वैश्विक तेल संकट के बीच भारत के इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल ने मचाई धूम, बायोफ्यूल रणनीति की दुनिया भर में चर्चा: रिपोर्ट

वैश्विक तेल संकट के बीच भारत के इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल ने मचाई धूम, बायोफ्यूल रणनीति की दुनिया भर में चर्चा: रिपोर्ट

नई दिल्ली, 12 मई (आईएएनएस)। मिडिल ईस्ट संकट के चलते वैश्विक सप्लाई में आई रुकावट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच एथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल तेजी से भविष्य के टिकाऊ ईंधन के रूप में उभर रहा है। 'द टाइम्स कुवैत' की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत इस क्षेत्र में दुनिया की सबसे सफल और सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाली बायोफ्यूल कहानियों में शामिल हो गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की लंबी अवधि की एथेनॉल ब्लेंडिंग रणनीति का बड़ा फायदा मिला है। इससे दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था भारत को होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से पैदा हुए तेल सप्लाई संकट के असर को कम करने में मदद मिली है, जिसने वैश्विक बाजारों को प्रभावित किया है।

रिपोर्ट में बताया गया कि भारत ने 2003 में केवल 5 प्रतिशत एथेनॉल ब्लेंडिंग लक्ष्य से शुरुआत की थी। इसके बाद देश ने बायोफ्यूल की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए और अब पेट्रोल में लगभग 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण हासिल कर लिया है, वह भी तय समय से पहले। अब भारत ई85 पेट्रोल यानी 85 प्रतिशत एथेनॉल वाले ईंधन और मल्टीपल एथेनॉल मिश्रण पर चलने वाले फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए ई100 ईंधन की तैयारी कर रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 2014 तक भारत में औसत एथेनॉल ब्लेंडिंग स्तर केवल 1.53 प्रतिशत था। हालांकि, लगातार सरकारी समर्थन, डिस्टिलरी क्षमता में निवेश और लंबी अवधि की योजना ने आज के तेज विस्तार की मजबूत नींव तैयार की।

रिपोर्ट में कहा गया कि इस अभियान का सबसे बड़ा मोड़ 2018 में आया, जब राष्ट्रीय बायोफ्यूल नीति लागू की गई। इससे कार्यक्रम का दायरा काफी बढ़ गया।

इसके तहत एथेनॉल उत्पादन को केवल गन्ने के शीरे तक सीमित न रखकर खराब खाद्यान्न, अतिरिक्त चावल, मक्का और कृषि अवशेषों तक बढ़ाया गया। इससे पानी की अधिक खपत करने वाले गन्ने पर निर्भरता कम हुई और उत्तर एवं मध्य भारत के अनाज उत्पादक क्षेत्रों को भी एथेनॉल अर्थव्यवस्था से जोड़ा गया।

रिपोर्ट में कहा गया कि जो पहल शुरुआत में केवल कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए पर्यावरणीय अभियान के रूप में शुरू हुई थी, वह अब ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक मजबूती और ग्रामीण विकास की व्यापक राष्ट्रीय रणनीति बन चुकी है।

रिपोर्ट के अनुसार, यह कार्यक्रम भारत को कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करके विदेशी मुद्रा में अरबों डॉलर की बचत करने में मदद कर रहा है। खासकर ऐसे समय में, जब पश्चिम एशिया में अस्थिरता के कारण वैश्विक सप्लाई चेन में अनिश्चितता बनी हुई है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि एथेनॉल अभियान से भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बड़ा फायदा मिल रहा है। बायोफ्यूल के लिए कच्चे माल की बढ़ती मांग से गन्ना किसानों, अनाज उत्पादकों, डिस्टिलरी उद्योग और बायोफ्यूल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपर्स को लाभ हो रहा है। साथ ही कृषि, परिवहन, लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में नए रोजगार के अवसर भी पैदा हो रहे हैं।

--आईएएनएस

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