नई दिल्ली, 28 अप्रैल (आईएएनएस)। दूध हमारे रोजमर्रा के जीवन का एक जरूरी हिस्सा है। इसमें प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन और कई जरूरी पोषक तत्व होते हैं। ऐसे में इस बात पर ध्यान देना बेहद जरूरी है कि दूध को किस बर्तन में उबाला जा रहा है, क्योंकि बर्तन का चुनाव दूध की गुणवत्ता, स्वाद और उसके पोषण पर असर डाल सकता है। अगर सही बर्तन चुना जाए तो दूध ज्यादा सेहतमंद रह सकता है। वहीं गलत बर्तन में दूध उबालने से उसके पोषक तत्व भी कम हो सकते हैं और कभी-कभी सेहत पर भी असर पड़ सकता है।
सबसे पहले बात करते हैं स्टेनलेस स्टील के बर्तन की, जो आज लगभग हर घर में इस्तेमाल होता है। यह सबसे सुरक्षित और आसान विकल्प माना जाता है, क्योंकि स्टील दूध के साथ कोई रासायनिक प्रतिक्रिया नहीं करता, जिससे दूध के पोषक तत्व वैसे ही बने रहते हैं। इसके अलावा, अगर सही तरीके से गर्म किया जाए, तो इसमें दूध जलने का खतरा भी कम होता है। यही वजह है कि पोषण विशेषज्ञ भी स्टील के बर्तन को रोजमर्रा के उपयोग के लिए सबसे अच्छा मानते हैं।
वहीं मिट्टी के बर्तनों में दूध उबाला भी सेहत के लिए फायदेमंद होता है। पुराने समय से गांवों में दूध मिट्टी के बर्तन में ही उबाला जाता रहा है। मिट्टी के बर्तन में दूध धीरे-धीरे गर्म होता है, जिससे उसका स्वाद अच्छा बना रहता है और जलने की संभावना भी कम होती है। कुछ लोगों का मानना है कि मिट्टी दूध को पूरी तरह प्राकृतिक बना देती है और इसे पचाना आसान होता है, हालांकि यह बात वैज्ञानिक रूप से साबित नहीं है।
कांसा और पीतल के बर्तन भी पारंपरिक रूप से इस्तेमाल किए जाते रहे हैं। आयुर्वेद के अनुसार, कांसा और पीतल के बर्तन भोजन को संतुलित बनाने में मदद करते हैं। लेकिन इन बर्तनों की सफाई और देखभाल बहुत जरूरी है, वरना इनमें मौजूद धातु भोजन पर असर डाल सकते है। इसलिए दूध उबालने के लिए इनका इस्तेमाल सावधानी के साथ ही करना चाहिए।
एल्युमिनियम के बर्तन में दूध उबालना शरीर के नुकसानदायक साबित हो सकता है, क्योंकि इसमें ज्यादा गर्मी के चलते धातु भोजन के साथ प्रतिक्रिया करती है। लंबे समय तक इसका उपयोग सेहत के लिए सही नहीं माना जाता। इसी तरह नॉन-स्टिक बर्तनों में भी तेज गर्मी पर कुछ रसायन निकलने का खतरा रहता है, इसलिए दूध जैसे पीने वाले खाद्य पदार्थ के लिए यह सुरक्षित विकल्प नहीं है।
--आईएएनएस
पीके/पीएम