बदलते दौर में भी नहीं बदली 'ओणम साध्या' की परंपरा, केले के पत्ते पर सजते हैं 26 पकवान

बदलते दौर में भी नहीं बदली 'ओणम साद्या' की परंपरा, केले के पत्ते पर सजते हैं 26 पकवान

तिरुवनंतपुरम, 25 अगस्त (आईएएनएस)। समय के साथ त्योहार मनाने का तरीका जरूर बदला है, लेकिन केरल ने ओणम की एक खास परंपरा को आज भी पूरी मजबूती से संभालकर रखा है। यह है ओणम साध्या... इसमें केले के पत्ते पर 26 तरह के पकवान परोसे जाते है।

ओणम का त्योहार यूं तो कई दिनों तक चलता है, लेकिन सबसे खास दिन वह माना जाता है, जब परिवार एक साथ बैठकर ओणम साध्या का आनंद लेते हैं। केरल के घरों की रसोई में इन दिनों खूब चहल-पहल रहती है। तरह-तरह के पकवान तैयार किए जाते हैं और केले के बड़े पत्ते पर उन्हें एक तय क्रम में सजाया जाता है।

ओणम को केरल के सबसे खास त्योहारों में गिना जाता है। इसे अलग-अलग जाति, धर्म और सामाजिक वर्ग के लोग मनाते हैं। इस त्योहार के पीछे राजा महाबली के उस दौर की कहानी जुड़ी है, जब लोगों के बीच बराबरी, खुशहाली और सुख-समृद्धि की बात कही जाती है। ओणम पर उस पुराने दौर की याद और भावना आज भी लोगों के बीच दिखाई देती है।

केरल के परिवारों का ढांचा भी अब काफी बदल गया है। पहले बड़े-बड़े पुश्तैनी घरों में कई भाई-बहन, उनके बच्चे और रिश्तेदार एक साथ रहते थे। त्योहार के मौके पर पूरा परिवार एक ही जगह इकट्ठा होता और लंबी कतार में बैठकर खाना खाता था। अब ऐसे बड़े संयुक्त परिवार कम हो गए हैं। लोग नौकरी और पढ़ाई के लिए अलग-अलग शहरों और देशों में रहने लगे हैं। इसके बावजूद, ओणम परिवार को फिर से जोड़ने का एक मौका बन जाता है। कई लोग त्योहार के समय अपने घर लौटते हैं और परिवार के साथ साध्या खाते हैं।

ओणम साध्या की सबसे खास बात इसकी लंबी थाली है। इसमें करीब 26 तरह के पकवान शामिल होते हैं। केले के पत्ते पर पहले चावल और दाल से लेकर घी, सांभर, अवियल, थोरन, ओलन, कलान, एरिसेरी, अचार, पचड़ी, खिचड़ी, पापड़, केले और केले के चिप्स जैसी चीजें परोसी जाती हैं। आखिर में अलग-अलग तरह की पायसम दिए जाते है।

साध्या केरल की पारंपरिक रसोई की पूरी झलक है। एक ही पत्ते पर मीठा, खट्टा, नमकीन और मसालेदार स्वाद मिलते हैं। खास बात यह है कि हर व्यंजन को परोसने की भी अपनी परंपरा है।

पहले लोग मिलकर इसे घर में बनाते थे, जबकि अब कई लोग होटल, रेस्टोरेंट या कैटरर से साध्या मंगवाना भी पसंद करते हैं। छोटे कैटरर, रेस्टोरेंट और होटल इस मौसम में बड़ी संख्या में साध्या तैयार करते हैं।

जिन लोगों के लिए घर पर इतने सारे पकवान बनाना मुश्किल होता है, वे अब तैयार साध्या का पैकेट घर मंगवा लेते हैं। इसकी कीमत जगह और खाने की मात्रा के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है। सामान्य साध्या करीब 300 रुपए से शुरू होकर बड़े होटलों में 1,000 रुपए से भी ज्यादा की हो सकती है।

फिर चाहे साध्या किसी पुराने पुश्तैनी घर में केले के पत्ते पर परोसी जाए, छोटे से फ्लैट में परिवार के साथ खाई जाए या फिर पैक होकर घर पहुंचे, इसकी भावना वही रहती है।

ओणम के कुछ दिनों में केरल के लोग एक साथ बैठकर खाना, परिवार से मिलना और पुरानी यादों को फिर से जीना पसंद करते हैं। इसी वजह से 26 पकवानों वाली यह साध्या आज भी ओणम की जान बनी हुई है।

---आईएएनएस

पीके/एएस