नई दिल्ली, 1 जुलाई (आईएएनएस)। भारत में इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहनों (ईवी) की मांग तेजी से बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहनों का पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) लगभग 90 प्रतिशत बढ़कर 82,737 यूनिट्स पर पहुंच गया। यह जानकारी वाहन पोर्टल के रजिस्ट्रेशन आंकड़ों से सामने आई है।
पिछले वर्ष की इसी तिमाही में 43,710 यूनिट्स के मुकाबले पंजीकरण में बढ़ोतरी हुई है, और उद्योग के अधिकारियों का मानना है कि पश्चिम एशिया संकट के दौरान पेट्रोल और डीजल की बढ़ी कीमतों के बीच इलेक्ट्रिक वाहनों की कम परिचालन लागत (रनिंग कॉस्ट) ने उपभोक्ताओं को बैटरी चालित वाहनों की ओर आकर्षित किया।
पूरी तिमाही के दौरान इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग लगातार मजबूत रही। अप्रैल में 24,963 यूनिट, मई में 27,320 यूनिट और जून में यह बढ़कर 30,454 यूनिट तक पहुंच गई।
इस दौरान टाटा मोटर्स ने 32,283 इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहन पंजीकृत किए, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 15,794 यूनिट की तुलना में 104 प्रतिशत अधिक हैं।
जून में कंपनी की कुल पैसेंजर वाहन बिक्री 63,083 यूनिट रही, जो पिछले साल जून के 37,237 यूनिट के मुकाबले 69 प्रतिशत अधिक है।
वहीं, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में टाटा मोटर्स की कुल पैसेंजर वाहन बिक्री 46 प्रतिशत बढ़कर 1,82,574 यूनिट हो गई।
जून में कंपनी की इलेक्ट्रिक वाहन बिक्री 14,800 यूनिट रही, जबकि पिछले साल जून में यह 5,228 यूनिट थी। इस तरह जून में ईवी बिक्री दोगुने से भी अधिक बढ़ी। पूरी तिमाही में कंपनी की ईवी बिक्री 112 प्रतिशत बढ़कर 34,467 यूनिट रही।
दूसरी ओर, महिंद्रा एंड महिंद्रा ने भी शानदार प्रदर्शन किया। कंपनी के इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहन रजिस्ट्रेशन लगभग दोगुने होकर 20,112 यूनिट पर पहुंच गए, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 10,144 यूनिट थे।
हालांकि, हुंडई मोटर इंडिया के इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहन रजिस्ट्रेशन में गिरावट दर्ज की गई। कंपनी के रजिस्ट्रेशन 2,142 यूनिट से घटकर 1,386 यूनिट रह गए।
उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया संकट के दौरान पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में हुई बढ़ोतरी ने बड़ी संख्या में ग्राहकों को इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर आकर्षित किया। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद इलेक्ट्रिक वाहनों की रनिंग कॉस्ट अपेक्षाकृत स्थिर बनी रही, जिससे इनकी मांग बढ़ी।
इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग ऐसे समय में देखने को मिली है जब कई वाहन कंपनियों ने हाल के महीनों में बढ़ती उत्पादन लागत, कच्चे माल की कीमतों और परिचालन खर्च का हवाला देते हुए अपने वाहनों की कीमतें बढ़ाई हैं।
1 जुलाई से टाटा मोटर्स ने अपने पेट्रोल, डीजल और इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहनों की कीमतों में 1.5 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की है। वहीं, कंपनी ने अपने कमर्शियल वाहनों की कीमतों में भी 2.5 प्रतिशत तक इजाफा किया है, जो अलग-अलग मॉडल और वेरिएंट के अनुसार लागू होगा।
इससे पहले हुंडई मोटर इंडिया ने अपने वाहनों की कीमतों में 12,800 रुपए तक की बढ़ोतरी की घोषणा की थी।
मारुति सुजुकी इंडिया ने भी अपने विभिन्न मॉडलों की कीमतों में 30,000 रुपए तक की बढ़ोतरी की है। वहीं, महिंद्रा एंड महिंद्रा ने अपनी एसयूवी और कमर्शियल वाहनों की कीमतों में 2.5 प्रतिशत तक की वृद्धि की है, जबकि विभिन्न मॉडलों में औसत बढ़ोतरी करीब 1.6 प्रतिशत रही है।
--आईएएनएस
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