बेंगलुरु, 27 जून (आईएएनएस)। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने गगनयान मिशन की तैयारियों को लेकर बड़ी जानकारी साझा की है। इसरो के चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन ने शनिवार को कहा कि गगनयान भारत का बेहद उन्नत और तकनीक-आधारित मिशन है। मिशन के तहत लॉन्च व्हीकल की 'ह्यूमन रेटिंग' और सभी जरूरी सुरक्षा प्रणालियों का विकास पूरा हो चुका है। अब वास्तविक अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने से पहले तीन मानव रहित (अनक्रूड) मिशन संचालित किए जाएंगे, जिनमें से पहले मिशन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं।
मीडिया से बातचीत में डॉ. नारायणन ने कहा, "गगनयान मिशन में किसी भी तरह का जोखिम नहीं लिया जा सकता। इसलिए इंसानों को अंतरिक्ष में भेजने से पहले सभी तकनीकों और सुरक्षा प्रणालियों का कई चरणों में परीक्षण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पहले मानव रहित मिशन की तारीख जल्द घोषित की जाएगी।"
उन्होंने हाल ही में हुए सफल सेमी-क्रायोजेनिक इंजन के पावर हेड टेस्ट को इसरो के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि इस परीक्षण में इंजन के थ्रस्ट चैंबर को छोड़कर लगभग 90 प्रतिशत थ्रस्ट लोड का सफल परीक्षण किया गया, जो भविष्य के इंजन परीक्षणों के लिए महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ है। उन्होंने बताया कि अब पूर्ण इंजन परीक्षण की तैयारियां चल रही हैं और उपग्रह भी लगभग तैयार हैं, और इसकी तारीख की घोषणा भी जल्द की जाएगी।
इसरो ने शनिवार को जारी एक आधिकारिक बयान में बताया कि 24 जून 2026 को तमिलनाडु के महेंद्रगिरि स्थित इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स (आईपीआरसी) में सेमी-क्रायोजेनिक इंजन के पावर हेड टेस्ट आर्टिकल (पीएचटीए) का 175 टन थ्रस्ट स्तर पर सफल 'हॉट टेस्ट' किया गया। पावर हेड टेस्ट आर्टिकल में इंजन के सभी प्रमुख सिस्टम शामिल होते हैं, जबकि इसमें थ्रस्ट चैंबर शामिल नहीं होता।
यह इस शृंखला का आठवां हॉट टेस्ट था, जिसका उद्देश्य प्री-बर्नर इग्निशन के बाद इंजन के प्रदर्शन का अध्ययन करना और अधिक थ्रस्ट स्तर पर उसकी स्थिर कार्यक्षमता को परखना था। इससे पहले किए गए परीक्षण 94 टन (47 प्रतिशत) और 120 टन (60 प्रतिशत) थ्रस्ट स्तर पर किए गए थे। पहली बार इंजन को 175 टन यानी करीब 88 प्रतिशत क्षमता पर सफलतापूर्वक चलाया गया। परीक्षण के दौरान मुख्य टर्बोपंप ने 400 और 500 बार आउटलेट प्रेशर पर भी सफल प्रदर्शन किया।
इसरो के अनुसार, परीक्षण पूरी तरह अनुमान के अनुरूप रहा और इंजन के सभी तकनीकी मानक अपेक्षित स्तर पर दर्ज किए गए। इस सफलता से वैज्ञानिकों का भरोसा बढ़ा है कि अब 200 टन यानी 100 प्रतिशत क्षमता पर इंजन के परीक्षण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा जा सकता है। साथ ही, यह स्वदेशी सेमी-क्रायोजेनिक इंजन के विकास में एक बड़ी उपलब्धि है।
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