भारत और त्रिनिदाद ने संसदीय भागीदारी को मजबूत करने पर चर्चा की

भारत और त्रिनिदाद ने संसदीय भागीदारी को मजबूत करने पर चर्चा की

केपटाउन, 17 सितंबर (आईएएनएस)। राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने गुरुवार को दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन में त्रिनिदाद और टोबैगो के प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष जगदेव सिंह से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने दोनों देशों के बीच संसदीय संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा की।

दक्षिण अफ्रीका में भारतीय उच्चायोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर बताया, "राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने केप टाउन में 69वें राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन से इतर त्रिनिदाद और टोबैगो के प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष जगदेव सिंह से मुलाकात की। उन्होंने दोनों पक्षों के बीच संसदीय जुड़ाव और सहयोग को मजबूत करने पर विचारों का आदान-प्रदान किया।"

मंगलवार को उपसभापति ने दक्षिण अफ्रीकी संसद की नेशनल काउंसिल ऑफ प्रोविंसेस (एनसीओपी) की अध्यक्ष रिफिल्वे मत्स्वेनी-त्सिपाने से मुलाकात की, जिसमें घनिष्ठ और लंबे समय से चले आ रहे संसदीय संबंधों को रेखांकित किया गया।

उच्चायोग ने एक्स पर लिखा, "राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने केप टाउन में 69वें राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन से इतर दक्षिण अफ्रीका की संसद की नेशनल काउंसिल ऑफ प्रोविंसेस की अध्यक्ष रिफिल्वे मत्स्वेनी-त्सिपाने से भेंट की।"

उच्चायोग ने आगे कहा, "इस बातचीत में भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच घनिष्ठ और लंबे समय से चले आ रहे संसदीय संबंधों और दोनों विधायिकाओं के बीच सहयोग और आदान-प्रदान को मजबूत करने के महत्व पर प्रकाश डाला गया।"

उपसभापति सिंह के नेतृत्व में एक राज्यसभा प्रतिनिधिमंडल सोमवार को केप टाउन पहुंचा। उच्चायोग ने बताया, "प्रतिनिधिमंडल दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन में 13-19 सितंबर 2026 तक केप टाउन इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आयोजित 69वें राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन में भाग लेने के लिए आया है।"

दक्षिण अफ्रीका की संसद और सीपीए दक्षिण अफ्रीका शाखा द्वारा आयोजित यह सम्मेलन 'बदलती विश्व व्यवस्था में अंतरराष्ट्रीय कानून और संसदीय लोकतंत्र को मजबूत करना: राष्ट्रमंडल नेतृत्व' के व्यापक विषय के तहत आयोजित किया जा रहा है।

इस सम्मेलन में राष्ट्रमंडल भर से अध्यक्ष, पीठासीन अधिकारी, सांसद और संसदीय अधिकारी एक साथ आए हैं, जो लोकतांत्रिक विधायिकाओं के सामने आने वाली समकालीन चुनौतियों पर विचार-विमर्श करने और संसदीय लोकतंत्र और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने के तरीकों की खोज करने के लिए एकत्रित हुए।

--आईएएनएस

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