बेंगलुरु, 22 अक्टूबर (आईएएनएस)। स्वीडन-इंडिया बिजनेस काउंसिल (एसआईबीसी) के महासचिव और सीईओ रॉबिन सुखिया ने गुरुवार को कहा कि भारत और स्वीडन के बीच रक्षा विनिर्माण, हरित प्रौद्योगिकी, नवाचार और उन्नत विनिर्माण के क्षेत्र में सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं और आने वाले वर्षों में यह साझेदारी नए स्तर पर पहुंच सकती है।
न्यूज एजेंसी आईएएनएस से खास बातचीत में भारत में रक्षा विनिर्माण और संयुक्त उत्पादन के विस्तार पर रॉबिन सुखिया ने कहा कि भारतीय कंपनियां अब स्वीडन और यूरोपीय बाजारों को समझने के लिए वहां पहुंच रही हैं। उन्होंने बताया कि नाटो देशों में रक्षा खरीद गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं, जबकि भारत में उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के रक्षा औद्योगिक कॉरिडोर निवेश और उत्पादन के नए केंद्र बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात मजबूत औद्योगिक इकोसिस्टम तैयार करना है और भारत में यह प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ रही है।
हरित ऊर्जा और जलवायु लक्ष्यों को लेकर भारत-स्वीडन सहयोग पर बात करते हुए रॉबिन सुखिया ने कहा कि भारत ने विशेष रूप से सौर ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल इंटरनेशनल सोलर अलायंस का उल्लेख करते हुए कहा कि इस मंच ने वैश्विक स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा सहयोग को नई दिशा दी है और स्वीडन भी इसका हिस्सा है।
उन्होंने कहा, "स्वीडन और भारत के बीच उद्योगों की ऊर्जा दक्षता, हरित प्रौद्योगिकी, कार्बन कटौती और सतत औद्योगिक विकास से जुड़े कई कार्यक्रम पहले से चल रहे हैं। जलवायु परिवर्तन से निपटने और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को गति देने के लिए दोनों देश मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।"
बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक माहौल पर उन्होंने कहा, "भारत और स्वीडन दोनों लोकतांत्रिक मूल्यों और नियम-आधारित विश्व व्यवस्था में विश्वास रखते हैं। कुछ मुद्दों पर दृष्टिकोण अलग हो सकता है, लेकिन समग्र रूप से दोनों देशों की सोच काफी मिलती-जुलती है।"
रॉबिन सुखिया ने कहा कि वैश्विक संस्थानों में भारत की भूमिका बढ़ना जरूरी है और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। उन्होंने कहा कि दोनों देश दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में मिलकर काम करने की व्यापक संभावनाएं रखते हैं।
भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने के सवाल पर रॉबिन सुखिया ने आईएएनएस से कहा कि पिछले वर्षों में भारत में हजारों नियमों और प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है, जो सकारात्मक कदम है। हालांकि उन्होंने कहा कि असली चुनौती नीतियों के क्रियान्वयन और अनुमोदनों की समयसीमा को लेकर है।
उन्होंने कहा, "उद्योग जगत के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज समय की निश्चितता होती है। यदि किसी परियोजना की मंजूरी में एक वर्ष लगेगा, तो निवेशक उसके अनुसार योजना बना सकते हैं। लेकिन मंजूरी की समयसीमा स्पष्ट न होने पर निवेश निर्णय प्रभावित होते हैं।"
उन्होंने कहा कि भारत में सुधारों के साथ-साथ प्रक्रियाओं को अधिक पूर्वानुमेय और समयबद्ध बनाना भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि आज की वैश्विक सप्लाई चेन 'जस्ट-इन-टाइम' मॉडल पर काम करती है। ऐसे में यदि मशीनरी, कंपोनेंट्स या अन्य सामान समय पर सीमा शुल्क प्रक्रिया से नहीं गुजरते, तो उत्पादन और आपूर्ति शृंखला प्रभावित हो सकती है।
रॉबिन सुखिया ने कहा, "भारत और स्वीडन के बीच सबसे महत्वपूर्ण सहयोग के क्षेत्रों में से एक नवाचार है। स्वीडन दुनिया के सबसे नवाचारी देशों में शामिल है, जबकि भारत के पास विशाल प्रतिभा और कुशल मानव संसाधन का आधार है।"
उन्होंने आगे कहा कि आने वाले समय में रोजगार सृजन का सबसे बड़ा आधार नवाचार होगा। स्वीडन की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की प्रतिभा मिलकर नए उत्पाद, नई सेवाएं और नई कंपनियां विकसित कर सकती हैं, जिससे बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित होंगे।
भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर रॉबिन सुखिया ने कहा कि यह समझौता दुनिया की लगभग एक चौथाई अर्थव्यवस्था और करीब दो अरब लोगों को जोड़ने वाला मंच बन सकता है। उन्होंने इसे वैश्विक स्तर पर "गेम-चेंजर" करार देते हुए कहा कि मौजूदा अनिश्चितताओं के दौर में यह समझौता स्थिरता, भरोसा और व्यापार के लिए मजबूत आधार तैयार करेगा।
उन्होंने कहा कि एफटीए लागू होने के बाद कई यूरोपीय कंपनियां भारत में नए अवसर तलाशेंगी, जबकि भारतीय कंपनियों को भी यूरोप के विशाल बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी। इससे व्यापार, निवेश और रोजगार सृजन को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।
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