यरूशलम, 26 अक्टूबर (आईएएनएस)। इजरायल में मंगलवार को संसदीय चुनाव हैं। भारत में मौजूद इजरायली दूतावास की प्रवक्ता मिशेल सिरोटा के मुताबिक 73 लाख लोग अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। अगले चार साल तक वो किसको देखना चाहते हैं ये तय करेंगे।
आईएएनएस से खास बातचीत में उन्होंने कहा, "हमारे यहां चुनाव 27 अक्टूबर को हो रहे हैं। योग्य मतदाताओं की संख्या 73 लाख (7.3 मिलियन) है। हमें उम्मीद है कि मतदान का प्रतिशत काफी अच्छा रहेगा। यह एक बहुत ही जीवंत लोकतंत्र है।"
इजरायल को लेकर आम लोगों की जरूरतों और आक्षांओं का जिक्र करते हुए उन्होंने आगे कहा, "आम लोग इजरायल के भविष्य की सोच रहे हैं। विचार कर रहे हैं कि आगे चलकर देश कैसा होगा। वे यह समझते हैं और तय करते हैं कि इजरायल में उनके अगले चार साल कैसे होंगे।"
संसदीय प्रक्रिया को आगे समझाते हुए उन्होंने कहा, "हमारी संसद में कुल 120 सीटें हैं, इसलिए सबसे बड़ी पार्टी या अपनी पसंद की किसी भी पार्टी को वोट नागरिक दे सकते हैं। वोटों के आधार पर हर पार्टी को जितनी सीटें (जनादेश) मिलती हैं, उतने ही प्रतिनिधि वे संसद में भेज सकते हैं। चाहे वे गठबंधन का हिस्सा बनें या विपक्ष में रहें। चुनाव के बाद, वोटों की गिनती होगी और राष्ट्रपति तय करेंगे कि किस पार्टी को गठबंधन बनाने का मौका दिया जाए। उनके पास गठबंधन बनाने और आम सहमति जुटाने के लिए 28 दिन का समय होगा।"
उन्होंने आगे बताया, "28 दिनों के बीच वे अन्य पार्टियों को अपने साथ गठबंधन में शामिल होने के लिए मना सकते हैं। अगर वे सफल नहीं होते हैं, तो दूसरी सबसे बड़ी पार्टी को गठबंधन बनाने का मौका मिलेगा।"
सिरोटा ने उम्मीद जताई कि इसकी नौबत नहीं आएगी। लेकिन अगर ऐसा भी नहीं हो पाता है, तो 90 दिनों के भीतर फिर से मतदान होगा।
आईएएनएस के सवाल की इजरायल में जन प्रतिनिधि चुनने में क्या अहम होता है, पार्टी या फिर उसे लीड करने वाला नेता? प्रवक्ता सिरोटा ने कहा, "दुनिया के बाकी हिस्सों की तरह ही, यहां भी बहुत से लोग अपने पसंदीदा उम्मीदवार को वोट देते हैं। लेकिन जब आप पोलिंग बूथ पर होते हैं, तो आप असल में अपनी पसंद की पार्टी को वोट दे रहे होते हैं, क्योंकि एक पार्टी का मतलब सिर्फ उसका मुख्य उम्मीदवार नहीं, बल्कि उससे कहीं बढ़कर होता है। लेकिन हम किसी एक उम्मीदवार के बजाय पूरी पार्टी को वोट देते हैं, क्योंकि हम जानते हैं कि पार्टी का प्रतिनिधित्व केवल उसके मुखिया तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह उससे कहीं अधिक व्यापक है।"
सिरोटा के मुताबिक इजरायल के लोग शांति प्रिय हैं इसलिए उसकी वकालत करतेहैं। 7 अक्टूबर, 2023 से अभी भी लोग खौफजदा है। लोगों को इजरायल की सीमाओं पर, और कभी-कभी तो मध्य इजरायल में भी, खुद को खतरे में महसूस हुआ। जाहिर है, हर कोई एक सामान्य जीवन जीना चाहता है, न कि पूरे देश में बमों या आतंकवादी हमलों के डर के साये में रहना चाहता है। लोग शांति और सुकून चाहते हैं। लेकिन मैं यह भी कहूंगी कि इजरायल अपने नागरिकों पर किसी भी तरह का खतरा कभी बर्दाश्त नहीं करेगा, चाहे वह कहीं भी हो। और हम यह सुनिश्चित करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा देंगे।
--आईएएनएस
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