मुंबई, 14 अक्टूबर (आईएएनएस)। पिछले कारोबारी सत्र में 1.5 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी के बाद वैश्विक बाजारों के मिले-जुले संकेतों के बीच बुधवार को भारतीय शेयर बाजार सपाट खुला। निवेशक एक ओर घरेलू सकारात्मक संकेतों का आकलन कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर वैश्विक चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं।
बीएसई सेंसेक्स 73,049.76 पर खुला, जबकि पिछले दिन यह 73,033.78 पर बंद हुआ था। वहीं, निफ्टी 50 22,715.75 पर खुला, जबकि पिछले दिन यह 22,721.95 पर बंद हुआ था। इस तरह, सेंसेक्स 15.98 अंक यानी 0.02 प्रतिशत की बढ़त को दर्शाता है, जबकि निफ्टी 50 6.20 अंक यानी 0.03 प्रतिशत की मामूली गिरावट को दर्शाता है।
निफ्टी50 इंडेक्स में श्रीराम फाइनेंस, बजाज फाइनेंस और बीएसई सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले शेयरों में शामिल रहे।
व्यापक बाजारों में, निफ्टी स्मॉल कैप 100 इंडेक्स में 0.15 प्रतिशत की गिरावट आई, तो वहीं निफ्टी मिड कैप इंडेक्स में 0.33 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
सेक्टरवार देखें तो, निफ्टी आईटी ने अपनी बढ़त जारी रखी और शीर्ष लाभ कमाने वाला (1 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि) सेक्टर रहा। इसके बाद निफ्टी मिडस्मॉल आईटी एंड टेलीकॉम और निफ्टी एफएमसीजी में 0.38 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई। निफ्टी मीडिया और निफ्टी प्राइवेट बैंक भी हरे निशान में कारोबार कर रहे थे।
निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 0.67 प्रतिशत गिर गया। हेल्थकेयर से जुड़े सूचकांकों पर भी दबाव बना रहा और इनमें 0.6 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई। इसके अलावा, निफ्टी पीएसयू बैंक भी दबाव में ट्रेड करता नजर आया।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मंगलवार को निफ्टी में आई तेज तेजी एक कमजोर और गिरावट वाले बाजार में अप्रत्याशित रही, जिसका प्रमुख कारण शॉर्ट कवरिंग गतिविधियां थीं।
विशेषज्ञों ने कहा कि इस तेजी की मुख्य वजह वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की वह टिप्पणी थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि सरकार लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (एलटीसीजी) टैक्स और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) पर हितधारकों की राय की सावधानीपूर्वक समीक्षा करेगी।
इन टिप्पणियों से संभावित नीतिगत बदलावों की उम्मीद बढ़ी, जिससे निवेशकों की धारणा को बल मिला।
विश्लेषकों ने यह भी कहा कि मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी को नियंत्रित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा हाल में उठाए गए कदमों से रुपये को मजबूती मिली है। पिछले दो कारोबारी सत्रों में रुपया करीब 1.5 प्रतिशत मजबूत हुआ है।
हालांकि, अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड लगभग 5.2 प्रतिशत पर बनी हुई है और ब्रेंट क्रूड का भाव करीब 106 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है, जिसे शेयर बाजार के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि ये कारक मौजूदा तेजी की स्थिरता को सीमित कर सकते हैं। इसके बावजूद दूसरी तिमाही के बेहतर नतीजों की उम्मीद के चलते वित्तीय, दूरसंचार, धातु और ऑटोमोबाइल क्षेत्र अपेक्षाकृत मजबूत बने रह सकते हैं।
तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि हालिया तेजी ने निफ्टी के 23,200 के स्तर तक पहुंचने की उम्मीदों को फिर से मजबूत किया है।
उन्होंने कहा कि सूचकांक एक ऐसे क्षेत्र के करीब पहुंच रहा है जहां आगे की तेजी को चुनौती मिल सकती है। तत्काल समर्थन (सपोर्ट) 22,550 के आसपास दिखाई दे रहा है, जबकि 22,787 से 22,880 के अवरोध क्षेत्र के ऊपर निर्णायक बढ़त तेजी के रुख को और मजबूत कर सकती है।
इस बीच, एशियाई बाजार लगातार दो सत्रों की गिरावट के बाद संभलते हुए दिखाई दिए। निवेशकों को उम्मीद है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व अगले वर्ष ब्याज दरों में बढ़ोतरी को लेकर कम आक्रामक रुख अपना सकता है।
कारोबारी यमन के ईरान समर्थित हूती समूह और सऊदी अरब से जुड़े घटनाक्रमों से आपूर्ति पर पड़ने वाले संभावित असर का आकलन कर रहे हैं। साथ ही वैश्विक बाजारों में रूसी डीजल आपूर्ति बढ़ने की संभावना पर भी नजर बनी हुई है।
निवेशक घरेलू बाजार के दृष्टिकोण के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए भारत के अगस्त के थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) मुद्रास्फीति आंकड़ों पर भी नजर रखेंगे।
--आईएएनएस
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