कृति व विरासत को सामने लाने का अवसर है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा, "भारत की ताकत यहां के कोटि-कोटि लोगों में निहित है। आज 'मन की बात' में एक ऐसे प्रयास के बारे में बताना चाहता हूं, जो देशवासियों की जनभागीदारी की भावना को दर्शाता है। ये प्रयास 'ज्ञान भारतम सर्वे' है, जिसका संबंध हमारी महान संस्कृति और समृद्ध विरासत से है। इसका उद्देश्य देशभर में मौजूद पांडुलिपियों के बारे में जानकारी जमा करना है। इस सर्वे से जुड़ने का एक माध्यम 'ज्ञान भारतम' ऐप है।"
देशवासियों से अनुरोध करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आपके पास अगर कोई पांडुलिपि है या उसके बारे में जानकारी है, तो उसकी फोटो 'ज्ञान भारतम ऐप' पर जरूर साझा करें। हर एंट्री से जुड़ी जानकारी को दर्ज करने से पहले उसकी पुष्टि भी की जा रही है। उन्होंने खुशी जताते हुए कहा कि अब तक हजारों पांडुलिपि लोगों ने शेयर की हैं।
इस दौरान, पीएम मोदी ने अरुणाचल प्रदेश के नामसाई के चाओ नंतिसिन्ध लोकांग और अमृतसर के अमित सिंह राणा का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि चाओ नंतिसिन्ध लोकांग ने ताई लिपि में पांडुलिपियां साझा की हैं। अमृतसर के भाई अमित सिंह राणा ने गुरुमुखी लिपि में पांडुलिपि शेयर की हैं। यह हमारी महान सिख परंपरा और पंजाबी भाषा से जुड़ी लिपि है। कुछ संस्थाओं ने ताड़ के पत्तों पर लिखी पांडुलिपि दी हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने राजस्थान के अभय जैन ग्रंथालय का भी उदाहरण दिया, जिन्होंने कॉपर प्लेट्स पर लिखी बहुत पुरानी पांडुलिपियां शेयर की हैं। लद्दाख की हेमिस मोनास्ट्री का नाम लेते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने तिब्बती में बहुमूल्य पांडुलिपियों के बारे में जानकारी दी है।
उन्होंने कहा, "यहां पर मैंने कुछ ही उदाहरण दिए हैं। यह सर्वे जून के मध्य तक जारी रहने वाला है।" देशवासियों से अपील करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आप सभी लोग अपनी संस्कृति से जुड़े पहलुओं को सामने लाएं और शेयर करें।
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