भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से रुपया मजबूत, विदेशी निवेश बढ़ने की उम्मीद: रिपोर्ट

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से रुपया मजबूत, विदेशी निवेश बढ़ने की उम्मीद: रिपोर्ट

नई दिल्ली, 3 फरवरी (आईएएनएस)। भारत-अमेरिका व्यापार समझौता भारत के चालू खाते के घाटे (करंट अकाउंट डेफिसिट) को कम करने, रुपए को स्थिर रखने और समय के साथ वैश्विक झटकों से भारत की कमजोरियों को कम करने में मदद करेगा। मंगलवार को जारी एक्सिस सिक्योरिटीज की रिपोर्ट में यह बात कही गई है।

अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लगने वाले रेसिप्रोकल टैरिफ को पहले के 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने का फैसला लिया है।

एक्सिस सिक्योरिटीज की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह व्यापार समझौता भारत की मध्यम अवधि की आर्थिक वृद्धि और बाहरी स्थिरता के लिए सकारात्मक है। बेहतर बाजार पहुंच और टैरिफ में स्थिरता से निर्यात बढ़ेगा, मैन्युफैक्चरिंग में निवेश को बढ़ावा मिलेगा और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) में मजबूती आएगी।

यह समझौता खास तौर पर उन सेक्टरों के लिए फायदेमंद है, जिनका अमेरिकी बाजार से सीधा जुड़ाव है। टेक्सटाइल, केमिकल, फार्मा, ऑटो पार्ट्स, आईटी सर्विसेज और कुछ इंडस्ट्रियल सेक्टर को बेहतर बाजार पहुंच, टैरिफ में राहत और सप्लाई चेन में स्थिरता का लाभ मिलेगा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि समय के साथ ज्यादा ऑर्डर, फैक्ट्रियों की बेहतर क्षमता उपयोग और कमाई को लेकर साफ तस्वीर बनने से इन सेक्टरों में लगातार विकास और कंपनियों के मूल्य में बढ़ोतरी हो सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत-अमेरिका व्यापार संबंध अब एक सकारात्मक दौर में प्रवेश कर रहे हैं। पहले यह रिश्ता टैरिफ विवाद, नियमों से जुड़ी दिक्कतों और वैश्विक सप्लाई चेन में बदलावों से प्रभावित था। अब दोनों देश सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाने, चीन पर निर्भरता कम करने और रणनीतिक रिश्ते मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं।

भारत के लिए यह समझौता उसकी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की योजना (पीएलआई स्कीम), निर्यात बढ़ाने की रणनीति और वैश्विक स्तर पर बेहतर भूमिका निभाने के लक्ष्य से मेल खाता है। वहीं अमेरिका के लिए भारत एक बड़ा, भरोसेमंद बाजार और अहम सेक्टरों में मैन्युफैक्चरिंग का अच्छा विकल्प है।

रिपोर्ट के मुताबिक, शेयर बाजार के लिए यह समझौता कंपनियों की कमाई को लेकर भरोसा बढ़ाता है, खासकर निर्यात और पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) से जुड़े सेक्टरों में। इससे भारत उभरते बाजारों में एक सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में और मजबूत होता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को तुरंत असर दिखाने वाले कदम के बजाय मध्यम अवधि के मजबूत फायदे के रूप में देखना चाहिए। अगर इसे सही तरीके से लागू किया गया, तो यह भारत के निर्यात, मैन्युफैक्चरिंग और वैश्विक जुड़ाव को काफी मजबूत कर सकता है। निवेशकों को उन कंपनियों पर ध्यान देना चाहिए, जिनकी अमेरिका में मजबूत मौजूदगी, अच्छी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और मजबूत वित्तीय स्थिति है।

--आईएएनएस

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