नई दिल्ली, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। फिक्की के अध्यक्ष अनंत गोयनका ने मंगलवार को कहा कि वैश्विक अस्थिरता और महंगाई बढ़ाने के जोखिम के चलते आरबीआई इस बार रेपो रेट को स्थिर रख सकता है।
एक कार्यक्रम के साइडलाइन में आईएएनएस से बातचीत में उन्होंने कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक संकट ने भारतीय उद्योग पर लॉजिस्टिक्स, लागत में वृद्धि, मांग में गिरावट और दीर्घकालिक अनिश्चितता के रूप में कई प्रतिकूल प्रभाव डाले हैं।
गोयनका ने कहा, "वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के कारण व्यावसायिक गतिविधियां बाधित हो रही हैं, जिससे उद्योग बढ़ती अनिश्चितता से जूझ रहा है।"
उन्होंने कहा कि संघर्ष की बदलती प्रकृति के कारण परिणामों का अनुमान लगाना या आगे की योजना बनाना मुश्किल हो रहा है, जिससे कंपनियों को प्रतिदिन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
गोयनका ने आईएएनएस को बताया, "संकट ने व्यापार के कई पहलुओं को प्रभावित किया है, जिनमें रसद में व्यवधान, इनपुट लागत में वृद्धि और मांग में कमी शामिल हैं।"
उन्होंने आगे कहा कि दीर्घकालिक अनिश्चितता निवेश निर्णयों और समग्र व्यावसायिक भावना पर भी असर डाल रही है।
कंपनियों के लिए एक प्रमुख चिंता व्यापार की निरंतरता बनाए रखना है। उन्होंने कहा, "कंपनियां आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के बावजूद कारखानों के संचालन को सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं।"
उन्होंने आईएएनएस को बताया,“पैकेजिंग सामग्री की अनुपलब्धता जैसी छोटी-मोटी कमी भी उत्पादन रोक सकती है और आपूर्ति में देरी कर सकती है, जिससे उद्योगों में व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।”
उन्होंने विशेष रूप से बढ़ती मुद्रास्फीति और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से उत्पन्न होने वाले द्वितीय और तृतीय स्तर के प्रभावों के बारे में भी चेतावनी दी, जो समय के साथ मांग को और कम कर सकते हैं। इसके जवाब में, उद्योग संगठन सरकार के साथ मिलकर काम कर रहे हैं और व्यवसायों को ऊर्जा संरक्षण और लचीलापन योजना जैसे उपाय अपनाने की सलाह दे रहे हैं।
नीतिगत सुधारों पर, गोयनका ने प्रस्तावित जन विश्वास विधेयक 2026 का स्वागत करते हुए इसे व्यापार करने में आसानी को बेहतर बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक अनुपालन संबंधी मामूली मुद्दों को अपराध की श्रेणी में रखने से रोकता है, जिससे छोटे और बड़े दोनों उद्यमों को लाभ होगा।
उन्होंने आगे कहा कि यह सुधार छोटे मामलों के बोझ को कम करके न्यायिक प्रणाली पर दबाव भी कम करेगा, जिससे न्यायालय अधिक महत्वपूर्ण मामलों पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।
भारतीय रिजर्व बैंक के मौद्रिक नीति संबंधी निर्णय को देखते हुए, गोयनका ने कहा कि लगातार मुद्रास्फीति के दबाव के कारण मौजूदा माहौल में ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम ही है।
उनका मानना है कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में यथास्थिति बनाए रखेगा, साथ ही मुद्रास्फीति और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी बारीकी से नजर रखेगा।
--आईएएनएस
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