संयुक्त राष्ट्र, 30 जुलाई (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय सहायता कर्मियों और सहयोगियों ने गाजा के लोगों की मदद के लिए अपनी कोशिशें तेज कर दी हैं, ताकि वे चूहों के फैलने जैसी बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्याओं और खतरों को कम कर सकें। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (ओसीएचए) ने यह जानकारी दी है।
ओसीएचए ने बुधवार (स्थानीय समय) को बताया कि इस महीने की शुरुआत में जिन 83 फीसदी जगहों का असेसमेंट किया गया, वहां चूहों और एक्टोपैरासाइट का बड़े पैमाने पर इंफेक्शन देखा गया। इसके साथ ही सड़कों पर सीवेज, रुका हुआ पानी और साफ-सफाई की खराब हालत भी देखी गई।
जवाब में, मानवीय साझेदार इस हफ्ते चूहों पर कंट्रोल बढ़ा रहे हैं। ऑफिस ने कहा कि यूएन डेवलपमेंट प्रोग्राम और दूसरे पार्टनर रोजाना नौ मीट्रिक टन चूहे मारने वाली दवाइयां बांट रहे हैं, जिन्हें संयुक्त अरब अमीरात गाजा में लाता है।
ओसीएचए ने कहा, "सार्वजनिक स्वास्थ्य के खतरों को कम करने के लिए, स्पेयर पार्ट्स और इंजन ऑयल जैसे जरूरी उपकरण और सप्लाई तक लगातार पहुंच की तुरंत जरूरत है। यह भी जरूरी है कि गाजा में सॉलिड वेस्ट को मैनेज करने वाले साझेदारों को उन इलाकों में लैंडफिल तक पहुंचने की इजाजत दी जाए जहां इजरायली सेना ने पहुंच पर रोक लगा रखी है, जो गाजापट्टी का लगभग 65 फीसदी हिस्सा है।"
ऑफिस ने कहा कि परिवारों के लिए पानी तक पहुंच भी रोज की चुनौती बनी हुई है। न्यूज एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र और उसके साझेदार लाखों बच्चों और उनके परिवारों को जरूरी पानी, सफाई और हाइजीन सर्विस देकर उनकी मदद करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के उपप्रवक्ता फरहान हक ने बुधवार को नियमित ब्रीफिंग में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि खान यूनिस में यूनिसेफ एक मुख्य कुएं के निर्माण में मदद कर रहा है, जिससे करीब 7,000 लोगों को पानी मिल सकेगा। वहीं गाजा शहर में यूनिसेफ, शेख अजलीन वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट प्लांट की सफाई में जुटा है। लड़ाई से पहले यह प्लांट 7 लाख लोगों को सेवा देता था।
फरहान हक ने कहा कि यूएन ऑपरेशनल सैटेलाइट एप्लीकेशन प्रोग्राम और साझेदारों ने इस हफ्ते की शुरुआत में अनुमान लगाया था कि लगभग 430,000 किंडरगार्टन और स्कूल जाने वाले बच्चों के नाम गाजा में 600 से ज्यादा अस्थायी लर्निंग स्पेस में दर्ज थे। यह अनुमानित स्टूडेंट आबादी का लगभग 56 फीसदी है।
उन्होंने कहा कि इनमें से कुछ लर्निंग स्पेस में, बच्चों को नए स्कूल साल से पहले पढ़ाई में मदद करने के लिए प्रोग्राम चल रहे हैं, हालांकि स्कूल जाने वाले लगभग आधे बच्चों को अभी भी सीखने के सही मौके नहीं मिल पा रहे हैं।
--आईएएनएस
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