भू-राजनीतिक तनावों के बीच निफ्टी के दिसंबर तक 25,000 तक पहुंचने की संभावना

भू-राजनीतिक तनावों के बीच निफ्टी के दिसंबर तक 25,000 तक पहुंचने की संभावना

नई दिल्ली, 19 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय शेयर बाजार का प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक निफ्टी 50 दिसंबर 2026 तक 25,000 के स्तर तक पहुंच सकता है। हालांकि पहले यह लक्ष्य 26,000 निर्धारित किया गया था। ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (एलटीसीजी) टैक्स में कटौती भर से विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के लगातार निवेश की वापसी सुनिश्चित नहीं होगी।

रिपोर्ट के अनुसार, कमजोर वैश्विक आर्थिक माहौल, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, आपूर्ति शृंखला से जुड़ी चुनौतियों और कंपनियों की आय में उल्लेखनीय अपग्रेड न होने के कारण लक्ष्य को घटाया गया है।

विश्लेषकों का कहना है कि संशोधित लक्ष्य मौजूदा स्तर से लगभग 8.1 प्रतिशत ऊपर है और यह वित्त वर्ष 2027-28 की अनुमानित आय पर 18 गुना वैल्यूएशन मल्टीपल को आधार बनाता है। उनका अनुमान है कि वित्त वर्ष 2028 की आय वित्त वर्ष 2027 के मुकाबले लगभग 9 प्रतिशत बढ़ सकती है।

हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि बाजार में 4 से 5 प्रतिशत की और तेजी आती है तो भारतीय शेयर बाजार मौजूदा वैल्यूएशन के आरामदायक स्तर से बाहर निकल जाएगा और फॉरवर्ड अर्निंग्स के लगभग 18.2 गुना के हालिया औसत के करीब पहुंच जाएगा।

बर्नस्टीन के अनुसार, पूंजी की जरूरत वाली अर्थव्यवस्था के लिए एलटीसीजी टैक्स में कटौती निश्चित रूप से सकारात्मक कदम होगी, लेकिन केवल इसी आधार पर विदेशी संस्थागत निवेशकों के स्थायी निवेश प्रवाह की उम्मीद नहीं की जा सकती।

रिपोर्ट में एक विश्लेषक के हवाले से कहा गया है, "एलटीसीजी में कटौती की घोषणा से बाजार में एक-दो दिन की तेज रैली देखने को मिल सकती है, लेकिन कई निवेशक इसका उपयोग अपने निवेश निकालने के अवसर के रूप में भी कर सकते हैं।"

उल्लेखनीय है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आगामी केंद्रीय बजट को लेकर चल रही चर्चाओं के दौरान एलटीसीजी टैक्स हटाने या उसमें बदलाव के सुझावों पर विचार करने के लिए सरकार की खुली सोच का संकेत दिया था।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) निवेशों में संभावित नरमी से निकट भविष्य में भारत को कोई बड़ा लाभ मिलने की संभावना नहीं है। भारतीय शेयर बाजार में फिलहाल वह रिटर्न प्रोफाइल और निवेश अवसर नहीं हैं, जो वैश्विक पूंजी को एआई-आधारित निवेशों की ओर आकर्षित कर रहे हैं।

ब्रोकरेज हाउस ने यह भी कहा कि नीतिगत समर्थन के लिए भी सीमित गुंजाइश दिखाई देती है। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के माध्यम से मिले लाभ आधार प्रभाव समाप्त होने और कीमतों में वृद्धि के कारण धीरे-धीरे कम हो सकते हैं।

इसके अलावा, कमजोर मानसून और जलाशयों में सामान्य से काफी कम जल स्तर भी निकट अवधि के जोखिम बने हुए हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है, "बॉन्ड यील्ड मजबूत हो रही हैं, जबकि कच्चे तेल और अन्य कमोडिटी की कीमतें चुनौती बनी हुई हैं। भू-राजनीतिक हालात भी अनुकूल नहीं हैं। अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर स्पष्टता नहीं है और रूस से तेल आपूर्ति को लेकर छूट मिलने के बावजूद जोखिम बरकरार हैं। ऐसे माहौल में पिछली तिमाही जैसी मजबूत आर्थिक वृद्धि दोहराना आसान नहीं होगा।"

--आईएएनएस

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