वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए निर्यात विविधीकरण और मजबूत नीतिगत वातावरण जरूरी: नीति आयोग उपाध्यक्ष

वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए निर्यात विविधीकरण और मजबूत नीतिगत वातावरण जरूरी: नीति आयोग उपाध्यक्ष

नई दिल्ली, 16 सितंबर (आईएएनएस)। नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने बुधवार को कहा कि भारत की व्यापारिक प्रतिस्पर्धा को और मजबूत बनाने के लिए निर्यात बाजारों और उत्पादों में निरंतर विविधीकरण, वैश्विक और क्षेत्रीय मूल्य शृंखलाओं के साथ गहरा जुड़ाव, रणनीतिक क्षेत्रों में मजबूत घरेलू क्षमताएं और ऐसा नीतिगत वातावरण जरूरी है जो भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रभावी ढंग से प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनाए।

लाहिड़ी अप्रैल-जून 2026 अवधि के लिए जारी 'ट्रेड वॉच क्वार्टरली' रिपोर्ट के नवीनतम संस्करण के लॉन्च के अवसर पर बोल रहे थे।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत का वस्तु और सेवा व्यापार लगातार विस्तार कर रहा है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में देश का कुल व्यापार 506.9 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो सालाना आधार पर 15.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

नीति आयोग की रिपोर्ट में धातुओं और खनिजों के क्षेत्र में भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धा और बढ़ती आयात निर्भरता का विश्लेषण किया गया है। इसमें विशेष रूप से क्रिटिकल मिनरल्स और उच्च मूल्य वाले गैर-लौह धातुओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए घरेलू मूल्य संवर्द्धन, निवेश, बाजार विविधीकरण और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने के अवसरों और चुनौतियों का आकलन किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत के वस्तु निर्यात में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई, जिसमें खनिज ईंधन, विद्युत मशीनरी, परमाणु रिएक्टर, लोहा एवं इस्पात तथा वाहन प्रमुख योगदानकर्ता रहे। पेट्रोलियम उत्पादों, इस्पात, इंजीनियरिंग वस्तुओं और ऑटोमोबाइल निर्यात में वृद्धि ने इस प्रदर्शन को समर्थन दिया।

दूसरी ओर, आयात ने भी भारत की औद्योगिक और ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पूंजीगत वस्तुओं, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और तांबे के आयात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार, यह रुझान घरेलू निवेश गतिविधियों की मजबूती, औद्योगिक क्षमता विस्तार और भारतीय उद्योग के वैश्विक मूल्य शृंखलाओं के साथ बढ़ते एकीकरण को दर्शाता है।

नीति आयोग ने कहा कि भारत के निर्यात बाजारों में भी लगातार विविधता आ रही है। तंजानिया और दक्षिण अफ्रीका देश के शीर्ष 10 निर्यात बाजारों में शामिल होकर उभरे हैं, जबकि सिंगापुर को निर्यात में भी मजबूत वृद्धि दर्ज की गई।

आयात के मोर्चे पर लैटिन अमेरिका और पश्चिम अफ्रीका से आयात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है, जिसका एक प्रमुख कारण कच्चे तेल के स्रोतों में विविधता लाने की रणनीति है, जिससे भारत के आयात पोर्टफोलियो में लचीलापन और मजबूती आई है।

रिपोर्ट के अनुसार, पूर्वोत्तर एशिया, पश्चिम एशिया-जीसीसी और आसियान क्षेत्र अब भी भारत के प्रमुख आयात स्रोत बने हुए हैं और मिलकर देश के कुल आयात का लगभग आधा हिस्सा प्रदान करते हैं।

मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) वाले देशों के साथ भारत के व्यापार में भी तेजी जारी रही। रिपोर्ट के अनुसार, एफटीए साझेदार देशों को निर्यात 36.3 प्रतिशत बढ़ा, जबकि आयात में 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इससे भारत के आर्थिक साझेदारी संबंधों में मजबूती और वैश्विक व्यापार एवं आपूर्ति शृंखलाओं के साथ गहरे एकीकरण का संकेत मिलता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2025 में भारत का धातु निर्यात 34.8 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसमें लोहा एवं इस्पात, लोहे-इस्पात से बने उत्पाद और एल्यूमीनियम का संयुक्त योगदान लगभग 78 प्रतिशत रहा।

वहीं, धातुओं और खनिजों का आयात 2015 में 32.2 अरब डॉलर से बढ़कर 2025 में 60.5 अरब डॉलर हो गया। यह वृद्धि विशेष रूप से तांबा, लिथियम, कोबाल्ट और निकल जैसे महत्वपूर्ण औद्योगिक एवं रणनीतिक खनिजों की बढ़ती मांग को दर्शाती है। रिपोर्ट के अनुसार यह मांग भारत के बढ़ते विनिर्माण क्षेत्र, अवसंरचना विकास और ऊर्जा परिवर्तन की आवश्यकताओं के अनुरूप बढ़ रही है।

--आईएएनएस

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