दुबई में भारतीय कंपनियों का बढ़ता दबदबा, जून तक सक्रिय भारतीय कंपनियों की संख्या 85,841 पहुंची: दुबई चैंबर्स के अध्यक्ष

दुबई में भारतीय कंपनियों का बढ़ता दबदबा, जून तक सक्रिय भारतीय कंपनियों की संख्या 85,841 पहुंची: दुबई चैंबर्स के अध्यक्ष

नई दिल्ली, 28 अगस्त (आईएएनएस)। दुबई और भारत के बीच आर्थिक एवं व्यापारिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। दुबई चैंबर्स के अध्यक्ष मोहम्मद अली राशिद लूता ने बताया कि एक रिपोर्ट के अनुसार, जून 2026 के अंत तक दुबई चैंबर के सक्रिय सदस्यों के रूप में पंजीकृत भारतीय कंपनियों की संख्या बढ़कर 85,841 हो गई है। वर्ष 2026 की पहली छमाही के दौरान ही 7,579 नई भारतीय कंपनियां दुबई चैंबर से जुड़ीं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

दुबई-आधारित प्रकाशन अरेबियन बिजनेस की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापारिक संबंधों में लगातार विस्तार देखा जा रहा है। लूता ने बताया कि वर्ष 2025 में भारत और दुबई के बीच गैर-तेल व्यापार 60.6 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो सालाना आधार पर 15 प्रतिशत अधिक है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 से 2025 के बीच दुबई ने भारत से लगभग 8.8 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित किया, जिनमें से केवल वर्ष 2025 में ही 2.3 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) दर्ज किया गया, जो भारतीय कंपनियों के बढ़ते वैश्विक विस्तार और दुबई पर उनके भरोसे को दर्शाता है।

निवेश केवल एक दिशा में नहीं हुआ, बल्कि दुबई की कंपनियों ने भी भारत में उल्लेखनीय निवेश किया है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2016 से 2025 के बीच दुबई की कंपनियों ने भारत में 147 परियोजनाओं के माध्यम से 9.3 अरब डॉलर का निवेश किया। इन परियोजनाओं के जरिए 55,274 रोजगार अवसर भी सृजित हुए।

लूता ने आगे कहा कि पिछले एक दशक में दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में 136.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वर्ष 2016 में जहां यह व्यापार 25.6 अरब डॉलर था, वहीं अब यह बढ़कर 60 अरब डॉलर से अधिक हो चुका है। इसके साथ ही भारत दुबई का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया है।

उन्होंने कहा कि दुबई और भारत के संबंध लगातार बदलती व्यावसायिक आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित हो रहे हैं और व्यापार अभी भी इस साझेदारी का प्रमुख आधार बना हुआ है। हालांकि अब सहयोग का दायरा पारंपरिक क्षेत्रों से आगे बढ़कर नई प्रौद्योगिकियों और डिजिटल अर्थव्यवस्था तक पहुंच रहा है।

लूता के अनुसार, एजेंटिक एआई, डिजिटल अर्थव्यवस्था और तकनीकी नवाचार जैसे भविष्य-उन्मुख क्षेत्रों में भी दोनों पक्षों के बीच सहयोग तेजी से बढ़ रहा है। साथ ही, बड़ी संख्या में भारतीय कंपनियां मध्य पूर्व, अफ्रीका और अन्य वैश्विक बाजारों में विस्तार के लिए दुबई को अपने संचालन केंद्र के रूप में चुन रही हैं।

उन्होंने कहा, "ये आंकड़े दुबई और उसके भविष्य के विकास अवसरों के प्रति भारतीय कारोबारी समुदाय के मजबूत विश्वास को दर्शाते हैं।"

रिपोर्ट में कहा गया है कि दुबई भारतीय कंपनियों को मध्य पूर्व, अफ्रीका और अन्य वैश्विक बाजारों तक आसान पहुंच उपलब्ध कराता है। विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा, उत्कृष्ट संपर्क व्यवस्था, प्रतिस्पर्धी कारोबारी माहौल और निवेशकों व ग्राहकों तक सीधी पहुंच इसकी प्रमुख विशेषताएं हैं।

लूता ने यह भी कहा कि भारत-यूएई व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) ने दोनों देशों के बीच व्यापारिक बाधाओं को कम करने, बाजार पहुंच बेहतर बनाने और नए विकास अवसरों को खोलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके अनुसार, इस समझौते ने दोनों देशों के व्यवसायों को अधिक प्रतिस्पर्धी और वैश्विक स्तर पर सक्रिय बनने में मदद की है।

--आईएएनएस

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