इजरायल चुनाव: देश की 120 सदस्यीय संसद के प्रतिनिधियों का चुनाव करेंगे 73 लाख मतदाता

इजरायल चुनाव: देश की 120 सदस्यीय संसद के प्रतिनिधियों का चुनाव करेंगे 73 लाख मतदाता

नई दिल्ली/यरूशलेम, 26 अक्टूबर (आईएएनएस)। इजरायल में मंगलवार को संसदीय चुनाव होने जा रहे हैं। संसदीय चुनाव के लिए लगभग 73 लाख योग्य मतदाता वोट डालेंगे। इस चुनाव में लोग देश की 120 सदस्यीय संसद (कनेसेट) के प्रतिनिधियों का चुनाव करेंगे।

भारत में इजरायल दूतावास की प्रवक्ता मिशेल सिरोटा ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि यह चुनाव इजरायल के जीवंत लोकतंत्र का उदाहरण है। उन्होंने बताया कि मतदाता तय करेंगे कि कौन-सी पार्टियां संसद में उनकी आवाज बनेंगी, चाहे वे सरकार का हिस्सा हों या विपक्ष का।

उन्होंने कहा, "हमारे चुनाव 27 अक्टूबर को हो रहे हैं। 73 लाख योग्य मतदाता वोट डाल सकते हैं। हमें उम्मीद है कि बड़ी संख्या में लोग मतदान करेंगे। यह एक बहुत ही जीवंत लोकतंत्र है। लोग इजरायल के भविष्य को लेकर सोचते हैं और यह तय करना चाहते हैं कि आने वाले चार वर्षों में देश की दिशा कैसी होगी।"

सिरोटा ने बताया कि संसद में कुल 120 सीटें हैं। मतदाता अपनी पसंद की किसी भी पार्टी को वोट दे सकते हैं। किसी पार्टी को जितने वोट मिलते हैं, उसी अनुपात में उसे संसद में सीटें मिलती हैं।

उन्होंने कहा, "आप सबसे बड़ी पार्टी को वोट दे सकते हैं या किसी भी अन्य पार्टी को। किसी पार्टी को जितनी सीटें मिलती हैं, उसी के आधार पर वह उतने प्रतिनिधि संसद में भेज सकती है, चाहे वे सत्तारूढ़ गठबंधन में हों या विपक्ष में।"

मिशेल सिरोटा के मुताबिक, वोटों की गिनती पूरी होने के बाद इजरायल के राष्ट्रपति तय करेंगे कि किस पार्टी को सरकार बनाने का पहला मौका मिलेगा। उस पार्टी को 28 दिन का समय दिया जाएगा।

उन्होंने कहा, "चुनाव के बाद राष्ट्रपति यह तय करेंगे कि किस पार्टी को गठबंधन बनाने का मौका मिलेगा। उस पार्टी के पास 28 दिन होंगे ताकि वह दूसरे दलों को साथ लाकर सरकार बना सके। अगर वह सफल नहीं होती, तो दूसरी सबसे बड़ी पार्टी को यह मौका दिया जाएगा। अगर वह भी सफल नहीं हुई, तो 90 दिनों के भीतर फिर से चुनाव करवाए जा सकते हैं।"

वरिष्ठ इजरायली पत्रकार यारोन डेसेल ने आईएएनएस को बताया कि मौजूदा जनमत सर्वेक्षणों में किसी भी पक्ष को साफ बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है। ऐसे में कई राजनीतिक विकल्प खुले हुए हैं।

उन्होंने कहा कि एक संभावना यह है कि फिर से चुनाव कराए जाएं। दूसरी संभावना राष्ट्रीय एकता सरकार की है, जिसमें बड़े दल मिलकर सरकार बनाएं। तीसरा विकल्प यह है कि नेतन्याहू विरोधी दल मिलकर अल्पमत सरकार बनाने की कोशिश करें।

डेसेल ने कहा, "फिलहाल सर्वेक्षणों में किसी भी पक्ष को स्पष्ट बहुमत नहीं मिल रहा है। ऐसी स्थिति में दोबारा चुनाव हो सकते हैं, राष्ट्रीय एकता सरकार बन सकती है या फिर नेतन्याहू विरोधी खेमे की अल्पमत सरकार बन सकती है। विपक्ष किसी तरह मौजूदा सरकार को बदलना चाहता है।"

इस बीच, आम इजरायली नागरिकों का कहना है कि चुनाव के नतीजे चाहे जो हों, देश को एकजुट रहना चाहिए।

एक नागरिक ने कहा, "मेरे हिसाब से नतीजे कुछ भी हों, हमें एक साथ रहना होगा। कौन सी सरकार सत्ता में आती है, उससे ज्यादा जरूरी है कि देश एकजुट रहे। हालात बहुत जटिल हैं और दुनिया को इजरायल के साथ खड़ा होना चाहिए।"

एक अन्य नागरिक ने कहा, "मुझे लगता है कि इस चुनाव में लोगों की सबसे बड़ी चिंता राष्ट्रीय सुरक्षा है। तीन साल के युद्ध के बाद अब हम सभी शांति चाहते हैं।"

इस चुनाव को इजरायल के हाल के इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण चुनावों में से एक माना जा रहा है। राष्ट्रीय सुरक्षा, राजनीतिक स्थिरता और युद्ध के बाद की परिस्थितियां इस बार मतदान को सीधे प्रभावित कर रही हैं। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि चुनाव के नतीजे देश को किस दिशा में ले जाते हैं और अगली सरकार कैसी बनती है।

--आईएएनएस

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