नई दिल्ली, 1 नवंबर (आईएएनएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्लोरिडा में ईरान के साथ अप्रत्यक्ष बातचीत की तारीफ तो की लेकिन साथ ही पिकएक्स माउंटेन का भी जिक्र कर दिया। उन्होंने इस पर संभावित हमले की धमकी दी। पहले भी ट्रंप कई मौकों पर इस माउंटेन को लेकर तल्ख टिप्पणी कर चुके हैं। उन्होंने फिर परमाणु कार्यक्रम से जुड़े इस महत्वपूर्ण भूमिगत ठिकाने को निशाना बनाने के संकेत दिए हैं। ट्रंप ने कहा है कि ईरान के एक-दो परमाणु ठिकाने ऐसे हैं जिनसे अभी निपटना बाकी है। उन्होंने विशेष रूप से पिकैक्स माउंटेन का नाम लेते हुए कहा कि इस ठिकाने को बहुत तेजी से निशाना बनाया जा सकता है।
ट्रंप की इस टिप्पणी ने एक बार फिर ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अमेरिकी सैन्य रणनीति को लेकर उलझन बढ़ा दी है, कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर पिकएक्स माउंटेन क्या है? यह इतना अहम क्यों माना जा रहा है और अमेरिकी हमले की धमकी के बावजूद इसके बारे में इतनी अनिश्चितता का कारण क्या है?
पिकएक्स माउंटेन ईरान के इस्फहान प्रांत में स्थित एक पहाड़ी क्षेत्र है। इसे स्थानीय तौर पर 'कूह-ए कोलांग गज ला' कहा जाता है। इसका नाम अंग्रेजी में पिकैक्स माउंटेन इसलिए पड़ा क्योंकि 'कोलांग' का अर्थ कुदाल या पहाड़ खोदने वाले औजार से जुड़ा है।
यह स्थान ईरान के प्रमुख परमाणु प्रतिष्ठान नतांज से लगभग दो किलोमीटर दक्षिण में है और राजधानी तेहरान से करीब 220 किलोमीटर दूर स्थित है। इस पहाड़ के भीतर गहरी सुरंगों का एक बड़ा परिसर विकसित किया गया है। इसमें दो अलग-अलग सुरंग परिसरों के प्रवेश मार्ग हैं, जिन्हें पहाड़ के भीतर बनाया गया है।
इस ठिकाने की सबसे बड़ी विशेषता इसकी भौगोलिक बनावट है। पहाड़ के भीतर मजबूत ग्रेनाइट चट्टानों के बीच सुरंगें बनाई गई हैं, जिससे यह सामान्य हवाई हमलों के मुकाबले अधिक सुरक्षित हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसकी गहराई और प्राकृतिक चट्टानी सुरक्षा इसे निशाना बनाना बेहद चुनौतीपूर्ण बना सकती है।
पिकएक्स माउंटेन को लेकर पश्चिमी देशों के परमाणु विशेषज्ञों की चिंता इसकी भूमिगत संरचना और संभावित इस्तेमाल को लेकर है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान यहां यूरेनियम संवर्धन (यूरेनियम एनरिचमेंट) का एक ऐसा केंद्र विकसित कर रहा है, जिसे हवाई हमलों से बचाना आसान हो।
यूरेनियम संवर्धन परमाणु ईंधन तैयार करने की प्रक्रिया है। कम संवर्धित यूरेनियम का इस्तेमाल परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में किया जा सकता है, जबकि बहुत अधिक संवर्धन की स्थिति में इसका इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में भी संभव है।
अमेरिका और पश्चिमी देशों को आशंका है कि इस तरह की भूमिगत सुविधा ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम को जारी रखने का विकल्प दे सकती है। हालांकि, इस बात की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है कि पिकएक्स माउंटेन में यूरेनियम संवर्धन का काम शुरू हो चुका है।
'इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी' के विशेषज्ञ उपग्रह तस्वीरों के जरिए इस ठिकाने की गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं। उनकी 16 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, सुरंगों के प्रवेश मार्गों पर मिट्टी के अवरोध अब भी मौजूद हैं। इससे संकेत मिलता है कि परिसर में फिलहाल न तो नियमित परिचालन हो रहा है और न ही बड़े पैमाने पर निर्माण गतिविधियां जारी हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि परिसर में महत्वपूर्ण उपकरण या सामग्री हो सकती है। जुलाई में आई मीडिया रिपोर्ट्स में इजरायली खुफिया एजेंसियों के हवाले से दावा किया गया था कि ईरान ने यहां सेंट्रीफ्यूज और उनके पुर्जे पहुंचाए हैं। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
माउंटेन की चर्चा का एक बड़ा कारण इसकी सुरक्षा व्यवस्था है। अमेरिका के पास जीबीयू-57 जैसे शक्तिशाली बंकर बस्टर बम हैं, जिन्हें जमीन के भीतर बने मजबूत सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के लिए बनाया गया है।
लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ के भीतर काफी गहराई में बने इस परिसर को पूरी तरह नष्ट करना आसान नहीं होगा। अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से सुरंगों के प्रवेश द्वार, बिजली आपूर्ति, वेंटिलेशन व्यवस्था और अन्य सहायक ढांचे को नुकसान पहुंचाया जा सकता है, लेकिन इससे यह जरूरी नहीं कि पहाड़ के भीतर मौजूद सभी सेंटर भी नष्ट हो जाएं।
अमेरिका के लिए चुनौती केवल ठिकाने को निशाना बनाने की नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने की भी होगी कि वहां मौजूद संभावित परमाणु उपकरण और सामग्री दोबारा इस्तेमाल के योग्य न रहें।
दिलचस्प बात यह है कि पिकएक्स माउंटेन अब तक नतांज और फोर्दो जैसे ईरान के अन्य परमाणु ठिकानों पर हुए हमलों के बाद भी चर्चा में बना हुआ है। यही वजह है कि ट्रंप प्रशासन इसे अपने संभावित सैन्य लक्ष्यों में शामिल बताता रहा है।
ईरान का कहना रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। दूसरी तरफ पश्चिमी देशों को उसके यूरेनियम संवर्धन और भूमिगत परमाणु ढांचे को लेकर संदेह है।
एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) ने इस भूमिगत परिसर का निरीक्षण नहीं किया है इसलिए वहां वास्तव में कौन से उपकरण मौजूद हैं और उनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से होना है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
--आईएएनएस
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