कच्चे तेल में गिरावट से भारतीय इक्विटी बाजार में जोखिम घटा; 84,000 के स्तर तक जा सकता है सेंसेक्स : रिपोर्ट

कच्चे तेल में गिरावट से भारतीय इक्विटी बाजार में जोखिम घटा; 84,000 के स्तर तक जा सकता है सेंसेक्स : रिपोर्ट

मुंबई, 16 जुलाई (आईएएनएस)। भारतीय शेयर बाजार के आउटलुक में सुधार हुआ है और सेंसेक्स इस साल के अंत तक 84,000 के स्तर को छू सकता है। इसकी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट होना, घरेलू स्तर पर खपत मजबूत रहना और कंपनियों में आय से जुड़ा जोखिम कम होना है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई।

एचएसबीसी ब्रोकरेज की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के हफ्तों में भारतीय इक्विटी के लिए व्यापक आर्थिक माहौल में काफी सुधार हुआ है, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतें उम्मीद से अधिक तेजी से संघर्ष से पहले के स्तर पर वापस आ गई हैं।

इसमें कहा गया है कि तेल की कीमतों में गिरावट से कॉर्पोरेट मार्जिन पर दबाव कम हुआ है और कमाई के अनुमानों में भारी कटौती की संभावना भी घटी है।

रिपोर्ट के मुताबिक, अब वैल्यूएशन सामान्य हो गई हैं, जबकि ऊर्जा की कम कीमतों और मजबूत खपत ने कमाई के आउटलुक को बेहतर बनाया है।

इसके अलावा, हालिया भारी खरीदारी के बाद आने वाले महीनों में खपत धीमी हो सकती है, जबकि अल नीनो ग्रामीण मांग के लिए एक बड़ा जोखिम बना हुआ है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वित्त वर्ष 27 में कमाई में बढ़ोतरी के आम अनुमान (कमोडिटी को छोड़कर) को पहले के 18 प्रतिशत से घटाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है। हालांकि, इसमें और कटौती होने की उम्मीद है।

एचएसबीसी के एनालिस्ट के अनुसार, बॉन्ड और बैंक डिपॉजिट में विदेशी निवेश लाने के लिए आरबीआई के हालिया कदमों से रुपए को स्थिर करने और विदेशी निवेश की निकासी को कम करने में मदद मिली है।

उन्होंने बताया कि विदेशी संस्थागत निवेशक भी शुद्ध खरीदार बन गए हैं और जुलाई में अब तक लगभग 1.8 अरब डॉलर का निवेश आया है।

भारतीय इक्विटी को 'अंडरवेट' से 'न्यूट्रल' कैटेगरी में अपग्रेड करने के बावजूद, ब्रोकरेज ने चेतावनी दी है कि विदेशी निवेश शायद लंबे समय तक बना न रहे, क्योंकि ग्लोबल निवेशक एक बार फिर दूसरे बाजारों में एआई से जुड़े मौकों पर ध्यान दे सकते हैं।

हालांकि, उन्हें उम्मीद है कि इक्विटी के लिए घरेलू निवेशकों की मांग मजबूत बनी रहेगी।

इसके अलावा, ब्रोकरेज ने अपनी रिपोर्ट में भारत के प्राइवेट बैंकों, कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी, रियल एस्टेट, कमोडिटी और चुनिंदा इंडस्ट्रियल कंपनियों को प्राथमिकता दी है। हालांकि, एआई से जुड़ी चिंताओं के कारण सॉफ्टवेयर सर्विस सेक्टर को लेकर सतर्क हैं, भले ही इस सेक्टर के वैल्यूएशन में काफी सुधार हुआ है।

--आईएएनएस

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