भारत में बैटरी स्टोरेज समर्थित नवीकरणीय ऊर्जा लागत के मामले में नए कोयले से बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं: स्टडी

भारत में बैटरी स्टोरेज समर्थित नवीकरणीय ऊर्जा लागत के मामले में नए कोयले से बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं: स्टडी

वॉशिंगटन, 20 अगस्त (आईएएनएस)। एक नए अध्ययन में दावा किया गया है कि बैटरी स्टोरेज द्वारा समर्थित नवीकरणीय ऊर्जा भारत में नए कोयला-आधारित बिजली संयंत्रों की तुलना में कम लागत पर चौबीसों घंटे विश्वसनीय बिजली उपलब्ध करा सकती है। अमेरिका के कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले के स्टडी के अनुसार, यह मॉडल भारत के ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकता है और स्वच्छ ऊर्जा को प्रतिस्पर्धी विकल्प के रूप में स्थापित कर सकता है।

अध्ययन में भारतीय सौर ऊर्जा निगम यानी सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एसईसीआई) द्वारा आयोजित 1,000 मेगावाट क्षमता की एक महत्वपूर्ण नीलामी का विश्लेषण किया गया, जिसके परिणामस्वरूप 25 वर्षों के लिए नाममात्र शर्तों में 5.25 रुपए प्रति किलोवाट-घंटे का टैरिफ तय किया गया।

शोधकर्ताओं ने कहा कि इस परिणाम ने साबित किया है कि बैटरी स्टोरेज के साथ नवीकरणीय ऊर्जा संयोजन कोयला-आधारित बिजलीघरों जैसी निरंतर और भरोसेमंद बिजली आपूर्ति देने में सक्षम है, जो ईंधन की कीमतों में भविष्य में होने वाली वृद्धि के जोखिम के बिना भारत के मौजूदा कोयला संयंत्रों के प्रदर्शन से काफी हद तक मेल खाती है।

"इंडियाज रिन्यूएबल एनर्जी ब्रेकथ्रू: कोल-लाइक रिलायबिलिटी ऐट अ लोअर, फिक्स्ड प्राइस" शीर्षक से प्रकाशित यह अध्ययन विश्वविद्यालय के इंडिया एनर्जी एंड क्लाइमेट सेंटर द्वारा तैयार किया गया है।

नीलामी की संरचना इस प्रकार बनाई गई थी कि शाम, रात और सुबह के समय अधिकतम बिजली उपलब्ध कराई जाए, जबकि दिन में जब सौर ऊर्जा प्रचुर मात्रा में उपलब्ध रहती है, तब आपूर्ति की आवश्यकता अपेक्षाकृत कम रखी जाए। उत्पादकों के लिए यह अनिवार्य किया गया कि वे खरीदार द्वारा चुने गए छह पीक घंटों में कम से कम 90 प्रतिशत अनुबंधित क्षमता उपलब्ध कराएं। अन्य गैर-सौर घंटों में यह सीमा 70 प्रतिशत और सौर घंटों के दौरान 50 से 60 प्रतिशत निर्धारित की गई।

अनुबंध की शर्तों के अनुसार, हर 15 मिनट के ब्लॉक में प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाएगा। यदि निर्धारित आपूर्ति में कमी रहती है, तो अनुबंध मूल्य के डेढ़ गुना के बराबर जुर्माना लगाया जाएगा।

शोधकर्ताओं ने 10 भारतीय राज्यों के 10 वर्षों के प्रति घंटा मौसम आंकड़ों का उपयोग करते हुए यह जांचा कि क्या सौर ऊर्जा और बैटरी भंडारण इस व्यवस्था की आवश्यकताओं को आर्थिक रूप से पूरा कर सकते हैं।

अध्ययन में पाया गया कि प्रत्येक 1,000 मेगावाट अनुबंधित क्षमता के लिए राजस्थान जैसे उच्च सौर क्षमता वाले राज्यों में लगभग 3 गीगावाट सौर ऊर्जा क्षमता और 12 गीगावाट-घंटे बैटरी भंडारण की आवश्यकता होगी। जिन राज्यों में मानसून या सौर संसाधनों की स्थिति अलग है, वहां करीब 15 से 20 प्रतिशत अधिक सौर क्षमता की जरूरत हो सकती है, लेकिन बैटरी भंडारण की आवश्यकता लगभग समान रहेगी।

अध्ययन के प्रमुख लेखक और केंद्र में मॉडलिंग एवं विश्लेषण निदेशक उमेद पालीवाल ने कहा कि भारत की भौगोलिक स्थिति इस मॉडल के लिए बहुत अनुकूल है।

उन्होंने कहा, "भारत की भूमध्य रेखा के निकट स्थिति के कारण यहां साल भर सौर ऊर्जा उत्पादन में मौसमी उतार-चढ़ाव अपेक्षाकृत कम रहता है। यूरोप जैसे उच्च अक्षांश वाले देशों में सर्दियों के दौरान उत्पादन में बड़ी गिरावट आती है, जबकि भारत की मुख्य चुनौती दिन में मिलने वाली प्रचुर सौर ऊर्जा को शाम और रात के समय के लिए संरक्षित करना है, जो आधुनिक और कम लागत वाली बैटरियों के माध्यम से संभव है।"

इस नीलामी में 16 कंपनियों ने भाग लिया था और सात डेवलपर्स को क्षमता आवंटित की गई। उल्लेखनीय बात यह रही कि सभी सफल बोलियां 5.25 से 5.26 रुपए प्रति यूनिट के बेहद संकीर्ण दायरे में रहीं।

अध्ययन के सह-लेखक निकित अभ्यंकर ने कहा कि यह मूल्य भारत में सौर और बैटरी प्रौद्योगिकी की लागत में आई भारी गिरावट को दर्शाता है। उन्होंने कहा, "यह किसी एक आक्रामक बोलीदाता का मामला नहीं है। सात विजेता केवल एक पैसे के अंतर में रहे, जिससे स्पष्ट होता है कि 5.25 रुपए प्रति यूनिट अब स्थिर और विश्वसनीय नवीकरणीय ऊर्जा की बाजार-आधारित कीमत बनती जा रही है।"

शोधकर्ताओं का मानना है कि यह मॉडल भारत की बिजली वितरण कंपनियों की भविष्य की योजना निर्माण प्रक्रिया को बदल सकता है। साथ ही डेटा सेंटर, इस्पात, एल्यूमीनियम और अन्य विनिर्माण उद्योगों के लिए भी यह आकर्षक विकल्प बन सकता है, क्योंकि उन्हें लगातार और निर्बाध बिजली आपूर्ति की आवश्यकता होती है।

अध्ययन के सह-लेखक अमोल फड़के ने कहा, "यदि भारत इस मॉडल को बड़े पैमाने पर अपनाता है, तो उपभोक्ताओं और उद्योगों को 25 वर्षों तक निश्चित कीमत पर विश्वसनीय और स्वच्छ बिजली मिल सकती है। कम लागत, स्थिर कीमत और भरोसेमंद आपूर्ति का यह संयोजन भारतीय विनिर्माण क्षेत्र के लिए एक बड़ा प्रतिस्पर्धात्मक लाभ साबित हो सकता है।"

--आईएएनएस

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