नई दिल्ली, 2 अप्रैल (आईएएनएस)। सरकार द्वारा घरेलू एयरलाइंस के लिए एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) की कीमतों में 8.5 प्रतिशत की संतुलित बढ़ोतरी से तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) को फिलहाल थोड़ी राहत मिल सकती है। हालांकि, विश्लेषकों के मुताबिक यह राहत सिर्फ अल्पकालिक है।
वैश्विक ब्रोकरेज फर्म नोमुरा के विश्लेषकों का अनुमान है कि युद्ध के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी के चलते सरकारी तेल कंपनियां अभी भी एटीएफ की बिक्री पर भारी नुकसान उठा रही हैं।
मौजूदा कीमतों के आधार पर, इन कंपनियों को घरेलू एटीएफ बिक्री पर करीब 64 रुपए प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है, जो कि लगभग 109 डॉलर प्रति बैरल के मार्केटिंग लॉस के बराबर है।
ब्रोकरेज के अनुसार, मौजूदा हालात में सालाना आधार पर एटीएफ से होने वाला नुकसान इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के लिए 23,600 करोड़ रुपए, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के लिए 9,500 करोड़ रुपए और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के लिए 5,300 करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है।
घरेलू एयरलाइंस के लिए एटीएफ की कीमतों में 8,289.04 रुपए प्रति किलोलीटर यानी 8.56 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है, जिससे कीमत 96,638.14 रुपए से बढ़कर 1,04,927.18 रुपए प्रति किलोलीटर हो गई है।
हालांकि यह बढ़ोतरी महत्वपूर्ण है, लेकिन वैश्विक तेल कीमतों में आई तेजी के मुकाबले यह काफी कम है।
वहीं विदेशी एयरलाइंस, चार्टर और अन्य गैर-नियमित उड़ान ऑपरेटर्स के लिए एटीएफ की कीमतों में 114.5 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी कर दी गई है, जिससे यह 2,07,341.22 रुपए प्रति किलोलीटर हो गई है।
एटीएफ, ओएमसी के कुल मार्केटिंग वॉल्यूम का केवल 2-6 प्रतिशत हिस्सा है, लेकिन इस क्षेत्र में सरकारी कंपनियों का दबदबा है, जिनकी बाजार हिस्सेदारी 90 प्रतिशत से ज्यादा है। भारत में कुल एटीएफ बिक्री का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा घरेलू एयरलाइंस को जाता है।
इसके अलावा, मजबूत ऊर्जा रुझानों के चलते बुधवार को कमर्शियल एलपीजी और प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में भी बढ़ोतरी की गई। हालांकि, घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर कंपनियां अब भी नुकसान झेल रही हैं।
कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में करीब 10 प्रतिशत का इजाफा किया गया है।
सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों में नोमुरा ने गुजरात गैस को सबसे ज्यादा प्रभावित बताया है, क्योंकि यह कंपनी शॉर्ट-टर्म और स्पॉट एलएनजी पर ज्यादा निर्भर है, जिसकी कीमतें 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए संघर्ष के बाद दोगुनी हो गई हैं।
ब्रोकरेज ने यह भी कहा कि रिलायंस इंडस्ट्रीज की स्पेशल इकोनॉमिक जोन (एसईजेड) रिफाइनरी पर विंडफॉल टैक्स लागू नहीं होता है।
इसी बीच, गुरुवार को बीएसई में इंट्रा-डे ट्रेडिंग के दौरान आईओसीएल, बीपीसीएल और एचपीसीएल जैसी सरकारी तेल कंपनियों के शेयरों में 5 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।
--आईएएनएस
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