मनहर उधास: वो आवाज जिसने जैकी श्रॉफ के सिनेमाई करियर को दी पहचान

मनहर उधास : वो आवाज जिसने जैकी श्रॉफ के सिनेमाई करियर को दी पहचान

मुंबई, 12 मई (आईएएनएस)। यह बात 1950 के दशक की है। सौराष्ट्र के सावरकुंडला में एक सात साल का बच्चा रोज स्कूल जाने के लिए नदी पार करता था। रास्ते में अक्सर एक रेडियो से महान गायक केएल सहगल की दर्द भरी आवाज (जब दिल ही टूट गया...) गूंजती। उस आवाज के जादू ने उसे इस कदर सम्मोहित किया कि घर में ग्रामोफोन न होने के बावजूद, उस बच्चे ने अपने पिता से जिद करके उस गीत का रिकॉर्ड खरीदवा लिया। वह रोज रिकॉर्ड को पड़ोसी के घर ले जाता और घंटों केएल सहगल को सुनता।

​स्वर और सुरों के प्रति यही जुनूनी दीवानगी आगे चलकर भारतीय संगीत जगत को एक ऐसी मखमली आवाज देने वाली थी, जिसे हम मनहर उधास के नाम से जानते हैं।

मनहर उधास का जन्म 13 मई 1943 को ब्रिटिश भारत के बड़ौदा राज्य (वर्तमान गुजरात) में हुआ। मनहर उधास के परिवार में कला और शिक्षा का अनूठा संगम था। उनके पिता केशुभाई उधास एक सरकारी अधिकारी होने के साथ-साथ 'इसराज' (दिलरुबा) बजाने में निपुण थे, और मां जीतूबेन एक बेहतरीन गायिका थीं।

​बावजूद इसके, उस दौर में संगीत को करियर बनाना आसान नहीं था। इसलिए, मनहर उधास ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। 1965 में जब वे अपनी डिग्री लेकर सपनों के शहर बॉम्बे (अब मुंबई) पहुंचे, तो उनकी जिंदगी दो हिस्सों में बंट गई। दिन के समय वे एक टेक्सटाइल कंपनी में मशीनों के बीच एक इंजीनियर की तरह काम करते, और शाम ढलते ही 'फेमस स्टूडियोज' के रिकॉर्डिंग रूम्स में एक अघोषित 'स्क्रैच' सिंगर बन जाते। दिग्गज संगीतकार जोड़ी कल्याणजी-आनंदजी के संरक्षण में, मनहर उधास बड़े गायकों के आने से पहले गानों की धुनें और बोल टेस्ट करने के लिए अपनी आवाज देते थे।

​1969 में फिल्म 'विश्वास' के एक गीत "आप से हम को बिछड़े हुए" की रिकॉर्डिंग होनी थी। महान गायक मुकेश उस दिन उपलब्ध नहीं थे। देरी से बचने के लिए, संगीत निर्देशकों ने मनहर उधास से डमी ट्रैक गवा लिया, यह सोचकर कि बाद में मुकेश इसे अपनी आवाज़ में डब कर देंगे।

​लेकिन जब मुकेश स्टूडियो आए और उन्होंने मनहर की रिकॉर्डिंग सुनी, तो वे स्तब्ध रह गए। गाना मनहर उधास के नाम से रिलीज़ हुआ और रातों-रात सुपरहिट हो गया। उस एक पल ने एक मैकेनिकल इंजीनियर को हमेशा के लिए बॉलीवुड का फ्रंटलाइन सिंगर बना दिया।

​1970 से 90 के दशक के बीच, मनहर उधास की गूंजती हुई परिपक्व आवाज बॉलीवुड की पहली पसंद बन गई। विशेषकर सुभाष घई और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के साथ उनका गठजोड़ ऐतिहासिक रहा। जब सुभाष घई ने 'हीरो' (1983) में जैकी श्रॉफ को लॉन्च किया, तो मनहर उधास की आवाज ही उनका सिनेमाई व्यक्तित्व बनी। "तू मेरा जानू है" आज भी प्रेमियों का एंथम सी है।

​इसके बाद हिट गानों की झड़ी लग गई। 'राम लखन' का "तेरा नाम लिया," 'सौदागर' का कल्चरल फेनोमेनन "ईलू ईलू," 'कुर्बानी' का "हम तुम्हें चाहते हैं ऐसे," और 'त्रिदेव' का हाई-ऑक्टेन "गली गली में," ये सभी गीत मनहर की बहुमुखी प्रतिभा के प्रमाण थे। 'अभिमान' (1973) जैसी संगीत-प्रधान फिल्म में अमिताभ बच्चन के लिए "लूटे कोई मन का नगर" गाना उनके शास्त्रीय आधार की मजबूती को दर्शाता है।

​अपने बॉलीवुड करियर के चरम पर मनहर उधास ने व्यावसायिक बॉलीवुड से दूरी बना ली और पूरी तरह गुजराती गजलों के पुनर्जागरण में जुट गए। उन्होंने इन गजलों को बॉलीवुड जैसी ही उच्च-स्तरीय प्रोडक्शन वैल्यू दी। 1975 में उनका एल्बम 'सूरज ढलती सांज' और 1986 में टी-सीरीज के साथ 'आगमन' ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। "नयन ने बंध राखी ने" और "शांत झरोखे" जैसे गीतों ने गुजराती गजल को छोटे साहित्यिक कमरों से निकालकर 30,000 की भीड़ वाले स्टेडियम कॉन्सर्ट्स तक पहुंचा दिया।

करीब 83 वर्ष से अधिक आयु होने के बावजूद, मनहर उधास आज भी राजकोट से लेकर टेक्सास (यूएसए) तक पूरी ऊर्जा के साथ लाइव कॉन्सर्ट्स कर रहे हैं।

--आईएएनएस

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