देश में 1,800 किलोमीटर लंबे एलपीजी पाइपलाइन नेटवर्क को मंजूरी, 7,000 करोड़ रुपए के निवेश से मजबूत होगी गैस आपूर्ति व्यवस्था

देश में 1,800 किलोमीटर लंबे एलपीजी पाइपलाइन नेटवर्क को मंजूरी, 7,000 करोड़ रुपए के निवेश से मजबूत होगी गैस आपूर्ति व्यवस्था

नई दिल्ली, 22 अगस्त (आईएएनएस)। देश की ऊर्जा अवसंरचना को मजबूत बनाने और रसोई गैस की आपूर्ति व्यवस्था को अधिक सुरक्षित एवं कुशल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस विनियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) ने लगभग 1,800 किलोमीटर लंबे एलपीजी पाइपलाइन नेटवर्क के विकास को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं में करीब 7,000 करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा।

ये नई पाइपलाइन परियोजनाएं तेलंगाना, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, कर्नाटक और गोवा जैसे छह राज्यों में विकसित की जाएंगी, जिनका उद्देश्य देश के एलपीजी परिवहन नेटवर्क को मजबूत करना और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देना है।

भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा तटीय क्षेत्रों के माध्यम से आयात करता है। इसके बाद गैस को देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाना पड़ता है। ऐसे में नई पाइपलाइन परियोजनाएं एलपीजी की आवाजाही को अधिक तेज, विश्वसनीय और किफायती बनाने में मदद करेंगी।

पीएनजीआरबी द्वारा स्वीकृत प्रमुख परियोजनाओं में 556 किलोमीटर लंबी चेरलापल्ली (तेलंगाना)-नागपुर (महाराष्ट्र) एलपीजी पाइपलाइन, 611 किलोमीटर लंबी झांसी (उत्तर प्रदेश)-सितारगंज (उत्तराखंड) पाइपलाइन तथा 633 किलोमीटर लंबी शिकरापुर (महाराष्ट्र)-गोवा एवं हुबली (कर्नाटक) पाइपलाइन शामिल हैं।

इन सभी परियोजनाओं का विकास देश की प्रमुख गैस अवसंरचना कंपनी गेल (इंडिया) लिमिटेड द्वारा किया जाएगा, जो इन पाइपलाइनों के निर्माण और संचालन की जिम्मेदारी संभालेगी।

इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद देश में पीएनजीआरबी द्वारा अधिकृत सामान्य वाहक एलपीजी पाइपलाइन नेटवर्क की कुल लंबाई लगभग 7,700 किलोमीटर से बढ़कर 9,500 किलोमीटर हो जाएगी। यानी पाइपलाइन नेटवर्क में करीब 23.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज होगी।

यह मंजूरी पहले से स्वीकृत कांडला-गोरखपुर एलपीजी पाइपलाइन परियोजना के बाद आई है, जिसकी लंबाई लगभग 2,757 किलोमीटर है और यह देश की सबसे लंबी एलपीजी पाइपलाइन मानी जाती है।

पीएनजीआरबी के अनुसार, एलपीजी परिवहन के लिए पाइपलाइन प्रणाली को दुनिया भर में सबसे सुरक्षित, किफायती और पर्यावरण-अनुकूल माध्यम माना जाता है। नई पाइपलाइनों के चालू होने से सड़कों पर एलपीजी टैंकरों की आवाजाही में उल्लेखनीय कमी आएगी।

इससे सड़क सुरक्षा में सुधार, लॉजिस्टिक्स लागत में कमी, यातायात दबाव में गिरावट और कार्बन उत्सर्जन में कमी जैसे कई लाभ मिलने की उम्मीद है। सड़क मार्ग की जगह पाइपलाइन परिवहन अपनाने से ऊर्जा आपूर्ति अधिक स्थायी और पर्यावरण के अनुकूल भी बनेगी।

नियामक बोर्ड ने कहा कि उसका दीर्घकालिक लक्ष्य एलपीजी को बॉटलिंग संयंत्रों तक पहुंचाने के लिए सड़क परिवहन पर निर्भरता को न्यूनतम करना है। नई पाइपलाइन परियोजनाएं इस लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

--आईएएनएस

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