नई दिल्ली, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। 2 अप्रैल को देशभर में हनुमान जन्मोत्सव का त्योहार धूमधाम से मनाया जाने वाला है। प्रसिद्ध हनुमान मंदिरों में जन्मोत्सव को लेकर खास तैयारी भी शुरू हो चुकी है, लेकिन क्या आप ऐसे मंदिर के बारे में जानते हैं, जिसकी खोज उनके परम भक्त ने की थी।
यह मंदिर आज सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि जयपुर की शान बन चुका है। हम बात कर रहे हैं श्री खोले के हनुमान जी की।
जयपुर में महलों और राजपूती सभ्यता के बीच खोले के हनुमान मंदिर अपने आप में खास है। यहां हनुमान जी की प्रतिमा लेटी हुई अवस्था में है और एक हाथ में गदा और दूसरे हाथ में पहाड़ है। खास बात है कि बाबा यहां मूंछ के साथ विराजमान हैं और मुंह की जगह प्रतिमा पर एक गहरा छेद बना हुआ है।
मंदिर की स्थापना को लेकर कई लोककथाएं प्रचलित हैं। माना जाता है कि 300 से अधिक साल पहले हनुमान जी के परम भक्त बाबा निर्मल दास जी महाराज लक्ष्मण डूंगरी की पहाड़ियों पर आए और यहां की खूबसूरती में पूरी तरह रम चुके थे, तभी उन्हें पहाड़ी पर संजीवनी पर्वत हाथ में लिए हनुमान जी की मूर्ति मिली। प्रतिमा इतनी अद्भुत थी कि बाबा निर्मल दास ने प्रतिमा को स्थान देने का निश्चय किया और भव्य मंदिर का निर्माण कराया।
मंदिर का नाम खोले जी इसलिए पड़ा क्योंकि मंदिर लक्ष्मण डूंगरी की पहाड़ियों में था और घने जंगल होने की वजह से पहाड़ों की दरारों में से निरंतर पानी बहता रहता था। जयपुर की स्थानीय भाषा में दरार को "खो" कहा जाता है; यही कारण था कि मंदिर को खोले वाले हनुमान कहा गया। वैसे तो राजस्थान की राजधानी जयपुर में हनुमान जी के कई मंदिर हैं, लेकिन खोले के हनुमान जी मंदिर की अपनी एक अलग ही पहचान है। यहां श्रद्धालुओं के अलावा देशी-विदेशी पर्यटक भी प्रकृति की मनोरम छटा को निहारने के लिए दूर-दूर से आते हैं।
इस तीन मंजिला मंदिर में सिर्फ हनुमान जी की प्रतिमा मौजूद नहीं है, बल्कि ठाकुर जी, ऋषि वाल्मिकी, प्रभु श्री राम, लक्ष्मण, भरत, और शत्रुघ्न की प्रतिमाएं भी मौजूद हैं। हनुमान जन्मोत्सव के मौके पर मंदिर में सिंदूरी चोला चढ़ाना शुभ माना जाता है। भक्त अपनी श्रद्धाानुसार ठंडी और गर्म पोशाक भी बालाजी को भेंट कर सकते हैं। यह मंदिर अपनी मनमोहक प्रकृति के लिए भी प्रसिद्ध है।
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