पाकिस्तान में मानवाधिकार वकीलों का दमन जारी, अधिकार संगठन ने की निंदा

पाकिस्तान में मानवाधिकार वकीलों का दमन जारी, अधिकार संगठन ने की निंदा

इस्लामाबाद, 23 जनवरी (आईएएनएस)। पाकिस्तान की मानवाधिकार परिषद (एचआरसी) ने मानवाधिकार वकील इमान जैनब मज़ारी-हाज़िर और उनके पति हादी अली चट्टा की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की है। परिषद ने इसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करार दिया है।

एचआरसी का यह बयान तब आया है, जब इमान और हादी को शुक्रवार को इस्लामाबाद में उस समय गिरफ्तार किया गया, जब वे जिला अदालत जा रहे थे। दोनों के खिलाफ पिछले साल अक्टूबर में एक मामले में आरोप तय किए गए थे, जो कथित विवादित सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़ा है।

मानवाधिकार परिषद ने कहा, “यह कार्रवाई संवैधानिक अधिकारों, नागरिक स्वतंत्रताओं और वकीलों की पेशेवर स्वतंत्रता पर सीधा हमला है। किसी भी लोकतांत्रिक समाज में इस तरह के कदम अस्वीकार्य हैं और यह मौलिक अधिकारों की रक्षा के बजाय उनके उल्लंघन की खतरनाक प्रवृत्ति को दर्शाता है।”

परिषद ने दोनों वकीलों की तत्काल और बिना शर्त रिहाई की मांग करते हुए उनके खिलाफ चल रही सभी “अवैध और प्रतिशोधात्मक” कार्यवाहियों को तुरंत रोकने की अपील की।

एचआरसी ने कहा, “कानून का शासन, पाकिस्तान का संविधान और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार सिद्धांतों का सम्मान करना सरकार की बुनियादी जिम्मेदारी है, जिसे किसी भी राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव में नहीं तोड़ा जा सकता।”

गिरफ्तारी के बाद कई पत्रकारों, सांसदों और मानवाधिकार संगठनों ने इस कार्रवाई की निंदा करते हुए दोनों वकीलों को न्याय दिलाने की मांग की।

पाकिस्तानी सीनेट में विपक्ष के नेता अल्लामा राजा नासिर अब्बास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि अदालत जाते समय इमान और हादी की गिरफ्तारी “राज्य की अति-हस्तक्षेप और प्रक्रियात्मक अनियमितताओं के चिंताजनक पैटर्न को उजागर करती है, जो निष्पक्ष सुनवाई और उचित प्रक्रिया के सिद्धांतों को कमजोर करती है।”

उन्होंने कहा, “राज्य की ऐसी कार्रवाइयां न केवल संस्थागत कमजोरियों को उजागर करती हैं, बल्कि न्यायिक व्यवस्था के पूरी तरह चरमरा जाने का खतरा भी पैदा करती हैं, जिससे कानून के शासन पर जनता का भरोसा टूटता है। मैं कानून के शासन, निष्पक्ष सुनवाई और सभी के लिए न्याय की मांग करता हूं। इमान और हादी को तुरंत जमानत के लिए पेश किया जाना चाहिए और उन्हें अपने मामले में बचाव का पूरा अवसर मिलना चाहिए।”

पूर्व सीनेटर अफरासियाब खट्टक ने गिरफ्तारी को “मानवाधिकारों और कानून के शासन पर कब्जाधारियों का खुला हमला” बताते हुए कहा कि दोनों युवा वकील अदालतों में पीड़ितों का बचाव कर रहे थे।

उन्होंने कहा, “फासीवादी हथकंडे कब्जाधारियों को जनता के आक्रोश से नहीं बचा सकते, जो निश्चित रूप से उन्हें जवाबदेह बनाएगी।”

एक अन्य मानवाधिकार संगठन बलोच वॉयस फॉर जस्टिस (बीवीजे) ने भी गिरफ्तारी की निंदा करते हुए कहा, “ये गिरफ्तारियां कानून के बजाय डराने-धमकाने पर आधारित राज्य की रणनीति को दर्शाती हैं। सच बोलने वाले वकीलों और कार्यकर्ताओं को चुप कराना उचित प्रक्रिया और मौलिक स्वतंत्रताओं पर सीधा हमला है।”

--आईएएनएस

डीएससी